नहीं थे पैसे तो अस्पताल ने भगाया, पत्नी को कंधे पर डेढ़ किमी तक लाया पति

ग्वालियर.कैंसर पहाड़ी पर स्थित कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान में टीकमगढ़ से अपनी पत्नी सुनीता का इलाज कराने आए सुखलाल अहिरवार को बिना जांच और इलाज के भगा दिया गया। क्योंकि उनके पास जांच के लिए 4200 रुपए नहीं थे। जब उसने प्रबंधन को बीपीएल कार्ड और मप्र सरकार का दीनदयाल उपचार योजना कार्ड दिखाया तो सुखलाल को यह कहते हुए भगा दिया गया कि सरकार के पास तुम जैसों के इलाज के लिए कोई बजट नहीं हैं जाओ यहां से।
नहीं थे पैसे तो अस्पताल ने भगाया, पत्नी को कंधे पर डेढ़ किमी तक लाया पति
अस्पताल से भगाए गए सुखलाल अहिरवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो अपनी कैंसर पीड़ित पत्नी को ऑटो से जेएएच तक ले जा सके। मजबूरन वे पत्नी को कंधे पर लादकर जेएएच के लिए चल पड़े। लेकिन जेएएच का पता मालूम न होने से वे थीम रोड के फ्लैग प्वाइंट तक करीब डेढ़ किलोमीटर दूर निकल गए। उसके साथ दो बेटे शेखर और दीपचंद्र भी पैदल ही चल रहे थे। इस बीच रास्ते में उसे देखने वालों में से किसी व्यक्ति ने केयर फाउंडेशन की टीम को फोन कर दिया और टीम ने वहां पहुंचकर सुखलाल से पूरा मामला पूछा। केयर फाउंडेशन के आकाश शिवहरे ने बताया कि हमसे जेएएच का पता पूछने के बाद सुखलाल फिर पत्नी को कंधे पर लादकर जाने लगा, तो हम लोगों ने उन्हें अपनी गाड़ी पर बिठाकर जेएएच पहुंचाया और डॉ. अक्षय निगम से इलाज शुरू कराया।

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सुखलाल का दर्द: पत्नी कंधे पर और बेटे को होती रही रास्ते में उल्टी

सुखलाल ने बताया कि मैं टीकमगढ़ में मजदूरी करता था वहां के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने मुझे यहां के कैंसर अस्पताल में इलाज कराने के लिए भेज दिया। इस अस्पताल में मेरी पत्नी की फाइल बनाई गई और एक जांच की गई। जिसमें करीब 4000 रुपए खर्च हो गए। फिर शनिवार को 4200 रुपए की जांच कराने के लिए बोल दिया, जब मैंने बताया कि मेरे पास पैसे नहीं है और मुख्यमंत्री की योजना दीनदयाल उपचार का कार्ड है तथा बीपीएल कार्ड है जिससे मेरा व मेरे परिवार का इलाज सरकार के खर्च पर होता है तो डॉ. बीआर श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के पास पैसा ही नहीं है हम फ्री में इलाज नहीं कर पाएंगे।
सुखलाल ने बताया कि पहाड़ी से जब मैं पत्नी को लेकर उतर रहा था तब मेरे छोटे बेटे दीपचंद्र (7) को उल्टियां हुई और उसकी भी तबीयत बिगड़ गई। दो दिन पहले मरीज आेपीडी में दिखाने आया था। उसकी मुझसे अब तक कोई मुलाकात नहीं हुई है। हमारे यहां इलाज के लिए कोई एडवांस जमा नहीं कराया जाता है। गरीब मदद की जहां तक संभव होता है, मदद ही की जाती है। गरीबी रेखा से नीचे का कार्डधारक मरीज को एस्टीमेट बनाकर दिया जाता है ताकि वह शासन से सहायता प्राप्त कर सके।’
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