गोरखपुर में डॉ. कफील खान के घर पुलिस व मेडिकल टीम का छापा

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में बच्चों की मौत का मामला
राजधानी के हजरतगंज थाने में नौ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है रिपोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई त्रासदी के मामले में नामजद डॉ. कफील खान पर पुलिस के साथ मेडिकल कॉलेज प्रशासन का शिकंजा कस गया है। लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में मामला दर्ज होने और गोरखपुर के गुलहरिया थाना में केस ट्रांसफर किए जाने के बाद आज सुबह पुलिस और मेडिकल की टीम डॉ. कफील के आवास पर छापेमारी करने पहुंच गई। टीम ने घर पर चलने वाले अस्पताल का जायजा लेने के साथ ही बीआरडी की घटना को लेकर कफील के परिजनों से पूछताछ की है।
डॉ. कफील खान के तुर्कमानपुर व राजघाट स्थित आवास पर पुलिस व मेडिकल विभाग टीम के एक साथ छापा मारने की घटना से वहां हडक़ंप मच गया। टीमों ने डॉक्टर के घर पर तलाशी ली। इस दौरान कफील घर पर मौजूद नहीं थे। टीम ने कुछ अहम दस्तावेजों और सामग्री को कब्जे में लिया है। यहां पर अधिकारियों की टीमों ने डॉ. कफील की पत्नी से भी पूछताछ की है। अब तक की जांच-पड़ताल के आधार पर पुलिस ने इस मामले में कॉलेज के एक अधिकारी और तीन कर्मचारियों को भी अभियुक्त बनाने का संकेत दिया है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग क्षेत्राधिकारियों के नेतृत्व में तीन टीम गठित गई हैं। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज प्रकरण में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की गई थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रचार्य राजीव मिश्र, उनकी पत्नी और इंसेफ्लाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान सहित नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। मुकदमे की तफ्तीश क्षेत्राधिकारी कैंट कर रहे हैं। उनकी छानबीन में कॉलेज के एक अधिकारी सहित तीन कर्मचारियों की भी भूमिका इस मामले में संदिग्ध होने का संकेत मिला है। इस आधार पर उनको भी अभियुक्त बनाया जा सकता है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए क्षेत्राधिकारी कैंट, क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ और क्षेत्राधिकारी यातायात के नेतृत्व में अलग-अलग टीम गठित की गई है।
राजधानी के दो अस्पताल व एक क्लीनिक को किया गया सील
छापेमारी में मिली थी कई खामियां, भेजा गया था नोटिस
पांच डाक्टरों के खिलाफ एमसीआई को भी दिया जाएगा नोटिस
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आज राजधानी के दो अस्पतालों व एक क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की। इसके पहले खामियां मिलने पर विभाग ने एसआरएन अस्पताल, प्रिंस क्लीनिक और जेआर डायग्नोस्ट्रिक सेंटर को सील कर चुका है। टीम ने आज बीके हास्पिटल, सुगामऊ हॉस्पिटल और वर्मा क्लीनिक पर कार्रवाई करते हुए सील कर दिया।
एसीएमओ सुनीलकुमार रावत ने बताया कि छापेमारी के दौरान इन अस्पतालों में काफी गड़बडिय़ां मिली थी। इन अस्पतालों को नोटिस भेज कर जवाब भी मांगा गया था। इन अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। जिन अस्पतालों को सील किया गया है उसमें आईएमआई सीतापुर रोड स्थित बीके अस्पताल भी शामिल है। छापेमारी में पता चला था कि यह अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा अस्पताल में मरीजों का इलाज झोलाछाप डॉक्टरों से कराया जा रहा था। बिना लेबर रूम के महिलाओं की डिलीवरी कराई जा रही थी। वहीं अमरोही के चिनहट स्थित सुगामऊ हास्पिटल और तकरोही में चल रहे डॉक्टर वर्मा के क्लीनिक को सील किया गया। एसीएमओ राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे प्राइवेट अस्पतालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही प्राइवेट पै्रक्टिस कर रहे डाक्टरों पर शिकंजा कसा जाएगा।
आज शाम कैबिनेट मीटिंग में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगेगी मुहर
लोकभवन में आयोजित होगी बैठक
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज शाम लोकभवन में कैबिनेट मीटिंग होनी तय है। इस मीटिंग में सरकारी नौकरियों, बिजली चोरी पर लगाम लगाने और वक्फ सम्मत्ति समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लिए जाने की संभावना है।
इस बार कैबिनेट मीटिंग में समूह ख के नॉन गजटेड भर्ती में साक्षात्कार खत्म करने, समूह ग और घ की भर्ती से साक्षात्कार खत्म करने का प्रस्ताव पारित होने के आसार हैं। उन्नाव की नगर पंचायत पूर्वा का विस्तार किए जाने, विजिलेंस टीम को प्रोत्साहन राशि दिए जाने,
