इस धनकुबेर की ऐसी हालत, कभी ‘Sheriff of Mumbai’ कहे जाते थे कानपुर के विजयपत सिंघानिया

अपने बेहतरीन कपड़ों की वजह दुनियाभर में एक अलग पहचान रखने वाली रेमंड कंपनी के मालिक रहे अरबपति बिजनेसमैन विजयपत सिंघानिया को 2006 में Sheriff of Mumbai खिताब से नवाजा गया था। यूपी के कानपुर शहर में 4 अक्टूबर 1938 को जन्मे विजयपत की शख्सियत इतनी बड़ी थी कि देश के टॉप-10 बड़े उद्योगपतियों में उनका जैसा कोई नहीं था। 

इस धनकुबेर की ऐसी हालत, कभी ‘Sheriff of Mumbai’ कहे जाते थे कानपुर के विजयपत सिंघानिया

इंडिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार विजयपत सिंघानिया कभी 12 हजार करोड़ की कंपनी रेमंड के मालिक थे लेकिन आज वो अपने बेटे की वजह से दर-दर भटकने को मजबूर हैं।  ऐसा खुद विजयपत सिंघानिया कह रहे हैं और उन्होंने बाकायदा इसके लिए कोर्ट का सहारा लिया है। 

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रेमंड समूह‬ के मालिक विजयपत सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर अपने बेटे गौतम के नाम कर दिये। इन शेयर्स की कीमत 1000 करोड़ रुपये के लगभग बतायी जा रही है। लेकिन अब बेटे ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। यहां तक कि सिंघानिया की गाड़ी और ड्राइवर भी छीन लिये गये हैं।

उनके वकील की मानें तो विजयपत सिंघानिया ने अपने बेटे गौतम सिंघानिया को व्यवसाय सौंपने से पहले रेमंड लिमिटेड को देश में सबसे बड़े ब्रांडों में से एक बना दिया और आज रेमंड के बॉस गौतम, कंपनी के साथ ऐसा बरताव कर रहे हैं जैसे कि वह उनकी व्यक्तिगत जागीर हो।

विवाद की जड़
विजयपत सिंघानिया ने जिस घर के पजेशन के लिए याचिका दायर की है, वह जेके हाउस 1960 में बना था और तब 14 मंजिला था। बाद में इस बिल्डिंग के 4 ड्यूप्लेक्स रेमंड की सब्सिडरी पश्मीना होल्डिंग्स को दे दिये गये़ साल 2007 में कंपनी ने इस बिल्डिंग को फिर से बनवाने का निर्णय लिया।

एक डील के मुताबिक सिंघानिया और गौतम वीनादेवी (सिंघानिया के भाई अजयपत सिंघानिया की विधवा) और उनके बेटों अनंत और अक्षयपत सिंघानिया को 5,185 स्क्वायर फीट का एक-एक ड्यूपलेक्स मिलना था।

 इसके लिए उन्हें 9 हजार प्रति वर्ग फीट की कीमत चुकानी थी। अपार्टमेंट में अपने हिस्से के लिए वीनादेवी और अनंत ने पहले से ही एक संयुक्त याचिका दायर की हुई है, वहीं अक्षयपत ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक अलग याचिका दायर की है।दुनियाभर में सूटिंग और शर्टिंग के लिए मशहूर रेमंड की नींव 1925 में रखी गई थी। इसका पहला रिटेल शोरूम 1958 में मुंबई में खुला था. विजयपत ने कंपनी की कमान 1980 में संभाली थी। 

वहीं इस बारे में गौतम सिंघानिया ने कहा था कि बेटे और रेमंड के चैयरमैन के तौर पर उनकी भूमिकाएं अलग-अलग हैं।  एक बयान में उन्होंने ये भी कहा कि कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों के तहत प्रस्ताव भेजा गया था।
लेकिन शेयरधारकों ने प्रस्ताव नामंजूर कर दिया। उन्होंने कहा है कि मामला कोर्ट में है। इसलिए ज्यादा नहीं कह सकते लेकिन उन्होंने कहा कि बेटे के तौर पर उन्होंने बातचीत कर मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की।

 
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