यहां हर घर में पसरा है सन्नाटा,रात में पुलिस महिलाओं से पूछती है तेरा मर्द कहां है

पटना. दीघा-राजीवनगरमें एक अजीब खामोशी है। पोलसन रोड का वह इलाका जहां तीन दिन पहले पुलिस और भीड़ आमने-सामने थी अब वहां सिर्फ पुलिस की जली हुई एक जीप और दुकान की ओट में बैठे कुछ पुलिस वाले ही नजर रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही भी कम है। जो लोग दिखते हैं वे बात करने से कतराते हैं।यहां हर घर में पसरा है सन्नाटा,रात में पुलिस महिलाओं से पूछती है तेरा मर्द कहां है

रात में पुलिस महिलाओं से पूछती है तेरा मर्द कहां है…

सैकड़ों मकान बने हैं लेकिन हर घर में सन्नाटा पसरा है। 5 सितम्बर को जहां प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के दौरान बाउंड्री गिराई थी वहां भी ईंट और स्टील शीट वाले एसबेस्टस जस के तस पड़े हैं। थोड़ी दूर चबूतरे पर बैठे धर्मेन्द्र प्रसाद (74 साल) से बात होती है। वह इलाके से तब से वाकिफ हैं जब यहां आलू-प्याज, मकई और गेहूं की खेती होती है। बोले-रात को घर में कोई मर्द नहीं रहता। रोज रात को एक-डेढ़ बजे पुलिस आती है। दरवाजा पीटती है। महिलाओं से पूछती है-घर के मर्द कहां हैं?
पास ही एक महिला की तरफ इशारा कर बोले-पूछिए इनसे। महिला बोली-सच यही है कि रोज पुलिस आती है। मेरे पति भी घर में नहीं रहते। थोड़ी देर बाद एक नौजवान घर से बाहर आया। पता चला कि वह उस महिला का पति है। दिन के वक्त जरूरी सामान और बच्चों को देखने आता है। पूछने पर बोला मेरे नाम से जमीन थोड़े ही है।
पुरखों ने खरीदी थी। चेहरे पर खौफ साफ झलक रहा था। वह बार-बार दूर बैठे पुलिस वालों को देखने जाता। पुलिस से इतनी खौफ क्यों है? नौजवान ने कहा-पकड़ कर ले जाती है और थाने में पीटती है। धर्मेन्द्र प्रसाद की चुप्पी टूटी-… जिसको-जिसको पुलिस पकड़ कर ले गई, सुनते हैं उसको बहुत मारा है। इसलिए लोग डरे हुए हैं।
यहां अधिकतर वही लोग जमीन खरीदते थे जो कटाव से पीड़ित थे। दानापुर के गंगहारा और सिंहीपुरी के कटाव पीड़ितों ने यहां घर बनाने के लिए थोड़ी-थोड़ी जमीन खरीदी।धर्मेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि वे खुद सिंहीपुरी से ही यहां आए थे, जब उनका घर कटाव में चला गया। तब से यहीं के होकर रह गए। कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
लोग बताते हैं कि जिस 4.5 एकड़ जमीन को प्रशासन अधिग्रहित करने आया था उनमें बड़े-बड़े अफसर, वकील और पुलिस वालों की भी जमीन है। लोगों के बीच यह भी कहानी कही सुनाई जा रही है कि आवास बोर्ड ने बड़े अफसरों को इस एवज में जमीन दी कि वे अधिग्रहण में मदद करेंगे। लेकिन जो गहना बेचकर और मजदूरी कर घर बनाया कहां जाए?

जमीन की कहानियां भी सुनाते हैं लोग

दीघा-राजीवनगर के लोग विवादित जमीन के बारे में तरह-तरह की कहानियां सुनाते हैं। एक बुजुर्ग ने कहा-सुनते हैं कि 1970 में आवास बोर्ड ने जमीन का अधिग्रहण किया था। इसके बाद किसानों ने मुकदमा लड़ना शुरू किया। बोर्ड ने किसी तरह जमीन को बंजर साबित कर दिया। और कोर्ट से डिग्री हो गई। लेकिन ऐसी बात नहीं थी। यहां की जमीन तो खूब उपजाऊ है। जमीन लेने के बाद भी आवास बोर्ड ने तो उसकी घेराबंदी की और ही किसानों को मुआवजा दिया। शादी-विवाह लगता, मरनी-हरनी होती तो पैसे की जरूरत पड़ती। लाचार किसानों ने जमीन बेचनी शुरू कर दी।

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जिनके परिजन पकड़े गए वही बोल रहे हैं

घटनास्थलके दूसरी तरफ पीसीसी की एक सड़क उत्तरी नेपाली नगर की तरफ जाती है। लोग बताते हैं कि 5 सितम्बर की रात एक-डेढ़ बजे यह इलाका पुलिस छावनी में तब्दील था। नेपाली नगर के शुरूआत में ही बीएमपी से रिटायर्ड दुधेश्वर राय का घर है। पुलिस उन्हें ही गिरफ्तार करने आई थी। वे फिलहाल जेल में हैं।
पूछने पर इलाके के एक युवक ने हमें दुधेश्वर राय के घर तक पहुंचाया। उनकी पत्नी सुशीला देवी दरवाजे पर ही मिल गईं। मीडिया से होने के कारण वे बात करने को राजी हो गईं। पूछते ही कहा-मेरे पति को वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस उठा कर ले गई। रात को एक-डेढ़ बजे घर के पीछे वाले दरवाजा का राइफल के कुंदे से शीशा तोड़ा डाला।
शीशे के टुकड़े अब भी वहीं गिरे हैं। फिर पुलिस घर के अंदर दाखिल हो गई और पति को भू-माफिया बोलकर ले गई। कहा-मेरे पति सत्रह साल पहले पुलिस से रिटायर हुए हैं। पोती को स्कूल से लेकर लौट रहे थे। तब हंगामा शुरू हो चुका था। सुशीला का तर्क है कि वर्ष 1988 में उनका मकान बन गया था। भरोसा दिलाने के लिए वह घर के पुराने हिस्से में ले जाती हैं जो अब सड़क से करीब पांच-सात फुट नीचे चला गया है।
बगल में बैठे दुधेश्वर के पुत्र मंटू कहते हैं-पुलिस को बताना चाहिए कि भूमि विवाद के किसी मामले में पहले क्या मेरे पिता आरोपी रहे हैं। अगर नहीं तो फिर अचानक भू-माफिया कैसे हो गए? मंटू कहते हैं कि हम घर छोड़ने को तैयार हैं बशर्ते वह आज के सर्किल रेट के हिसाब से हमें मुआवजा दे दे। हमने कुछ और परिवारों को तलाशने की कोशिश की लेकिन पता चला कि वे अपने-अपने परिजनों से मिलने बेऊर जेल गए हैं।
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