बिजली चोरी पर नियंत्रण लगाने और वक्फ बोर्ड से जुड़े मामलों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
विधान परिषद की चार सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू
आठ सितंबर तक वापस होंगे नाम, विपक्ष दिखा रहा उदासीनता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की चार सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। इन सीटों के जरिए भाजपा सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डॉक्टर दिनेश शर्मा व एक अन्य मंत्री को सदन में पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं विपक्ष में चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिख रहा है। नामांकन पांच सितंबर तक होंगे। इसके बाद 8 सितंबर तक नाम वापस लिये जायेंगे। 15 सितंबर को विधानभवन के तिलक हाल में मतदान होगा। उसी दिन देर रात तक मतगणना और चुनाव परिणाम घोषित कर दिये जायेंगे। खबर लिखे जाने तक किसी के नामांकन की सूचना नहीं थी।
चुनाव अधिकारी के मुताबिक 4 सीटों के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किया गया है। ऐसे में सभी 4 सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव होगा। एक सीट के लिए 202 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। भाजपा को छोड़ सभी दलों के पास आंकड़ों में विधायकों की कमी है। लिहाजा भाजपा प्रत्याशियों की जीत निश्चित मानी जा रही है।
गौरतलब है कि सपा के एमएलसी बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह, डॉ. सरोजनी अग्रवाल और अशोक बाजपेयी के इस्तीफे के बाद ये सीटें खाली हुई हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य केंद्र में वापसी नहीं करेंगे। बताया जा रहा है कि सीएम योगी, दिनेश शर्मा और केशव मौर्य के लिए प्रस्तावकों से हस्ताक्षर करवाया गया है। चौथे फॉर्म पर किसी का नाम नहीं। सूत्रों के मुताबिक स्वतंत्र देव सिंह और मोहसिन रजा में से किसी एक की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है।
छात्रों पर भारी पड़ सकती है स्कूलों की लापरवाही
सैकड़ों स्कूलों ने अब तक नहीं भरवाए 9वीं, 11वीं के फार्म
अंतिम तिथि निकलने के बाद भी कई कॉलेजों ने नहीं भेजी रिपोर्ट
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों की लापरवाही का खामियाजा राजधानी के हजारों स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राजधानी के करीब तीन सौ विद्यालयों ने अब तक कक्षा 9 व 11 के एक भी पंजीकरण ऑनलाइन अपलोड नहीं किए हैं जबकि ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 25 अगस्त निर्धारित थी। ऐसे में अधिकारियों ने विद्यालयों के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। निर्देश में कहा गया है कि जिनका तय समय से ऑनलाइन पंजीकरण का काम पूरा हुआ है, वहीं रिपोर्ट भेजे। यदि खेल किया तो विद्यालय के अधिकारी नपेंगे। यदि एक भी छात्र-छात्रा का पंजीकरण छूटा तो विद्यालय प्रशासन के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यूपी बोर्ड ने शिक्षा माफिया पर नकेल कसने के लिए दो साल पहले 9 से 12 तक ऑनलाइन पंजीकरण व फार्म भरने की व्यवस्था शुरू की थी। यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए कक्षा 9 व 11 का ऑनलाइन अग्रिम पंजीकरण अनिवार्य है। इसलिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने 25 अगस्त की रात 12 बजे तक स्कूलों को ऑनलाइन पंजीकरण कराने का समय निर्धारित किया है। राजधानी में यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब 741 विद्यालय संचालित हैं, लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत विद्यालयों ने कक्षा 9 व 11 का पंजीकरण ऑनलाइन अपलोड करने काम नहीं किया। ऐसे में इन विद्यालयों में पढऩे वाले सैकड़ों बच्चों का भविष्य अधर में फंस सकता है। बीते वर्ष एक अक्टूबर को रात 12 बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण की समय सीमा तय की गई थी। इसके लिए बाकायदा जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से कई निर्देश भी दिए गए, लेकिन राजधानी के कई स्कूलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लिहाजा नेशनल इंटर कॉलेज सहित कई कॉलेजों के सैकड़ों स्टूडेंट्स के पंजीकरण रह गए। बाद में कोर्ट के आदेश पर इन्हें शामिल किया गया था। डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह करीब 50 प्रतिशत स्कूलों ने अभी तक कक्षा 9 व 11 के पंजीकरण अपलोड नहीं किए हैं।





