बीच सड़क पर लेबर पेन से कराह रही थी महिला, टीचर ऐसे मदद कर बचाई जान

भोपाल. शहर के शाहजहांनाबाद के संजय नगर में रहने वाली कमलेश सिंह को सही समय पर हास्पिटल पहुंचाकर मां और बेटे की जान बचा ली। दरअसल महिला फुटपाथ पर लेबर पेन से कराह रही थी। तभी वहीं से गुजर रहे गवर्नमेंट स्कूल टीचर ने उनकी मदद की। संदीप उनके ही स्कूल में पढ़ने वाली 11वीं, और 12वीं की लड़कियों को बीच रास्ते में उतारकर महिला को हॉस्पिटल पहुंचाया। 

बीच सड़क पर लेबर पेन से कराह रही थी महिला, टीचर ऐसे मदद कर बचाई जान

ये बताया स्कूल टीचर संदीप ने….

– संदीप सिंह के मुताबिक, वे एक स्कूल की सात स्टूडेंट को लेकर अशोक नगर में आयोजित स्टेट लेवल स्कूल कॉम्पीटिशन में शामिल होने गए थे।

– शनिवार रात वे खजुराहो एक्सप्रेस से भोपाल लौटे। स्टेशन से अपनी कार उठाई और बच्चियों को लेकर उन्हें स्कूल कैंपस में बने हॉस्टल छोड़ने जा रहे थे।

– नान के पेट्रोल पंप के पास एक युवक बाइक के पास खड़ा नजर आया। फुटपाथ पर एक महिला लेटी थी जो दर्द से कराह रही थी। रात के डेढ़ बज रहे थे, मुझे लगा कि शायद बाइक के पहिए में महिला की साड़ी फंस गई होगी, जिससे उसे चोट आई होगी।

– वहां से कई कार गुजरीं, लेकिन कोई नहीं रुका। इतना सोचने में हम करीब 500 मीटर आगे लिंक रोड-1 पर आ गए। महसूस हुआ कि उनकी मदद करनी चाहिए। मैंने कार पीछे ली और उनके पास लौटा। यहां महिला (कमलेश) को लेबर पेन शुरू हो चुका था।

– वह दर्द से कराह रही थी और रात होने के कारण उसके पति अर्जुन बेबस थे। मेरे साथ गई बच्चियां दसवीं-बारहवीं की थीं। मैंने उन्हें कार से उतारकर कहा कि बेटा हॉस्टल थोड़ी ही दूर है, आप लोग पैदल चली जाओगी क्या?

– उन्होंने कहा सर, आप पहले आंटी को अस्पताल पहुंचाओ। मैंने फौरन अर्जुन और कमलेश को कार में बिठाया और महज पांच मिनट में जेपी अस्पताल पहुंच गया। उन्हें कार में ही छोड़कर मैं मदद के लिए अस्पताल के स्टाफ को बुलाने पहुंचा।

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– स्ट्रेचर लाते, इससे पहले ही कमलेश ने एक बेटे को जन्म दे दिया। वह बेहोश भी हो गई थी। वहां मौजूद नर्स ने मिलकर डिलीवरी के बाद की प्रक्रिया पूरी की और कमलेश को वार्ड में शिफ्ट कर दिया।

पहले भी कई लोग गुजरे कोई मदद को नहीं रुका…

– महिला के पति अर्जुन ने बताया कि घर से चलते वक्त मैंने कमलेश से पूछा था कि ऑटो बुलवा लेता हूं। उसने कहा कि बाइक से ही चले हैं।
– इतनी रात हो चुकी थी कि जब कमलेश को लेबर पेन शुरू हुआ तो मैं कुछ कर ही नहीं पा रहा था। बस उसे दिलासा ही देता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही थी।
– तभी संदीप सिंह हमारे लिए भगवान बनकर आ गए। वहां से और भी कई लोग हमारी ओर देखते हुए गुजरे, फिर भी किसी ने मदद नहीं की।
– संदीप के कारण ही मेरी पत्नी को नई जिंदगी मिली है, मेरा बेटा भी स्वस्थ है।
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