ब्रेक लगते ही रेल इंजन में बनेगी बिजली, अक्टूबर से पटरी पर
भोपाल. भोपाल सहित विभिन्न रेल मंडलों को ऐसे डीजल इंजन मिलेेंगे जो ट्रेन में ब्रेक लगते ही बिजली बनाने लगेंगे। वाराणसी के डीजल लोको शेड में बनाए जा रहे इंजनों में बिजली उत्पादन करने की प्रक्रिया की टेस्टिंग कर ली गई है, जो सफल रही है। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अक्टूबर से नई टेक्नोलॉजी के ऐसे इंजन विभिन्न रेल मंडलों को मिलना शुरू हो जाएंगे।

हाल ही में वाराणसी के लोको शेड में ऐसे रेल इंजनों का ट्रायल किया गया, जो डीजल से चलते हैं पर ब्रेक से लेकर स्लो रनिंग के दौरान बिजली पैदा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेक लगने के दौरान एक आउटर से दूसरे के बीच यह इंजन 500 से लेकर 1200 यूनिट तक बिजली पैदा करेंगे। इस तरह एक इंजन 150 से 200 किमी के बीच चलने पर 5 हजार यूनिट तक बिजली पैदा कर सकेगा। यह बिजली ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई)के माध्यम से स्टेशनों पर मौजूद यूपीएस में सेव कर ली जाएगी।
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ऐसे बनेगी बिजली
नई टेक्नोलॉजी के इन डीजल इंजनों में अल्टीनेटर लगाए गए हैं। इन्हें इंजन के ब्रेक सिस्टम से जोड़ा गया है। ब्रेकिंग प्रक्रिया जब शुरू होगी, तत्काल इंजन में लगा अल्टीनेटर तेजी से घूमने लगेगा जिससे बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस बीच इंजन और ओएचई के बीच तार का संपर्क होगा और बनी हुई बिजली यूपीएस में चली जाएगी।





