बकरीद पर कटप्पा और बाहुबली की होगी कुर्बानी, जानिए ऐसा है क्यों…

  • कानपुर. बॉलीवुड के बाहुबली फिल्म में भले ही कटप्पा ने बाहुबली को मार दिया हो, जिसपर लोगो ने सवाल खड़े कर दिए कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा। मगर कानपुर शहर में इस बकरीद पर कटप्पा और बाहुबई दोनों की बलि दी जाएगी। दरअसल ये दोनों बकरे है जो इनदिनों लोगो के लिए कौतुहल का केंद्र बने हुए है।
    Katpah and Bahubali on Bakriad will be the sacrifice, know why it is ...

    200 किलोग्राम से ऊपर है इनका भार…

    – 2 सितम्बर को मनाई जाने वाली बकरीद को लेकर बेकनगंज इलाके के रहने वाले आकिब के बकरे इनदिनों सुर्ख़ियों में है। आकिब के पास वर्तमान में कुल 15 बकरे हैं जिनमें 5 बच्चे है।
    – आकिब ने कहा, ”वो इसबार बकरीद के मौके पर 3 बकरो की कुर्बानी देंगे। जिनका नाम है कटप्पा, बाहुबली और प्रिंस। इसमें कटप्पा 240, बाहुबली 226 और प्रिंस 208 किलो के है। कटप्पा की उंचाई करीब 3.5 फीट, बाहुबली 3 फीट और प्रिंस 2.8 फीट है।
    – आकिब ने कहा, ”3 साल पहले गुजरात के सूरत में रहने वाले एक बकरा कारोबारी उस्मान से इनको खरीद कर लाए थे। तब कटप्पा की उम्र पूरे एक साल की था और वजन 50 किलो था।”
    – ”बाहुबली करीब 8 महीने का था और इसका वजन 37 किलो के आसपास था, जबकि प्रिंस चार महीने का था जिसका वेट 35 किलो के आसपास था।”

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    कुर्बानी की परंपरा महरूम दादा जी ने शुरू किया था

    – कपड़ों का कारोबार करने वाले आकिब ने कहा, ”30 साल पहले महरूम दादा हाजी अब्दुल समत बकरीद के 10 दिन पहले गुजरात के सूरत कपड़ा खरीदने के लिए गए थे। मगर जब वो कानपुर आए तो कपड़ों के साथ 5 बकरा भी लेकर आए थे।”
    – ”उन्होंने उन बकरो को बकरीद पर कुर्बानी देकर उसे अपने रिश्तेदारों और जान पहचान वालो में बटवा दिया था। तब से ये परम्परा हमारे यहां चली आ रही है।”
    – ‘अब खुद सूरत और दिल्ली से बकरो को खरीद कर लाते है, जिसे ट्रेन द्धारा बुक करवा कर कानपुर लाते है। बकरे को देखने के लिए पूरा शहर उमड़ता है।
    – मोहल्ले में रहने वाले सैयद शाह ने कहा, ”आकिब के बकरो को देख तबियत खुश हो जाता है। वही इनके बकरे को देखने वालो में बकरो के साथ सेल्फी खिचवाने की भी होड़ मच जाती है।
    – एक युवक रहमान ने कहा, ”जब अपने बकरो को लेकर मोहल्ले में निकलते है तो लोग अपना काम धंधा छोड़कर उनके बकरो को देखने में लग जाते है।”

    ड्राईफूड्स के साथ कोल्डड्रिंक और दूध पिता है ये बकरा

    – आकिब ने कहा, ”अपने बकरो के लिए एक अलग से प्लॉट ले रखा है, जहां ये अपने सभी बकरो को रखते है। सुबह 6 से 7 बजे तक इन बकरो की मालिश की जाती है। मालिस करने के आधे घंटे बाद उनको नहलाया जाता है। इनके सैम्पु, साबुन और तेल है।”
    – ”1 महीने में करीब 2 दर्जन साबुन, 2 किलो सरसो का तेल और 2 बड़े डिब्बे सैम्पु के खर्च होते है। नहाने के पंद्रह मिनट बाद इनको गेंहू और चना खिलाया जाता है। फिर एक घंटे बाद इनके सामने हरी पत्तियां दाल दी जाती है।”
    – ”11 बजे इनको ड्राइफ्रूट्स और दूध पिलाया जाता है, इसके बाद करीब 1 बजे इनको फिर गेंहू और चना खाने के लिए परोसा जाता है। शाम 4 बजे इनको फिर ड्राइफ्रूट्स दिया जाता है, साथ में कोल्ड्रिंक पिलाते है।”
    – ”इसके बाद रात 9 बजे इनको रोटी और गुड़ दिया जाता है। कटप्पा एक बार में 20 से 25 रोटी खाता है तो बाहुबली और प्रिंस 15 से 20 रोटी खा जाता है।”
    – ”इनपर महीने में करीब 20 हजार रुपए बकरो के खानपान और अन्य सेवा पर खर्च होते है। इन बकरों को खरीदने वालो की लाइन लगी रही है, लोग मुंह मांगी कीमत देने को भी तैयार रहते है मगर इन बकरे को कभी नहीं बेचते है।”
    – ”वर्त्तमान में इनके कटप्पा बकरे की कीमत ढाई लाख रुपए, बाहुबली की करीब 1 लाख 80 हज़ार और प्रिंस की कीमत 1 लाख 55 हजार रुपए तक लोग लगा चुके है।
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