मऊ: मन्ना सिंह हत्याकांड में बाहुबली मुख्तार अंसारी सहित 8 बरी, 3 को उम्रकैद
मऊ. यहां के चर्चित ठेकेदार मन्ना सिंह मर्डर केस में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सहित 8 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया गया है। जबकि, तीन आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा और जुर्माना लगया गया है। बुधवार को मऊ की एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में मुख्तार समेत कुल 11 आरोपी थे।

29 अगस्त 2009 को हुई थी ठेकेदार की हत्या
– ठेकेदार मन्ना सिंह और उसके साथी राजेश राय की 29 अगस्त 2009 को नगर कोतवाली क्षेत्र में बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
– इस मामले में मन्ना सिंह के भाई हरेंद्र सिंह की तहरीर पर कोतवाली नगर में मऊ के सदर विधायक मुख्तार अंसारी, हनुमान पांडे समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
तीन आरोपी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
– बुधवार (27 सितंबर) को मऊ की एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई। जज आदिल आफताब आलम ने फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी, अनुज कनौजिया, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान, कल्लू सिंह, उमेश सिंह, संतोष सिंह, रजनी सिंह और शंकर सिंह को बरी कर दिया, जबकि जामवंत कनौजिया उर्फ राजू, अमरेश कनौजिया और अरविंद यादव को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा और जुर्माना लगाया। सजा सुनाने के साथ ही तीनों दोषियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में ले लिया गया।
– फैसला सुनाते वक्त खुद मुख्तार अंसारी कोर्ट में मौजूद नहीं थे। उनके वकील ने मेडिकल लेटर के साथ हाजिरी माफी की अपील की थी।
– बता दें, पूरे कैरियर में मुख्तार अंसारी के खिलाफ कई दर्जन मामलों में अब तक केवल इसी मामले में फैसला आया है, जबकि कई मामले या तो समझौते के आधार पर या गवाहों के मुकर जाने से खत्म हो गए हैं।
कैसे ठेकेदारी के मामले से डॉन बन गया मुख्तार
– मुख्तार अंसारी गाजीपुर के मोहम्मदाबाद युसूफपुर का रहने वाले हैं।
– क्राइम की दुनिया में पहली बार मुख्तार का नाम 1988 में आया।
– मंडी परिषद की ठेकेदारी को लेकर लोकल ठेकेदार सच्चिदानंद राय की हत्या के मामले में मुख्तार का नाम सामने आया।
– इसी दौरान त्रिभुवन सिंह के कांस्टेबल भाई राजेंद्र सिंह की हत्या बनारस में कर दी गई। इसमें भी मुख्तार का ही नाम सामने आया।
– मंडी परिषद की ठेकेदारी को लेकर लोकल ठेकेदार सच्चिदानंद राय की हत्या के मामले में मुख्तार का नाम सामने आया।
– इसी दौरान त्रिभुवन सिंह के कांस्टेबल भाई राजेंद्र सिंह की हत्या बनारस में कर दी गई। इसमें भी मुख्तार का ही नाम सामने आया।
माफिया डॉन ब्रजेश सिंह से हुई दुश्मनी
– 1990 में गाजीपुर जिले के तमाम सरकारी ठेकों पर ब्रजेश सिंह गैंग ने कब्जा शुरू कर दिया। अपने काम को बनाए रखने के लिए मुख्तार अंसारी के गिरोह से उनका सामना हुआ। यहीं से ब्रजेश सिंह के साथ इनकी दुश्मनी शुरू हो गई थी।
– 1991 में चंदौली में मुख्तार पुलिस की पकड़ में आए, लेकिन रास्ते में दो पुलिस वालों को गोली मारकर फरार होने का आरोप है।
– इसके बाद सरकारी ठेके, शराब के ठेके, कोयला के काले कारोबार को बाहर रहकर हैंडल करना शुरू किया।
– 1996 में एएसपी उदय शंकर पर जानलेवा हमले में उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आया।
– 1996 में मुख्तार पहली बार एमएलए बन गए। उन्होंने ब्रजेश सिंह की सत्ता को हिलाना शुरू कर दिया।
– 1997 में पूर्वांचल के सबसे बड़े कोयला व्यवसायी रुंगटा के अपहरण के बाद उनका नाम क्राइम की दुनिया में देश में छा गया।
– 2002 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला कराया। इसमें मुख्तार के तीन लोग मारे गए। ब्रजेश सिंह घायल हो गए। इसके बाद मुख्तार अंसारी पूर्वांचल में अकेले गैंग लीडर बनकर उभरे।
– 1991 में चंदौली में मुख्तार पुलिस की पकड़ में आए, लेकिन रास्ते में दो पुलिस वालों को गोली मारकर फरार होने का आरोप है।
– इसके बाद सरकारी ठेके, शराब के ठेके, कोयला के काले कारोबार को बाहर रहकर हैंडल करना शुरू किया।
