ह्युमन राइट्स का हवाला देकर रोहिंग्या को रिफ्यूजी बनाने की गलती न करें: राजनाथ

नई दिल्ली.रोहिंग्या मुसलमानों के भारत में रहने पर होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि ह्युमन राइट्स का हवाला देकर अवैध शरणार्थियों को रिफ्यूजी बनाने की गलती नहीं की जानी चाहिए। वे म्यांमार से भारत में घुस आए हैं। रोहिंग्या रिफ्यूजी नहीं है, इस सच्चाई को हमें समझना चाहिए। कुछ दिन पहले राजनाथ श्रीनगर दौरे पर रोहिंग्या को जम्मू-कश्मीर के लिए खतरा बता चुके हैं। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर चुकी है। इसमें सरकार ने कहा था कि रोहिंग्या के पाकिस्तानी आतंकियों से रिश्ते हैं। इनके यहां रहने से देश की सिक्युरिटी पर गंभीर नतीजे हो सकते हैं। बता दें कि देश में फिलहाल 40 हजार रोहिंग्या म्यांमार से आकर रह रहे हैं। उनका दावा है कि 16 हजार का यूएन रिफ्यूजी डॉक्युमेंटेशन हो गया है।
ह्युमन राइट्स का हवाला देकर रोहिंग्या को रिफ्यूजी बनाने की गलती न करें: राजनाथ

3 अक्टूर को SC में होगी सुनवाई…

 – होम मिनिस्टर ने आगे कहा, ”देश में रिफ्यूजी स्टेटस लेने की एक प्रॉसेस होती है और इनमें से किसी ने इसे फॉलो नहीं किया है। रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर करने का फैसला इंटरनेशनल लॉ का वॉयरेशन नहीं है, क्योंकि हमने 1951 के यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन पर साइन नहीं किए थे। किसी भी रोहिंग्या ने भारत में शरणार्थी बनने के लिए अप्लाई भी नहीं किया है।”
– 18 सितंबर को केंद्र सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 16 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर कुछ कारण बताए थे। तब राजनाथ ने कहा कि जो भी फैसला होगा वो कोर्ट के मुताबिक होगा। हमें फैसले का इंतजार करना चाहिए। कोर्ट 3 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करेगा।

रोहिंग्या को ना रखने की 5 वजह

1) ये इलीगल इमीग्रेंट्स

– केंद्र में अपने एफिडेविट में कहा है कि रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से भारत में गैरकानूनी तौर पर घुसे हैं। लिहाजा, वो इलीगल इमिग्रेंट्स हैं। 

2) नेशनल सिक्युरिटी के लिए खतरा
– सरकार का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों का यहां रहना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। इनके पाकिस्तान में मौजूद आतंकी गुटों से रिश्ते हैं।
3) फंडामेंटल राइट्स इनके लिए नहीं
– हलफनामे के मुताबिक- फंडामेंटल राइट्स सिर्फ देश के नागरिकों के लिए होते हैं, ताकि वो भारत में जहां चाहें सेटल हो सकें। इलीगल रिफ्यूजी सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर इन अधिकारों को पाने का दावा नहीं कर सकते।

4) खतरा क्या? सीलबंद लिफाफे में बताएगी सरकार

– हलफनामे में सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों से पैदा होने वाले खतरों पर ज्यादा तफसील से कुछ नहीं बताया है। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वो नेशनल सिक्युरिटी को होने वाले खतरों के बारे में एक सीलबंद लिफाफे में तमाम जानकारी देंगे।

5) स्टेटस ऑफ रिफ्यूजी कन्वेंशन का हिस्सा नहीं है भारत

– हलफनामे में कहा गया है कि भारत स्टेटस ऑफ रिफ्यूजी कन्वेंशन (1951 और 1967) का हिस्सा नहीं है। ना ही इस पर भारत ने दस्तखत किए हैं। लिहाजा, इससे जुड़े कानून या शर्तें भी मानने के लिए भारत मजबूर नहीं है।

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किसने की सुनवाई?

– इस मामले की 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की। बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएम. खानविलकर और जस्टिस डीवाय. चंद्रचूढ़ भी थे। बेंच ने इस मामले के पिटीशनर नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) को नोटिस जारी नहीं किया। जबकि 18 अगस्त को NHRC ने केंद्र को इस मामले में सबसे पहले नोटिस जारी किया था।

भारत में कहां-कहां रोहिंग्या मुसलमान?

– म्यांमार से भारत में घुसे रोहिंग्या मुसलमानों की सबसे ज्यादा तादाद जम्मू में है। इसके अलावा ये हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में भी हैं।
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