नहीं रहे दिल्ली के इनसाइक्लोपीडिया कहे जाने वाले 108 वर्षीय चंगेजी, भगत सिंह से भी था नाता

नई दिल्ली। शहीद भगत सिंह को दिल्ली प्रवास में पनाह देने और उनके खानपान, सुरक्षा का ध्यान रखने वाले 108 वर्षीय नसीम मिर्जा चंगेजी नहीं रहे। उन्होंने पुरानी दिल्ली के पहाड़ी इमली स्थित आवास में शाम 5:40 पर अंतिम सांस ली। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके पुत्र सिंकदर बेग मिर्जा ने उनके निधन की पुष्टि की। 

उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी, जिसके कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ थे। शुक्रवार को आइटीओ स्थित कब्रिस्तान में शुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सबसे अधिक उम्र के नसीम मिर्जा चंगेजी को पुरानी दिल्ली का इनसाइक्लोपीडिया भी कहा जाता था। पिछले वर्ष दैनिक जागरण ने उनसे विस्तार से बातचीत भी की थी। तब उन्होंने बताया था कि वर्ष 1929 में बैरिस्टर आसिफ अली ने एक युवक को पैगाम के साथ भेजा, जिसमें कहां गया था कि यह युवक उनके पास रहेगा। जिसका नाम भगत सिंह था।

उन्होंने भगत सिंह को आश्रय दिया। वह भेष बदलकर आए थे तो दूसरी गली में रहने वाले अपने दोस्त दयाराम के यहां से भोजन की व्यवस्था कराई। भगत सिंह उस समय असेंबली में बम फोड़ने आए थे। यह काम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को सौंपा गया। वह सुबह नाश्ता कर असेंबली का मौका मुआयना करने निकल जाते थे कि कहां से बम फेंकना है। भगत सिंह ने उनसे कहा था कि रास्ता मिल गया है और उनका मकसद किसी की जान लेना नहीं है। इसलिए वो सिर्फ धमाका करेंगे और उन्होंने वैसा ही किया।

Back to top button