दाल खरीदी की गड़बड़ी में गई भोंसले की कलेक्टरी,एक और आईएएस अफसर पर कार्रवाई
भोपाल .कम गुणवत्ता और खराब दाल खरीदने के साथ-साथ मंडियों में फैली अव्यवस्था के कारण एक और आईएएस अधिकारी को कलेक्टरी से हटा दिया गया। सरकार ने रविवार को आदेश जारी कर नरसिंहपुर कलेक्टर डॉ. रामराव भोंसले (मप्र कैडर 2007 बैच) का तबादला गृह विभाग में उपसचिव पद पर कर दिया। उनकी जगह गृह व पर्यटन विभाग के उपसचिव अभय वर्मा को नरसिंहपुर कलेक्टर का जिम्मा सौंपा गया है। करीब एक माह पहले 27 सितंबर को शासन ने प्याज खरीदी मामले में शाजापुर कलेक्टर रहीं अलका श्रीवास्तव को भी हटाया था।

प्यार-दाल खरीदी एक साथ चली
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि दाल खरीदी के प्रारंभ होने से खत्म होने और उसके बाद भी मंडियों में हालात ठीक नहीं हो पा रहे हैं। गोटेगांव मंडी अभी भी बंद है। कई मंडियों में दिक्कतें हैं। शासन के पास लगातार इसकी शिकायत हुई। इसी के चलते भोंसले को हटा दिया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि प्याज और दाल खरीदी एक साथ चली। दोनों की अव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री नाराज चल रहे थे। दाल खरीदी में सर्वाधिक नुकसान नरसिंहपुर जिले में ही हुआ है।
एनआरएचएम संचालक बने एस विश्वनाथन
– असम मेघालय कैडर से मप्र कैडर में आए 2008 बैच के अधिकारी एस विश्वनाथन को राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) का संचालक नियुक्त किया है। डीओपीटी ने एक जून 2017 को विश्वनाथन को मप्र कैडर में स्थानांतरित किया है। विश्वनाथन के संचालक बनने के बाद स्वास्थ्य व खाद्य आयुक्त डॉ. पल्लवी जैन गोविल मिशन संचालक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी।
भिंड कलेक्टर ने आलोचना के बाद वापस लिया आदेश
– रेवेन्यू कोर्ट का निरीक्षण स्कूलों के प्राचार्य व आरटीओ समेत 24 विभागों के अधिकारी करें। ऐसा आदेश कलेक्टर इलैया राजा टी ने एक दिन पहले ही जारी किया था। इसकी आलोचना हुई तो रविवार को कलेक्टर ने यह आदेश वापस ले लिया।
– आदेश इसलिए वापस लिया गया क्योंकि रेवेन्यू कोर्ट का निरीक्षण अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी नहीं कर सकते। इस मामले में कलेक्टर का कहना है कि उन्होंने तो राजस्व न्यायालयों की स्थिति को संवारने के लिए अन्य विभागों से मदद के तौर पर अतिरिक्त हैंड्स रेवेन्यू कोर्ट को दिए थे।
आदेश ऐसे आया विवादों में
– भिंड कलेक्टर का आदेश विवादों में तब आया, जब शनिवार को यह मामला सोशल मीडिया पर अधिकारियों के बीच वायरल हुआ। आदेश था कि एसडीओ, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व अन्य राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी अन्य विभागों के 24 अधिकारियों को सौंपी गई है।
– जिनमें मुख्य स्वास्थ अधिकारी, जिला सशक्तिकरण अधिकारी, डाइट प्राचार्य, आरटीओ, जिला शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्राचार्य, खादी ग्रामोद्योग के प्रबंधक, पीएचई के इंजीनियर जैसे अधिकारी शामिल किए गए।
– जबकि राजस्व न्यायालय भू- राजस्व संहिता की धाराओं से चलते हैं। इसमें नामांतरण, बटांकन, डायवर्शन और जमीन संबंधी विविध विवाद, अतिक्रमण जैसे वाद चलते हैं, जिनके संबंध में अन्य विभाग के अधिकारियों को कुछ जानकारी नहीं होती। यह निरीक्षण शनिवार व रविवार को होना था। रविवार को ही कलेक्टर ने यह आदेश वापस भी ले लिया।
इसे भी देखें:- OMG… कभी 5000 रुपए की कंप्यूटर ऑपरेटर थी ये लेडी, अब सालाना कमाती हैं 2Cr रु., जानें इनका SUCCESS मंत्र
हमने तो मदद के लिए लगाया था
इस संबंध में कलेक्टर इलैया राजा का कहना है कि हमने तो अन्य विभागों के अधिकारियों को रेवेन्यू कोर्ट की स्थिति को सुधारने के लिए अतिरिक्त हैंड्स के तौर पर मदद के लिए लगाया था। यह आदेश जांच संबंधी नहीं था, लेकिन रविवार को इसे वापस ले लिया। क्योंकि रेवेन्यू का काम रेवेन्यू डिपार्टमेंट के लोग ही देखें। मैंने स्वयं भी आज कुछ कोर्ट का निरीक्षण किया है।





