आरबीआई की MPC बैठक तय करेगी बाजार की चाल, इन अहम नतीजों का दिखेगा असर

नई दिल्ली- पिछले दो हफ्ते से नुकसान में चल रही दलाल स्ट्रीट के लिए यह सप्ताह भी उथल-पुथल भरा रह सकता है। इस हफ्ते निवेशकों की नजर रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के फैसले, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की रफ्तार तथा वाहन बिक्री के आंकड़ों पर रहेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे भू-राजनीतिक हालात से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।

RBI's MPC meeting will decide the market moves, these key findings will be seen

बीते हफ्ते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) के बिकवाली के दबाव में प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट आई थी। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स बीते हफ्ते 638.72 अंक गिरा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी में भी इस दौरान 175.8 अंकों की गिरावट आई थी। इससे पिछले हफ्ते भी शेयर बाजार नुकसान में बंद हुए थे। सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था की चाल से आशंकित एफपीआइ की बिकवाली, रुपये में गिरावट तथा उत्तर कोरिया व अमेरिका के बीच की तल्खी जैसे हालात इस गिरावट की वजह बने।

इस हफ्ते आएंगे तीन बड़े नतीजे:

इस हफ्ते तीन अक्टूबर को विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआइ, चार को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक और पांच को सेवा क्षेत्र का पीएमआइ जारी होना है। निश्चित रूप से इनका निवेशकों की धारणा पर असर पड़ेगा। इनके अलावा ग्लोबल परिस्थितियों का असर भी बाजार पर दिखेगा। बीते हफ्ते वित्तीय घाटे को लेकर निवेशक संशय में रहे। हालांकि, अतिरिक्त उधारी जुटाने की सरकार की फिलहाल कोई योजना नहीं होने के आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान के बाद शेयर बाजार की चाल बदली और वह सात दिनों की लगातार गिरावट से गुरुवार को उबर पाया। इस साल अब तक शेयर बाजार में लगातार इतने दिनों तक की गिरावट नहीं रही थी।

आठ बड़ी कंपनियों के एम-कैप में गिरावट

सेंसेक्स की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह 82,653.59 करोड़ रुपये की गिरावट आई। सबसे अधिक नुकसान में रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 22,385.57 करोड़ रुपये घटकर 4,95,300.50 करोड़ रुपये पर आ गया।

हिंदुस्तान यूनीलिवर का बाजार पूंजीकरण 13,939.14 करोड़ रुपये घटकर 2,54,358.70 करोड़ रुपये पर आ गया। टीसीएस का एम-कैप 12,509.87 करोड़ रुपये घटकर 4,66,511.89 करोड़ रुपये रह गया। समीक्षाधीन सप्ताह में आइटीसी, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक और मारुति सुजुकी के बाजार पूंजीकरण में भी गिरावट आई। इस रुख के उलट ओएनजीसी का बाजार मूल्यांकन 7,956.61 करोड़ रुपये बढ़कर 2,18,999.16 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश की दूसरी सबसे बड़ी आइटी कंपनी इन्फोसिस का एम-कैप भी इस दौरान 162.28 करोड़ रुपये बढ़ा।

ब्रोकर्स को 30 नवंबर तक जमा कराना होगा आरबीएस डेटा

ब्रोकरों को चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों का रिस्क बेस्ड सुपरविजन (आरबीएस) डाटा 30 नवंबर तक जमा कराना होगा। प्रमुख शेयर बाजारों बीएसई और एनएसई ने सर्कुलर जारी कर सभी सक्रिय सदस्यों के लिए आरबीएस जमा कराना अनिवार्य किया है। सक्रिय सदस्यों में ऐसे सभी ब्रोकर शामिल हैं, जिन्होंने इस अवधि के दौरान शेयर बाजारों में एक भी सौदा किया था। आरबीएस डाटा केवल इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा कराना होगा। उसकी मुद्रित प्रतिलिपि जमा कराना अनिवार्य नहीं है। आरबीएस डाटा जमा नहीं कराने वाले ब्रोकरों पर आर्थिक दंड और अन्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंजों ने बाजार में कारोबारी जोखिम पर नजर रखने के लिए यह जानकारी मांगी है।

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