एलयू ने रोकी 11 कॉलेजों की काउंसिलिंग

वेबसाइट अपडेट नहीं होने पर की कार्रवाई
तीस अगस्त तक का दिया अल्टीमेटम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
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लखनऊ। कॉलेजों द्वारा अपनी वेबसाइट अपडेट नहीं करने से लखनऊ विश्वविद्यालय ने बैचलर ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन (बीएलएड) की 28 से 30 अगस्त के बीच होने वाली काउंसलिंग स्थगित कर दी है। डीन सीडीसी ने 11 कॉलेजों की मान्यता की फाइल वेबसाइट अपडेट न होने की वजह से रोक दी। इनमें से तीन कॉलेजों को कार्य परिषद से बीएलएड की मान्यता मिल चुकी थी लेकिन फाइल रुकने से इन्हें मान्यता प्रमाणपत्र नहीं मिला है। सीडीसी ने इन्हें वेबसाइट अपडेट करने के लिए 30 अगस्त तक का समय दिया है। इसलिए अब 30 अगस्त के बाद ही काउंसिलिंग के आसार है।
एलयू प्रशासन ने सभी कॉलेजों को उनकी वेबसाइट पर पूरी तरह से अपडेट करने का आदेश दिया है। कॉलेजों को वेबसाइट पर प्रिंसिपल का नाम, मोबाइल नंबर, कॉलेज का लोगो, शिक्षकों के नाम, उनके मोबाइल नंबर और फोटोग्राफ, पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रमों में सीट संख्या का विवरण देना अनिवार्य है। निजी कॉलेजों में शिक्षकों के अनुमोदन और सीटों को लेकर होने वाले फर्जीवाड़े को देखते हुए यह आदेश जारी किया है। लविवि ने सभी सहयुक्त डिग्री कॉलेजों को वेबसाइट पर ब्यौरा अपलोड करने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया गया था।
इस अवधि के बाद कॉलेज द्वारा भेजे गए किसी भी पत्र पर विचार नहीं करने की बात कही गई थी। कई कॉलेजों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में विवि ने तीन कॉलेजों की फाइल रोक दी है। इन कॉलेजों ने नए कोर्स के लिए आवेदन किया है। इनमें श्री दुर्गा शिक्षा निदेशक डिग्री कॉलेज गोमतीनगर, जीएसआरएम मेमोरियल कॉलेज और श्री दुर्गा शिक्षा निकेतन पीजी कॉलेज का नाम भी शामिल है। इन कॉलेजों को कार्य परिषद से बीएलएड की मान्यता मिल चुकी है। अब फाइल रुकने की वजह से इनका प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा है। कुलसचिव का आदेश होने की वजह से बिना वेबसाइट अपडेट किए कोई भी फाइल नहीं बढ़ेगी। इस साल से राजधानी के 13 डिग्री कॉलेजों में 50 सीट के हिसाब से कुल 650 सीट हैं। तीन कॉलेजों की मान्यता प्रमाणपत्र पर स्थिति 30 अगस्त के बाद ही साफ हो सकती है। बाकी कॉलेजों की काउंसिलिंग के बाद दोबारा काउंसिलिंग कराना काफी मुश्किल होगा।

दीपक मिश्रा बने देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश

नई दिल्ली। जस्टिस दीपक मिश्रा ने आज देश के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज उन्हें देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई। जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस खेहर की जगह मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली है। वह तीन अक्टूबर 2018 को रिटायर होंगे।
जस्टिस दीपक मिश्रा अपने कई फैसलों के चलते चर्चा में रहे हैं। जस्टिस मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने ही याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई थी। उन्होंने ही सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने का आदेश था। उनकी अगुआई वाली बेंच ने ही निर्भया रेप केस के दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस दीपक मिश्रा का जन्म 3 अक्टूबर 1953 को ओडिशा में हुआ था। वह भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले ओडिशा के तीसरे न्यायाधीश होंगे। इनके पहले जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और जस्टिस गोपाल वल्लभ पटनायक भी ओडिशा से थे और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रह चुके हैं।

लोहिया अस्पताल में कुत्तों द्वारा शव को क्षत-विक्षत करने का मामला

कमेटी ने शुरू की जांच, आज आ सकती है रिपोर्ट

चार को किया जा चुका है बर्खास्त, एक सुपरवाइजर फरार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोहिया अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में एक महिला का शव कुत्ते द्वारा नोचे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है जबकि एक सुपरवाइजर फरार है। वहीं दूसरी ओर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। आज कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों की माने तो यह जांच जिम्मेदारों का बचाने की कवायद भर है। इस मामले में अभी तक किसी बड़े अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है।
घटना के तत्काल बाद अस्पताल प्रशासन ने गार्ड, वार्ड ब्वाय और सुपरवाइजर आशीष, पवन सिंह और इस्लाम को हटा दिया गया है। मामले में तीन की गिरफ्तारी की गई है जबकि अनिल सिंह अभी तक फरार है। वहीं इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। यह कमेटी पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इस घटना के दूसरे दिन अस्पताल प्रशासन के आलाधिकारी इस घटना को लगभग भूल गए। यही नहीं अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। इतना ही नहीं अस्पताल में कुत्ते घूमते दिखे। अस्पताल के निदेशक डीएस नेगी का कहना है कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गयी है। दोषियों के खिलाफ कवायद शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि कल लोहिया अस्पताल के शवगृह में एक महिला के शव को कुत्तों ने क्षत-विक्षत कर दिया था। इस मामले की गूंज प्रदेश सरकार तक पहुंची थी।