– 1996 में एएसपी उदय शंकर पर जानलेवा हमले में उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आया।
– 1996 में मुख्तार पहली बार एमएलए बन गए। उन्होंने ब्रजेश सिंह की सत्ता को हिलाना शुरू कर दिया।
– 1997 में पूर्वांचल के सबसे बड़े कोयला व्यवसायी रुंगटा के अपहरण के बाद उनका नाम क्राइम की दुनिया में देश में छा गया।
– 2002 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला कराया। इसमें मुख्तार के तीन लोग मारे गए। ब्रजेश सिंह घायल हो गए। इसके बाद मुख्तार अंसारी पूर्वांचल में अकेले गैंग लीडर बनकर उभरे।
2005 से हैं जेल में बंद
– अक्टूबर 2005 में मऊ में हिंसा भड़की। इसके बाद उन पर कई आरोप लगे, जिन्हें खारिज कर दिया गया।
– उसी दौरान उन्होंने गाजीपुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तभी से वे जेल में बंद हैं।
– इसी दौरान कृष्णानंद राय से मुख्तार के भाई अफजल अंसारी चुनाव हार गए। मुख्तार पर आरोप है कि उन्होंने शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी और अतिकुर्रह्मान उर्फ बाबू की मदद से गोडउर के पास 5 साथियों सहित कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी।
– 2010 में अंसारी पर राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगा। मौर्य, मन्नत सिंह नामक एक स्थानीय ठेकेदार की हत्या का गवाह था। बसपा ने मुख्तार और उनके दोनों भाइयों को 2010 में निष्कासित कर दिया।
– उसी दौरान उन्होंने गाजीपुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तभी से वे जेल में बंद हैं।
– इसी दौरान कृष्णानंद राय से मुख्तार के भाई अफजल अंसारी चुनाव हार गए। मुख्तार पर आरोप है कि उन्होंने शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी और अतिकुर्रह्मान उर्फ बाबू की मदद से गोडउर के पास 5 साथियों सहित कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी।
– 2010 में अंसारी पर राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगा। मौर्य, मन्नत सिंह नामक एक स्थानीय ठेकेदार की हत्या का गवाह था। बसपा ने मुख्तार और उनके दोनों भाइयों को 2010 में निष्कासित कर दिया।
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क्या था कृष्णानंद राय मर्डर केस
– साल 2005 में मुख्तार अंसारी जेल में बंद थे।
– इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को उनके 6 साथियों सहित सरेआम गोलीमार हत्या कर दी गई।
– हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थी।
– मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थी।
– इस हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमई परिस्थितियों में मृत पाया गया था।
– उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से अंसारी और बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था।
– कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी का दुश्मन ब्रजेश सिंह गाजीपुर-मऊ क्षेत्र से भाग निकला था।
– 2008 में उसे उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया था।
– 2008 में अंसारी को हत्या के एक मामले में एक गवाह धर्मेंद्र सिंह पर हमले का आरोपी बनाया गया था।
– 2012 में महाराष्ट्र सरकार ने मुख्तार पर मकोका लगा दिया था। उनके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
– हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थी।
– मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गई थी।
– इस हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमई परिस्थितियों में मृत पाया गया था।
– उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से अंसारी और बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था।
– कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी का दुश्मन ब्रजेश सिंह गाजीपुर-मऊ क्षेत्र से भाग निकला था।
– 2008 में उसे उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया था।
– 2008 में अंसारी को हत्या के एक मामले में एक गवाह धर्मेंद्र सिंह पर हमले का आरोपी बनाया गया था।
– 2012 में महाराष्ट्र सरकार ने मुख्तार पर मकोका लगा दिया था। उनके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।





