पानी गिरा नहीं और बिहार में आ गई ऐसी बाढ़, जान बचाने ऐसे निकले लोग

किशनगंज. भारत नेपाल सीमा पर स्थित बिहार के किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड में भारी बारिश से बाढ़ आ गई है। महानंदाा, कनकई, बूढ़ी कनकई और डॉक नदी उफान पर है। पिछले तीनों दिनों से लगातार वर्षा और नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण यह प्रखंड पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है। सड़क पर पानी नदी की धार की तरह बह रही है। रात में मचा बाढ़ का शोर…

– शुक्रवार की रात बिस्तर पर सो रहे लोग बाढ़- बाढ़ की शोर सुन उठे और पांव जमीन पर रखा तो वहां पानी था।
– बिजली पहले ही चली गई थी, जिससे पूरे इलाके में अंधेरा था। पानी भरने से पालतू जानवर भी शोर करने लगे थे। पानी में घर डूब जाने से हजारों लोग पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
ये भी पढ़े: गोरखपुर अस्पताल का यह वीडियो वायरल होते ही खुल गई योगी सरकार की पोल, मच गया हडकंप!
हर साल पलायन करते हैं यहां के लोग
– प्रखंड के मुख्य बाजार में रहने वाले राजू सिंह के घर मे भी पानी घुस गया हैं। शनिवार सुबह उनका परिवार भी पलायन को मजबूर हुआ। राजू और उनकी पत्नी ने एक हाथ से बच्चे, दूसरे से बकरी को पकड़ा और सिर पर कपड़े की पोटली रख नए ठिकाने की तलाश में चल दिए।
– राजू के पड़ोसी श्याम कुमार कहते हैं कि यह हमारी नियति बन गई है, हर साल हम एक महीना बाढ़ में बर्बाद होते हैं और फिर से बसने की जद्दोजहद में दो महीने लग जाते हैं। जिन्दगी तो सिर्फ बचे 9 महीनों में ही कटती हैं।
– श्याम की पत्नी सुनीता को डायबिटीज है, सिलिगुडी में इलाज चल रहा है, उनकी दवाइयों का डिब्बा भी पानी में कही गुम हो गया है। सुनीता कहती हैं कि लकड़ियां-चूल्हे और आटे की बोरी भी भींग चुके हैं, रोटियां कैसे बनेंगी?
– राजू के पड़ोसी श्याम कुमार कहते हैं कि यह हमारी नियति बन गई है, हर साल हम एक महीना बाढ़ में बर्बाद होते हैं और फिर से बसने की जद्दोजहद में दो महीने लग जाते हैं। जिन्दगी तो सिर्फ बचे 9 महीनों में ही कटती हैं।
– श्याम की पत्नी सुनीता को डायबिटीज है, सिलिगुडी में इलाज चल रहा है, उनकी दवाइयों का डिब्बा भी पानी में कही गुम हो गया है। सुनीता कहती हैं कि लकड़ियां-चूल्हे और आटे की बोरी भी भींग चुके हैं, रोटियां कैसे बनेंगी?
ऊंची जगहों पर बनाया ठिकाना
– हर जगह पानी भर जाने के कारण आसपास के लोगों ने पुल पर डेरा जमाया है। दिघलबैंक में दो मंजिला मकान चुनिंदा ही है जो ऐसी प्रलय में दोस्तो-रिश्तेदारों को राहत पहुंचाते हैं, बाकी लोग अन्य ऊंची जगहों, पुलों आदि पर ठिकाना बनाते हैं।
– हर जगह पानी भर जाने के कारण आसपास के लोगों ने पुल पर डेरा जमाया है। दिघलबैंक में दो मंजिला मकान चुनिंदा ही है जो ऐसी प्रलय में दोस्तो-रिश्तेदारों को राहत पहुंचाते हैं, बाकी लोग अन्य ऊंची जगहों, पुलों आदि पर ठिकाना बनाते हैं।





