एम्स: 500 रुपये तक की जांचों को फ्री में करने का रखा प्रस्ताव

नई दिल्ली. देश भर से इलाज के लिए दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) आने वाले लाखों मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एम्स में 500 रुपये तक की सभी जांच को मुफ्त करने का प्रस्ताव रखा गया है जबकि आगे सभी प्रकार की जांच को मुफ्त करने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार जांच शुल्क खत्म करने के बाद भी एम्स के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। जांच शुल्क पर समीक्षा के लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट एम्स निदेशक को सौंप दी है। एम्स में प्रतिदिन औसतन 10 हजार मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। दोनों श्रेणी के निजी वार्ड में प्रति बिस्तर 500-500 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव है। ए श्रेणी में प्रति बिस्तर 3200 से 3700 और बी श्रेणी में प्रति बिस्तर 2200 से 2700 रुपए करने का प्रस्ताव है।
एम्स: 500 रुपये तक की जांचों को फ्री में करने का रखा प्रस्ताव
तरिम रिपोर्ट में फिलहाल 500 रुपये तक की जांच को मुफ्त करने का प्रस्ताव दिया गया है लेकिन भविष्य में सीटी स्कैन, एमआरआई, पेट स्कैन जैसी मंहगी जांच शुल्क को भी खत्म करने की तैयारी है। एम्स में होने वाले 90 फीसदी जांच की कीमत 10 रुपये से 500 रुपये के बीच है जबकि 10 फीसदी जांच ऐसे हैं जिस पर मरीज को दो हजार से आठ हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके पीछे रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि जो भी एम्स इलाज के लिए आता है वह परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सरकार को कर अदा किया होता है। लिहाजा, सभी प्रकार के मरीजों के लिए जांच के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी एम्स को प्रति वर्ष 15.95 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है जबकि जांच शुल्क खत्म होने के बाद 17.75 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होगा।
निजी वार्ड :एम्स में दो तरह के निजी वार्ड हैं, ए टाइप के निजी वार्ड के लिए फिलहाल 3200 रुपये देने पड़ते हैं जबकि बी टाइप के निजी वार्ड के लिए 2200 रुपये देने पड़ते हैं। दोनों श्रेणियों में पांच-पांच सौ रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव है। जबकि सामान्य श्रेणी में प्रति बिस्तर 35 रुपए लगते हैं जिसे खत्म करने का सुझाव है। वहीं भविष्य में ए श्रेणी के निजी वार्ड के लिए 5000 रुपए और बी श्रेणी के वार्ड के लिए 3000 रुपए करने का सुझाव है।

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कार्डियो-न्यूरो सेंटर, आरपी सेंटर और एम्स ट्रामा सेंटर बाहर

जांच की समीक्षा के लिए बनाई गई कमेटी को कार्डियो-न्यूरो सेंटर, नेत्र सेंटर और एम्स ट्रामा सेंटर की ओर से वर्तमान जांच शुल्क की सूची नहीं दी गई, जिसकी वजह से इन सेंटर का आंकड़ा इसमें शामिल नहीं है। अब एम्स निदेशक के कहने पर इन सेंटर से भी डाटा जुटाया जा रहा है जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी। वित्त मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय को राजस्व बढ़ाने के लिए कहा था जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एम्स को इस संबंध में पत्र लिखा गया था।
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