चीन का बड़ा बयान, भूटान ने भी कहा कि डोकलाम चीन का इलाका

चौंकाने वाले, लेकिन निराधार दावे के तहत चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भूटान ने मान लिया है कि डोकलाम चीन का इलाका है। सीमा मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी वांग वेन्ली का दावा है कि भूटान ने राजनयिक के जरिये बताया है कि जिस जगह को लेकर चीन व भारत के बीच विवाद चल रहा है वह उसका अधिकृत इलाका नहीं है।चीन का बड़ा बयान, भूटान ने भी

भारतीय पत्रकारों के एक दल से बातचीत में वेन्ली इस बात का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। उनका कहना है कि भूटान सरकार खुद मान रही है कि भारत की सेना चीन की धरती पर जाकर आंखें तरेर रही है जबकि उस जगह से उसका कोई लेनादेना नहीं है।

वेन्ली चीन के सीमा संबंधी विभाग के अतिरिक्त समुद्री मामलों की उप महानिदेशक हैं। उनका कहना था कि इस बात की जानकारी उन्हें भूटान की मीडिया के अलावा कानूनी ब्लाग्स से भी मिली है। उनका दावा है पुख्ता सूचना के लिए ये भरोसेमंद सूत्र हैं। वांग का कहना है कि भूटान इस बात को समझ रहा है कि दोनों देशों की सेनाएं उसकी धरती का इस्तेमाल विवाद में कर रही हैं। उनका कहना है कि भूटान का चीन से राजनयिक संबंध नहीं है।

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए 24 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं जबकि भारत के साथ चीन 19 बार सीमा विवाद पर बैठक कर चुका है। चीन का भारत व भूटान समेत 14 देशों से सीमा विवाद चल रहा है। बीस हजार किमी का सीमा विवाद चीन सुलझा चुका है जबकि बाकी के दो हजार किमी का विवाद सुलझाने के लिए भारत व भूटान से बातचीत लगातार जारी हैं।

कश्मीर व कालापानी में चीन घुस गया तो भारत क्या करेगा

वांग वेन्ली ने भारत के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने के बाद वार्ता की बात कही गई है। चीन ने धमकी दी है कि अगर हम कश्मीर व कालापानी में घुस गए तब भारत क्या करेगा। उनका कहना है कि समाधान का केवल एक ही रास्ता है कि भारत अपनी सेना पीछे हटाए। जब तक डोकलाम में एक भी भारतीय सैनिक मौजूद है, बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

उनका कहना है कि इस तरह के हालात में चीन भारत से बात करता है तो लोग कहेंगे कि हमारी सरकार में दम नहीं है। उल्लेखनीय है कि कश्मीर के मसले पर भारत-पाक में तनातनी है तो उत्तराखंड में स्थित कालापानी पर उसका नेपाल से सीमा विवाद है। एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि चीन की सरकार व सेना संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

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नेपाल रहेगा तटस्थः महारा

नेपाल के उप प्रधानमंत्री कृष्ण बहादुर महारा ने कहा है कि चीन व भारत के बीच के विवाद में नेपाल तटस्थ रहेगा। उनका कहना था कि दोनों देशों को कूटनीति के जरिये इस विवाद का समाधान निकालना चाहिए। विवाद दोनों के हित में नहीं है। नेपाल के विदेश मंत्रालय को भी संभाल रहे महारा का कहना है कि नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा 23 से 27 अगस्त तक भारत के दौरे पर रहेंगे।

उससे पहले चीन के उप प्रधानमंत्री वांग यांग 14 अगस्त से उनके देश का दौरा करेंगे, लेकिन उनका कहना था कि दोनों यात्राओं का एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है। चीनी नेता की यात्रा विकास संबंधी परियोजनाओं को लेकर है जबकि भारत की यात्रा का एजेंडा अभी तैयार किया जा रहा है।

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