रॉबर्ट मुगाबे की वजह से इस तेज गेंदबाज ने छोड़ा था अपना देश, ये थी वजह

हेनरी ओलंगा रॉबर्ट मुगाबे के 37 साल के शासन के अंत को लेकर अब भी आश्वस्त नहीं है. जब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती उनके मन में इस अंत के प्रति संदेह बना रहेगा. ओलंगा जिंबाब्वे का प्रतिनिधित्व करने वाला पहला अश्वेत खिलाड़ी था, जिसने 2003 में रॉबर्ट मुगाबे के खिलाफ पहली बार सार्वजिनक विरोध का प्रदर्शन किया था. उस समय हेनरी ओलंगा और एंडी फ्लॉवर ने विश्व कप के एक मैच में काला बैंड बांध कर अपने विरोध को प्रदर्शित किया था. 
जिंबाब्वे के पूर्व तेज गेंदबाज ओलंगा को देश से निष्कासित कर दिया गया था. अब वह एडीलेड में रहते हैं. इन सालों ने ओलंगा को जिंबाब्वे के राष्ट्रपति का मुखर आलोचक बना दिया है. हालांकि, उन्होंने इंग्लैंड में अपने पहले कुछ साल बिताए और उस व्यक्ति से प्रतिशोध की कोशिशें की जिसका उसने विरोध किया था.
अपनी ऑस्ट्रेलियन पत्नी तारा और दो बेटियों के साथ 2015 से एडीलेड में रह रहे ओलंगा ने एक अखबार से बातचीत में कहा, ”साफ कहूं तो मुझे पता है कि वे अब मेरी परवाह नहीं करते. मुझे उम्मीद है कि वे मुझे भुला चुके होंगे. निश्चित रूप से रॉबर्ट मुगाबे के बारे में मेरी टिप्पणी अपमानजनक थी, और मुझे ऐसी ही टिप्पणी करनी भी चाहिए थी. यदि उस समय मैं उनके सामने झुक जाता तो कोई हेनरी ओलंगा कभी उनके खिलाफ न बोला होता. मुगाबे ने जिंबाब्वे और वहां के लोगों का बेहद अपमान किया है. ओलंगा ने कहा, देश के बारे में सोचने के बजाय मुगाबे ने केवल अपने और अपने शासन के बारे में ही सोचा है.”
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ओलंगा ने कहा कि, ”नेल्सन मंडेला ने केवल एक टर्म के बाद ही दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंप दी थी, लेकिन 93 वर्षीय रॉबर्ट मुगाबे लगातार सत्ता पर बने रहे.”
ओलंगा ने कहा, ”लीडरशिप के लिए यह जरूरी होता है कि आप किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी जगह लेने के लिए तैयार करें. आप हर समय केवल अपने आप पर ही फोकस नहीं कर सकते. जब आप 37साल से सत्ता में होते हैं तो लोग सोचने लगते हैं कि अब आपके जाने का समय आ गया है. अब सत्ता किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपनी चाहिए जो आपसे युवा है, क्योंकि आप मीटिंग्स में सोते रहते हैं.”
मुगाबे की नीतियों के खिलाफ ओलंगा के विरोध का 2000 के दशक में श्वेत किसानों के खिलाफ घूसपैठ माना गया था. इसकी वजह से जिंबाब्वे और उसके आसपास हिंसा और मौतें हुई थीं. जिंबाब्वे की राजनीति ने हमेशा ही लोगों का ध्रुवीकरण किया है. ओलंगा के विरोध के बाद उन्हें जान से मारने की अनेक धमकियां मिलीं थी. कुछ
लोगों को यह भी मानना है कि उन्हें ये धमकियां इसलिए मिली थीं क्योंकि जिंबाब्वे विश्व कप में दूसरे चरण में पहुंच गया था. अगले चरण में उन्हें दक्षिण अफ्रीका में खेलना था. ओलंगा किसी तरह वहां से इंग्लैंड निकल गए थे. 2006 में उनका जिंबाब्वे का पासपोर्ट खत्म हो गया था और वह 9 साल तक इंग्लैंड में ही रहे. बाद में उन्हें वहीं की नागरिकता मिल गई.
एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओलंगा कहते हैं कि, ”वह कभी राजनीतिक एक्टिविस्ट नहीं रहे. लेकिन मैंने मुगाबे के खिलाफ विरोध किया और इसके बावजूद मैं आज भी इस बात के लिए जाना जाता हूं.”
ओलंगा ने 5 गेंदों में 3 विकेट झटक भारत को करवाया वर्ल्ड कप से बाहर
1999 विश्व कप के दौरान जिंबाब्वे जैसी फिसड्डी टीम ने भारत को वर्ल्ड कप से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. और इसकी वजह बने थे उनके शानदार गेंदबाज हेनरी ओलंगा. ओलंगा की करिश्माई बॉलिंग की बदौलत टीम इंडिया मैच को जीतने के करीब पहुंचकर भी हार गई.
पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने निर्धारित 50 ओवर में ग्रांट फ्लावर (45) और उनके भाई एंडी फ्लावर (68 नाबाद) की बदौलत 9 विकेट खोकर 252 रन बनाए. भारत की ओर से 51 रन अतिरिक्त के रूप में आए. जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले ने 2-2 विकेट चटकाए. यहां से लगा कि जिम्बाब्वे जैसी कमजोर टीम के खिलाफ भारत मैच आसानी से जीत जाएगा.
टीम इंडिया की ओर से सलामी बल्लेबाज सौरव गांगुली (9) जल्द अपना विकेट गंवा बैठे मगर सदागोप्पन रमेश (55) ने बेहतरीन पारी खेलते हुए शानदार स्कोर की नींव रखी. इस बीच अजय जडेजा (43) और रॉबिन सिंह (35) ने भी अहम योगदान दिया. यह वही मैच था, जिसे सचिन तेंदुलकर पिता की मौत के चलते नहीं खेल सके थे.
भारत 219 रन पर अपने 7 विकेट गंवा चुका था. टीम को जीत के लिए 9 रन की जरूरत थी. जिम्बाब्वे के कप्तान ने 45वें ओवर में गेंद हेनरी ओलंगा को थमाई. पहली बॉल पर रॉबिन सिंह ने 2 रन के लिए दौड़ लगाई मगर अगली ही गेंद को ड्राइव करने की कोशिश में कैच आउट हो गए.
भारत को अब जीत के लिए 7 रन की जरूरत थी और गेंदें थी 2 शेष. मैदान पर अनिल कुंबले आए और आते ही सिंगल लिया. अब स्ट्राइक श्रीनाथ के पास थी. चौथी बॉल पर श्रीनाथ ने 2 रन लिए. भारतीय फैंस को लगा कि मैच अब उनकी मुट्ठी में है, लेकिन पांचवीं गेंद पर श्रीनाथ बोल्ड.





