इन चीजों को यूथ मानते हैं प्राइवेसी का उल्लंघन, मोबाइल चेक से होती है चिढ़

भोपाल.राइट टू प्राइवेसी… करीब एक हफ्ते से यह विषय शहर के युवाओं के बीच भी काफी चर्चा में है। हर इंसान को संविधान के तहत मौलिक अधिकारों में निजता का अधिकार मिल हुआ है। लेकिन, हमारे शहर के टीन एजर्स पेरेंट्स का फेसबुक पर उनसे जुड़ना भी राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन मानते हैं।
These things are considered by the youth as violation of privacy,
-इस बात से न सिर्फ पेरेंट्स परेशान हैं, बल्कि इस बात को लेकर चिंतित भी हैं कि आखिर बड़े हो रहे उनके बच्चों को किस तरह प्रोटेक्ट करें, जिससे वे किसी गलत राह पर न जाएं।
-सिटी के यंगस्टर्स की सोशल मीडिया पर चल रहे इस बहस से हमने जानने की कोशिश की कि आखिर वे अपने राइट टू प्राइवेसी के दायरे में किन-किन चीजों को मानते हैं।

99% को मोबाइल चेक करने से परहेज

-काउंसलर डॉ. रत्ना शर्मा ने कहा, आज 5वीं-6वीं क्लास से ही हर बच्चे के हाथ में एंड्रॉयड फोन होता है। 
-ऐसे में वे फ्रेंड्स के इन्फ्लुएंस के कारण कई सारी चीजें देखते हैं और फिर नहीं चाहते कि यह पेरेंट्स को पता चले। 
-मेरे पास आने वाले 8वीं क्लास से लेकर ग्रेजुएशन तक के 99 प्रतिशत बच्चों को पेरेंट्स के उनके मोबाइल को हाथ में लेने तक में आपत्ति है। 
-वहीं, करीब 70 प्रतिशत बच्चे नहीं चाहते कि फेसबुक पर या किसी दूसरे माध्यम से पेरेंट्स उनके दोस्तों से इंटरैक्ट करें।

बच्चों से नरमी से पेश आएं पेरेंट्स

-एक्सपर्ट डॉ. विनय मिश्रा ने सुझाव दिया कि, पेरेंट्स को बच्चों के लिए हर वक्त पॉजिटिव नोट में बात करने की जरूरत है। 
-पेरेंट्स को यदि बच्चे के प्रोफाइल पिक पर ऐतराज है, तो इसे हटाने का कहने के बजाय किसी दूसरी फनी फोटो सजेस्ट कर सकते हैं।
 
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