लोहिया संस्थान के छात्रावास का उद्घाटन करेंगे सीएम

पूर्व मेयर डॉ. एससी राय के नाम पर होगा छात्रावास

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में पूर्व मेयर पद्मश्री डॉ. एससी राय के नाम पर छात्रावास होगा, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज करेंगे। यह छात्रावास संस्थान के मुख्य कैंपस में बना हुआ है। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम चार बजे सायं होगा।
लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय ने बताया कि संस्थान के प्रशासनिक भवन के बगल में 11 मंजिला भवन बनकर तैयार है। यह भवन करीब 91.76 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है। यह भवन पूरी तरह वातानुकूलित है। इस भवन में 233 कमरे हैं। इस भवन का नाम पद्मश्री डॉ. एससी राय छात्रावास रखने का फैसला पहले ही लिया गया था। भवन के समक्ष लगे फव्वारे के पास डॉ. एसी राय की मूर्ति स्थापित की जाएगी। गौरतलब है कि गोमती नगर में लोहिया अस्पताल व लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान का निर्माण समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव ने कराया था। अस्पताल में डॉ. लोहिया की मूर्ति भी स्थापित की गई है। अब संस्थान में पूर्व मेयर व मशहूर चिकित्सक रहे डॉ. एससी राय की प्रतिमा का अनावरण उनकी पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी ने करने का फैसला किया है।

आसाराम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामले में जेल में बंद आसाराम को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने आसाराम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। साथ ही बलात्कार से जुड़े मामले में धीमी गति से ट्रायल चलने को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए गुजरात सरकार को फटकार लगाई है।
आसाराम बापू की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि उनके केस का ट्रायल बेहद धीमी गति से चल रहा है। आसाराम ने इस आधार पर कोर्ट से बेल दिए जाने की मांग की थी। मगर, कोर्ट ने आसाराम की इस अपील को दरकिनार कर दिया और जमानत देने से मना कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई दीपावली के बाद होगी। हालांकि, कोर्ट ने आसाराम की शिकायत पर सरकार से सवाल भी किए हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि केस का ट्रायल धीरे क्यों चल रहा है। अब तक पीडि़त का बयान दर्ज क्यों नहीं किया गया। गौरतलब है कि स्वयंभू संत आसाराम बापू पर नाबालिग लडक़ी से रेप का आरोप है। यह मामला वर्ष 2013 का है। ये भी कहा जाता है कि आसाराम आशीर्वाद देने के बहाने लड़कियों से छेड़छाड़ और यौन शोषण करते थे। इसके अलावा आसाराम के खिलाफ गैरकानूनी रूप से जमीन हथियाने, तंत्र-मंत्र के लिए बच्चों की हत्या करने, रेप करने जैसे मामले भी चल रहे हैं। फिलहाल, आसाराम जेल में बंद हैं।

शिक्षामित्रों की राह में रोड़ा अटका सकते हैं बीटीसी व टीईटी के अभ्यर्थी

सरकार के वेटेज देने के प्रस्ताव के खिलाफ जाएंगे कोर्ट
तीन सदस्यीय कमेटी शिक्षामित्रों की मांगों पर आज दे सकती है रिपोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आज शिक्षामित्रों द्वारा दी गई तीन दिनों की मियाद खत्म हो रही है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई निर्णय अभी तक नहीं ले पाए हैं। इससे ऐसा लगता है शिक्षामित्रों की टकराहट एक बार फिर हो सकती है। शिक्षामित्रों पर क्या फैसला लिया जाता है इस पर बीटीसी, बीएड व टीईटी पास अभ्यर्थी भी नजरे बनाए हुए हैं। यदि शिक्षामित्रों को सहूलियत दी गई तो बीटीसी, बीएड व टीईटी पास अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। वह भी शिक्षक पद पर अपना दावा ठोक रहे हैं। वहीं, शिक्षामित्रों की मांगों पर सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी आज अपनी रिपोर्ट दे सकती है।
प्रदेश में 1.70 लाख शिक्षामित्रों को लेकर सरकार निर्णय ले चुकी है, लेकिन शिक्षामित्र इससे सहमत नहीं है। बीते दिनों उन्होंने राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद ही इसे खत्म किया। राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का निर्णय लिया है। वहीं 2.5 अंक प्रतिवर्ष सेवा संबंधी भारांक यानी वेटेज दिया जाएगा। शिक्षक नियमावली में शिक्षामित्रों से संबंधित संशोधन किए जाएंगे। अक्टूबर में टीईटी होगा और दिसंबर में भर्ती करने की योजना है। लेकिन शिक्षामित्र 10 हजार रुपये मानदेय पर काम करने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर बीटीसी, बीएड व टीईटी पास अभ्यर्थी भी सरकार की मुश्किल बढ़ाने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार किसी को सहूलियत यदि देगी तो वह अब न्यायालय की शरण में जाएंगे।

आपत्तियां आने लगी सामने
बीटीसी ट्रेनी वेलफेयर एसोसिएशन ने वेटेज पर आपत्ति जताई है कि हरियाणा व पंजाब हाईकोर्ट ने वेटेज के एक ऐसे ही मामले में 24 अंकों के भारांक को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा 24 अंकों का भारांक (वेटेज) देकर संविदा शिक्षकों को वरीयता देना अवैध रूप से नियमितीकरण की प्रकिया है लिहाजा इसे रद्द किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निर्णय पर सहमति जताते हुए इसके खिलाफ दायर एसएलपी को खारिज कर दिया।

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