भोपाल में पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक शुरू, तीन तलाक-बाबरी केस पर होगी चर्चा
भोपाल. यहां ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक रविवार को शुरू हो गई। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद हो रही यह बैठक अहम मानी जा रही है। इसमें तीन तलाक और बाबरी केस पर चर्चा होगी। पहली बार मुस्लिम महिलाओं का सम्मलेन भी बुलाया गया है। बता दें कि 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक को बैन कर दिया था।

बैठक में शिया और बोहरा समाज के धर्मगुरु भी शामिल…
– पर्सनल लॉ बोर्ड की इस बैठक में सुन्नी के अलावा शिया और दाउदी बोहरा समाज के धर्मगुरु और उनके प्रतिनिधि आए हैं।
– बैठक में तीन तलाक और बाबरी केस के कानूनी पहलुओं के बारे में बोर्ड मेंबर्स को जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी बाबरी एक्शन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी और बोर्ड मेम्बर अब्दुल कदीर एडवोकेट देंगे।
– बैठक में तीन तलाक और बाबरी केस के कानूनी पहलुओं के बारे में बोर्ड मेंबर्स को जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी बाबरी एक्शन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी और बोर्ड मेम्बर अब्दुल कदीर एडवोकेट देंगे।
– बोर्ड में शामिल पांच महिला मंबर्स भी इस बैठक में अपनी बात रखेंगी। उधर, बोर्ड मेंबर आरिफ मसूद ने बताया कि बैठक में सिर्फ वर्किंग कमेटी मेंबर भाग लेंगे। बैठक की अगुआई मोहम्मद राबे हसन नदवी करेंगे।
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पहली बार होगा महिलाओं का सम्मेलन
– तीन तलाक से जुड़े मसले और शरीयत के नियमों को लेकर बोर्ड ने पहली बार सोमवार को महिलाओं का सम्मेलन भी बुलाया गया है।
– यह जलसा सुबह 10 बजे से शुरू होगा। इसमें सिर्फ महिलाओं को जाने की इजाजत होगी।
– इसमें बोर्ड चेयरमैन मोहम्मद राबे हसन नदवी, मोहम्मद वली रहमानी, डॉ. असमा जेहरा, शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, ताजुल मसाजिद दारुल उलूम के मुखिया सिराज मियां अपने विचार रखेंगे।
– यह जलसा सुबह 10 बजे से शुरू होगा। इसमें सिर्फ महिलाओं को जाने की इजाजत होगी।
– इसमें बोर्ड चेयरमैन मोहम्मद राबे हसन नदवी, मोहम्मद वली रहमानी, डॉ. असमा जेहरा, शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, ताजुल मसाजिद दारुल उलूम के मुखिया सिराज मियां अपने विचार रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट एक बार में तीन तलाक को किया गैर-कानूनी
– 1400 साल पुरानी तीन तलाक की रिवाज पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
– 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है।
– बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए। लेकिन, 22 अगस्त को देर शाम सरकार ने इस पर अपना स्टैंड साफ कर दिया। लॉ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भले ही दो जजों ने कानून बनाने की राय दी है, लेकिन बेंच के मेजॉरिटी जजमेंट में तीन तलाक को असंवैधानिक बताया गया है। लिहाजा, इसके लिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है।
– 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है।
– बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए। लेकिन, 22 अगस्त को देर शाम सरकार ने इस पर अपना स्टैंड साफ कर दिया। लॉ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भले ही दो जजों ने कानून बनाने की राय दी है, लेकिन बेंच के मेजॉरिटी जजमेंट में तीन तलाक को असंवैधानिक बताया गया है। लिहाजा, इसके लिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है।
कौन-से तलाक बरकरार हैं? मुस्लिमों में तलाक कैसे होंगे?
– जब तलाक-ए-बिद्दत खारिज हो चुका है लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के पास दो ऑप्शन बरकरार हैं। पहला है- तलाक-ए-अहसन और दूसरा है- तलाक-ए-हसन।
– तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है। अगर 90 दिन में सुलह की कोशिश नाकाम रहती है तो तीन महीने में तीन बार तलाक कहकर पति अपनी पत्नी से अलग हो जाता है। इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है। इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।
– तलाक-ए-हसन के तहत पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल के दौरान तलाक कहता है। तीन साइकिल में तलाक कहने पर डाइवोर्स पूरा हो जाता है।
– तीन तलाक मामले की पैरवी कर चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया है।
– सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत पर फैसला दिया है।
– तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है। अगर 90 दिन में सुलह की कोशिश नाकाम रहती है तो तीन महीने में तीन बार तलाक कहकर पति अपनी पत्नी से अलग हो जाता है। इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है। इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।
– तलाक-ए-हसन के तहत पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल के दौरान तलाक कहता है। तीन साइकिल में तलाक कहने पर डाइवोर्स पूरा हो जाता है।
– तीन तलाक मामले की पैरवी कर चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया है।
– सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत पर फैसला दिया है।





