2 माह के भीतर शहर में 15 मरीजों की माैत, जांच रिपोर्ट में देरी से इलाज प्रभावित

 

भोपाल.हमीदिया में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए भागीरथ सिंह(परिवर्तित नाम) 21 अगस्त को भर्ती हुए थे। एम्स भोपाल से उनके सुआब की जांच रिपोर्ट दो दिन बाद आई। इसमें भागीरथ को स्वाइन फ्लू पॉजिटिव बताया गया। तब डॉक्टर्स ने ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक फेंफड़ों में वायरस एच-1 एन-1 का संक्रमण बढ़ने की वजह से उनकी मौत हो गई। मरीज के इलाज में देरी का यह अकेला मामला नहीं है।
15 patients dead in the city within two months, delayed investigation report delayed treatment
भोपाल में स्वाइन फ्लू से दो माह में 15 मरीजों की मौत हुई है, इनमें से 7 मरीजों की जांच रिपोर्ट सैंपल भेजे जाने के करीब 2 दिन बाद आई थी। मेडिकल एजुकेशन के रिटायर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. एनएम श्रीवास्तव ने बताया कि जांच रिपोर्ट सैंपल लेने के करीब 7 घंटे के भीतर आनी चाहिए। लेकिन लैब की कमी के कारण जांच रिपोर्ट समय पर नहीं आती।

राजधानी में अब तक 42 पॉजिटिव मरीज सामने आए

प्रदेश में मौत
16 मरीजों की उम्र 15 से 40
13 मरीजों की उम्र 40 से 60

मरने वाले 50 % युवा

स्वास्थ्य संचालनालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में स्वाइन फ्लू से मरने वाले मरीजों में 50 प्रतिशत युवा थे। पूरे प्रदेश में 15 साल से कम उम्र के केवल एक बच्चे की मौत हुई। यह मरीज भी अस्पताल में सर्दी, खांसी होने के 5 दिन बाद इलाज कराने पहुंचा था। अभी प्रदेश में स्वाइन फ्लू के जांच की लैब भोपाल एम्स, ग्वालियर और जबलपुर में है।

क्रिटिकल स्टेज में अस्पताल आए

सीएमएचओ डॉ. सुधीर जैसानी ने बताया कि भोपाल में स्वाइन फ्लू के 80 प्रतिशत मरीज अस्पताल में बीमारी का संक्रमण बढ़ने के बाद इलाज के लिए भर्ती हुए। डॉक्टर्स ने स्वाइन फ्लू की बी अौर सी कैटेगरी के मरीजों का इलाज जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना शुरू किया।

3 को डेंगू-चिकनगुनिया एक साथ 

राजधानी में डेंगू से दो मौत के बाद भी डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बुधवार को पहली बार 3 मरीजों की जांच रिपोर्ट यह बात सामने आई है कि तीनों को डेंगू और चिकनगुनिया दोनों हो गया है।

सरकार के स्तर पर चूक

-रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थानों पर स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों की स्क्रीनिंग करने स्पेशल कोल्ड अोपीडी शुरू नहीं की गई।
-स्वाइन फ्लू के लक्षण और उसके संक्रमण से बचने के उपायों को लेकर अवेयरनैस कैंपेन भोपाल में शुरू नहीं किया गया। 
-डेंगू और मलेरिया के संक्रमण को काबू करने स्वास्थ्य विभाग में मलेरिया और डेंगू अवेयरनैस कैंपेन चलाया। लेकिन, स्वाइन फ्लू के लक्षण और इलाज के इंतजामों के बारे लोगों को नहीं बताया।
-स्वास्थ्य केंद्रों में कोल्ड फ्लू ओपीडी अगस्त में शुरू की गई। जबकि बीमारी के मरीजों के मिलने की शुरूआत जुलाई 2017 में हो चुकी थी।
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