पंजाब का यह गांव है नारी सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल, जाने कैसे

बठिंडा। महिलाओं का सम्मान किए बगैर कोई कौम तरक्की नहीं कर सकती। महिलाओं को सम्मान और बराबरी का हक देने के लिए बठिंडा जिले के गांव हिम्मतपुरा की पंचायत ने एक नए दौर की शुरुआत की है। गांव की महिला सरपंच ने सफलता की यह कहानी बिना सरकारी मदद के लोगों के साथ मिलकर लिखनी शुरू की है।पंजाब का यह गांव है नारी सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल, जाने कैसे

महिलाओं के आत्मसम्मान को कोई ठेस न पहुंचाए इसलिए नए नियम बनाए गए हैं। गांव में किसी महिला को अपशब्द कहने पर 500 रुपये लगाया जाएगा। कानूनन किसी महिला को अपशब्द कहने पर धारा 509 के तहत एक साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन इस गांव से अभी तक ऐसा कोई भी मामला पुलिस थाने तक नहीं पहुंचा है। लोग मिल-बैठ कर ही मामले सुलझा लेते हैं। हिम्मतपुरा के लोगों की हिम्मत अब अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

बठिंडा से 30 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में प्रवेश करते ही गलियों में घरों की दीवारों पर ‘धीयां दा सत्कार करो’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के स्लोगन लिखे दिखाई पड़ते हैं। हर घर के बाहर परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला के नाम की नेम प्लेट लगी है। जो भी व्यक्ति इस गांव में आता है वह यहां के लोगों की हिम्मत व सोच को सलाम किए बिना नहीं रह पाता।

350 आबादी, 55 फीसद महिलाएं

गांव हिम्मतपुरा की आबादी करीब 350 है, जिसमें 55 फीसद महिलाएं हैं। गांव की छह सदस्यीय पंचायत की सरपंच मलकीत कौर सहित तीन महिला सदस्य हैं।

महिलाओं की 11 सदस्यीय कमेटी भी बनाई 

महिलाओं की 11 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है जिसकी चेयरपर्सन भी महिला सरपंच ही हैं। ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के ग्रामीण सेवक परमजीत सिंह के सहयोग से पंचायत ने यह पहल की है।

यहां के नियम हैं कुछ अलग 

1. गांव में महिला को अपशब्द कहने पर 500 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। 
2. बेटी के पैदा होने और शादी के बाद विदाई से पहले लगाया जाता है पौधा। 
3. महिला दिवस समारोह के लिए 25 हजार, ‘धीयां दी लोहड़ीÓ के लिए 20 हजार रुपये महिला सम्मान पर खर्च होंगे। 
4. गांव की बेटी के उपलब्धि हासिल करने पर 50 हजार रुपये व गरीब बुजुर्ग महिला के इलाज के लिए 50 हजार की सहायता राशि रखी गई है।
5. बेरोजगार युवक व युवतियों के स्वरोजगार प्रशिक्षण के लिए पांच लाख का बजट रखा है।

सरपंच व ग्राम सेवक ने बदली नुहार

ग्राम सेवक परमजीत सिंह व सरपंच मलकीत कौर का कहना है कि गांव में यह तमाम कार्य लोगों के सहयोग से ही शुरू किए गए हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत को अपनी जमीन से भी 5 लाख रुपये की वार्षिक आय होती है।

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