अजब ट्रेन की गजब कहानी : 7 किमी सफर, 35 हजार खर्च, आमदनी हजार भी नहीं

  • पटना.पटना घाट-दीघा घाट पैसेंजर ट्रेन की अजब कहानी है। 3 डिब्बे की यह ट्रेन चंद यात्रियों को लेकर रोज गाय-भैंस, झाड़-झंखाड़ के बीच से गुजरते हुए पटना घाट से दीघा का दो बार चक्कर लगाती है। यह ट्रेन पटनावासियों के लिए सुविधा कम परेशानी का सबब ज्यादा है। आर ब्लॉक व दीघा के बीच सड़क पर हजारों लोग इसके चलते जाम में फंसते हैं। 
    अजब ट्रेन की गजब कहानी : 7 किमी सफर, 35 हजार खर्च, आमदनी हजार भी नहीं
     
    मंगलवार सुबह 7.15 बजे मैं पटना जंक्शन पहुंचा। दीघा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन प्लेटफार्म नंबर-1 पर 7.30 बजे आई। 25 मिनट बाद 7.55 बजे हरी झंडी दिखाई गई। ट्रेन चल पड़ी। तीन डिब्बे की ट्रेन में 21 यात्री बैठे हैं। किसके पास टिकट है, कौन बेटिकट, बताना मुश्किल। करीब पांच मिनट में हम आर ब्लॉक पहुंचे। यह पहला स्टॉपेज है। गुमटी के दोनों छोर पर लंबा जाम लगा है। पसीने से तर-बतर लोग। यहां दो यात्री चढ़े, चार-पांच उतरे। टिकट काउंटर उजड़ गया है। कोई रेलकर्मी नहीं है। थोड़ी देर बाद पुरानी सचिवालय हॉल्ट पहुंचे। चार महिलाएं सवार हुईं।

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    8.10 बजे हम बेली रोड स्थित हड़ताली मोड़ पर थे। राजधानी की सबसे व्यस्त सड़क पर। डिब्बे से पश्चिम की ओर दूर तक जाम ही जाम। हर चेहरे पर गुमटी उठने की बेताबी। हड़ताली मोड़ के बाद ट्रैक के दोनों तरफ झोपड़ियां और उसमें खटाल हैं। कम से कम एक हजार से अधिक गाय-भैंस रेलवे की जमीन में पल रहे हैं। पुनाईचक हॉल्ट के पहले अचानक एक झटके में ट्रेन रुक गई। पता चला कि ट्रैक पर भैंस बंधी है। खटाल वाला बोला-ए ड्राइवर साहेब, गाड़ी रोकऽ, भंइसिया बंधल हईऽ, खोले दऽ…। करीब दो मिनट तक ट्रेन रुकी रही। भैंस के हटने के बाद ट्रेन आगे बढ़ी। इसके बाद इंद्रपुरी क्रांसिंग के पास जल्दी-जल्दी में रेलवे ट्रैक पार करने के चक्कर में मारुती कार ट्रेन की चपेट में आने से बची। यहां से राजीवनगर और आखिर में 8.30 बजे हम दीघा पहुंच गए। यहां स्टेशन पर कोई बोर्ड नहीं है। पता चला हम स्टेशन से आधा किलोमीटर पहले हैं। आगे रेलवे ट्रैक ट्रेन के चलने लायक नहीं है। अतिक्रमण और गंदगी के बीच ट्रैक गुम हो गया है।
     
    फोरलेन सड़क बनाने का है प्रस्ताव
    इस रेललाइन की जमीन पर फोरलेन सड़क बनाने के प्रस्ताव पर पूर्व मध्य रेल व राज्य सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया के तहत मापी हो चुकी है। वैल्यूएशन तय है। अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ है। बावजूद यह प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतर रहा है। पूर्व मध्य रेल ने रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा दिया है।
     
    सड़क से फायदे
    – शहर की ट्रैफिक स्मूथ होगी।
    – बेली रोड, बोरिंग रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा।
    – सचिवालय आने-वाले को परेशानी नहीं होगी।
    – आर ब्लॉक, हड़ताली मोड़, बेली रोड पाटलिपुत्र कॉलोनी से दीघा के लिए सीधा रास्ता हो जाएगा।
    – दीघा स्थित जेपी सेतु तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाएगा।
     
    हाइकोर्ट ने भी लगाई है कड़ी फटकार
    पिछले शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस ट्रेन के चलाने के औचित्य पर सवाल उठाया था। पीकआवर में बेली रोड पर जाम लगने के सवाल पर रेलवे से जवाब तलब किया था। न्यायमूर्ति डॉ. रविरंजन व एस कुमार की खंडपीठ ने रेलवे से जानना चाहा कि इस ट्रेन काे क्यों चलाया जा रहा है, इस पर कितना खर्च हो रहा है और आमदनी कितनी है?
     
    150 साल पुरानी है यह रेललाइन
    – 7 किमी लंबी (पटना जंक्शन से दीघा घाट) इस रेललाइन का निर्माण अंग्रेजों ने दीघा के एफसीआई गोदाम तक अनाज पहुंचाने के लिए कराया था।
    – वर्ष 2004 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने पैसेंजर ट्रेन शुरू करवाई।
    – 2010 में मुख्यमंत्री ने फोरलेन सड़क बनाने के लिए रेललाइन की जमीन देने के लिए तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी को प्रस्ताव भेजा था।
     
    अभी की स्थिति
    – अधिकांश टिकट काउंटर ध्वस्त हो चुके हैं या ताले लगे हैं।
    – एक लोको पायलट, एक असिस्टेंट पायलट व एक गार्ड ड्यूटी करते हैं।
    – रेलवे हर साल 1 करोड़ से अधिक खर्च करती है। जबकि रोजाना चार से पांच सौ रुपए के टिकट भी नहीं बिकते।
     
     
     
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