प्रेग्नेंट पत्नी के पेट में पति ने मारे कई मुक्के, फिर कार से ट्रक और पेड़ में मारी टक्कर

नई दिल्ली.जिस पति ने अपनी 8 महीने की गर्भवती पत्नी के पेट में मुक्के बरसाए। फिर कार से ट्रक और पेड़ में टक्कर मारी, जिससे उसका गर्भपात हो गया। जिला अदालत ने इस मामले में आरोपी पति को महज 19 दिन की जेल और 3.50 लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी। अब हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर तीन साल की जेल और 3.50 लाख रुपए जुर्माने में बदल दिया है। यह भी आदेश दिया है कि हर्जाने की रकम मयूर विहार स्थित मूक-बधिर बच्चों के एनपीएस स्कूल में दी जाए।
…और जिला कोर्ट ने दी सिर्फ 19 दिन की जेल, अब हाईकोर्ट ने 3 साल की
2013 का मामला : महिला के बयान से हुआ खुलासा
हाईकोर्ट में पेश याचिका दिल्ली पुलिस ने दायर की थी। पुलिस की थ्योरी के अनुसार 17 अप्रैल 2013 को देर रात शालीमार बाग थाना पुलिस को सूचना मिली कि एक सेंट्रो कार पेड़ से टकरा गई है। मौके पर पुलिस को घायल पति-पत्नी मिले। घायलों का इलाज करवाया गया तो महिला के बयानों से वारदात का खुलासा हुआ। महिला का आरोप था कि उसका पति से घरेलू विवाद चल रहा है। वारदात के समय पति उसे मायके से अपने घर ले जा रहा था। मायके में झगड़ा होने के बाद रास्ते में भी उनकी कहासुनी हुई। पति ने उसे और बच्चे को जान से मारने की धमकी देते हुए पहले उसके पेट के निचले हिस्से में कई मुक्के मारे और कार पहले एक ट्रक और फिर पेड़ से टकरा दी।
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उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
इलाज के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि वारदात में महिला का गर्भपात हो गया है। पुलिस ने महिला की शिकायत पर हत्या के प्रयास और दुर्घटना की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। अगस्त 2016 में निचली अदालत ने दोषी पति को 19 दिन की कैद और 3.50 लाख रुपये पत्नी को देने की सजा सुनवाई। पुलिस ने यह तर्क देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि निचली अदालत द्वारा प्रदान सजा काफी कम है। जबकि हत्या के प्रयास में तो उम्रकैद तक का सजा का प्रावधान है।
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बच्चे की मौत से मां को होने वाली पीड़ा का कोई निदान ही नहीं है : हाईकोर्ट
जस्टिस विपिन सांघी व जस्टिस पीएस तेजी की डबल बेंच ने मामले की गंभीरता से लेते हुए कहा कि गर्भ में बच्चे की मौत से एक मां को जो पीड़ा होती है, उसका कोई निदान नहीं। उसे हम किसी भी तरह कम नहीं कर सकते। निचली अदालत के फैसले के बारे में बेंच ने कहा कि कोर्ट द्वारा दी गई इतनी कम अवधि की सजा से समाज पर बुरा असर पड़ेगा। महिलाओं से जुड़े अपराध का समाज पर व्यापक असर पड़ता है। ऐसे में इनमें उदाहरण देने वाला व्यवहार होने चाहिए।





