बिहार में लगेगी विस्तारकों की पाठशाला, RSS की तर्ज पर तैयार हो रही भाजपा

पटना। मिशन-2019 की तैयारियों में जुटी भाजपा बिहार में अनोखी पहल करने जा रही है। संगठन एवं नेताओं को आरएसएस की तर्ज पर शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्ता में दमखम के साथ भागीदारी के लिए संगठन को जमीनी स्तर पर तराशने एवं गुटबाजी खत्म करने के मकसद से किशनगंज में गुरुवार से दो दिनों तक पार्टी के शीर्ष नेता रीतियों-नीतियों एवं रणनीतियों का पाठ पढ़ाएंगे। पाठशाला में प्रदेश भर से विस्तारकों को बुलाया गया है।बिहार में लगेगी विस्तारकों की पाठशाला, RSS की तर्ज पर तैयार हो रही भाजपा

पार्टी ने जिलों के प्रभारियों और प्रदेश पदाधिकारियों को भी बैठक में तलब किया है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश कार्यशाला के चार सत्रों में विस्तारकों को संगठन गढऩे का पाठ पढ़ाएंगे, जबकि प्रदेश संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ और सह संगठन महामंत्री शिवनारायण महतो संगठन की भावी रणनीति और लक्ष्य से अवगत कराएंगे।

गुजरात में कांग्र्रेस से नजदीकी मुकाबले के बाद बिहार को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अति संवेदनशील है। यहां उसका मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल से है, जिसके पास परंपरागत वोट बैंक है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसकी बानगी भी मिल चुकी है। यही कारण है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लोकसभा चुनाव के पहले जमीनी स्तर पर अपनी जड़ें जमाने के पक्ष में है।

इसके लिए भाजपा के पास आरएसएस से बेहतर और कोई फार्मूला नहीं है। यही कारण है कि संघ की तर्ज पर बिहार में पहली बार पूर्णकालिक विस्तारक और अंश कालिक विस्तारक प्रचारक लगाए गए हैं। विस्तारकों को जनमानस का फीडबैक लेने के साथ ही पॉलिटिकल फीडबैक और कैडर की मजबूती का काम दिया है। जिस तरह आरएसएस पूर्णकालिक प्रचारक अपना घरबार त्याग कर पूरी तरह संगठन की सेवा में जुटते हैं, ठीक इसी तरह के मॉडल को भाजपा लागू करने में जुटी है।

रिपोर्ट कार्ड होगा जारी

मिशन-2019 की तैयारी में जुटी भाजपा ने जिलाध्यक्षों से केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों से अवगत कराते हुए विस्तारकों की जिला, मंडल, पंचायत, बूथ और गांवों के भ्रमण संबंधित कामकाज की जानकारी मांगी है। इसी आधार पर कार्यशाला में विस्तारकों का रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया जाएगा। पार्टी ने जिलाध्यक्षों को पूछा था कि ग्रामीण जनसंपर्क के दौरान विस्तारकों ने कितने परिवारों से मुलाकात की, बूथ स्तर पर कितनी बैठकें हुईं और ग्रामीण चौपाल कितने लगाए गए। 

 
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