91 इन बड़े घोटालेबाजों के देश छोड़ने पर सरकार लगाने जा रही है रोक

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पंजाब नेशनल बैंक में हुए महाघोटाले के बाद केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाते हुए 91 बड़े घोटालेबाजों के देश छोड़ने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। यह वो लोग हैं जिन्होंने बैंकों से 50 करोड़ से अधिक का लोन ले रखा है, लेकिन वापस नहीं किया है।91 इन बड़े घोटालेबाजों के देश छोड़ने परसरकार लगाने जा रही है रोक

400 लोग विलफुल डिफॉल्टर्स
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 400 लोग विलफुल डिफॉल्टर्स की श्रेणी में हैं। इनमें से 91 लोग ऐसे हैं जिन पर ज्यादा बकाया है। केंद्र सरकार ने बैंकों को आदेश देकर के ऐसे डिफॉल्टर्स की पासपोर्ट डिटेल्स भी मांगी है। इसमें इन कंपनियों के डायरेक्टर्स और गारंटर भी शामिल हैं, जिन्होंने लोन लेने के लिए फॉर्म में साइन किए हैं।

टॉप डिफॉल्टर्स पर 26 हजार करोड़ रुपये
11 टॉप डिफॉल्टर्स पर 26 हजार करोड़ रुपये का बकाया है। देश में 9 हजार अकाउंट हैं, जिन पर बैंकों ने रिकवरी के लिए कोर्ट में केस दर्ज कर रखा है। बकायेदारों की लिस्ट में सबसे पहला नाम एक डायमंड कारोबारी का है।Forever ज्वेलरी और डायमंड लिमिटेड का मालिक जतिन मेहता है। मेहता पर बैंकों का करीब 5500 करोड़ रुपये बकाया है।

टॉप 4 में शामिल हैं ये लोग, कंपनियां
टॉप 4 में जतिन मेहता के बाद किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या का नंबर आता है, जिस पर 3 हजार करोड़ रुपये का बकाया है। तीसरे नंबर पर कोलकाता की कंपनी REI Agro का मालिक संदीप झुनझुनवाला का नाम है, जिस पर 2730 करोड़ रुपये बकाया है।

संदीप की कंपनी एक समय में लंदन और सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड थी। इसके साथ ही वो आईपीएल की एक टीम की को-स्पांसर भी थी।

चौथे नंबर पर महुआ मीडिया के मालिक पीके तिवारी का नाम है। तिवारी चार कंपनियों- महुआ मीडिया, पर्ल स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, सेंचुरी कम्यूनिकेशन और पिक्सिन मीडिया पर 2416 करोड़ का बकाया है। वहीं पांचवे नंबर पर जूम डेवलपर्स का स्थान है, जिसका 2371 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।

जिन कंपनियों पर एक हजार से लेकर के 2 हजार करोड़ के बीच बकाया है उनमें रीड एंड टेलर इंडिया लिमिटेड और एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड, डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग लिमिटेड, सूर्या विनायक लिमिटेड, इंडियन टेक्नोमेक कंपनी लिमिटेड, बेटा नापथोल और राजा टेक्सटाइल लिमिटेड शामिल है।

एक साल में 27 फीसदी बढ़ा बकाया
डाटा के अनुसार बैंकों के खराब लोन में पिछले एक साल में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पिछले तीन सालों में यह क्रमशः 38 फीसदी, 67 फीसदी और 35 फीसदी के रेट से बढ़ा है।

ये लोग होते हैं विलफुल डिफॉल्टर
विलफुल डिफॉल्टर वो लोग होते हैं जिनके पास लोन की रकम चुकाने की क्षमता तो होती है, लेकिन वो पैसा वापस नहीं करते हैं। यह लोग लोन की रकम को भी किसी और काम के लिए डायवर्ट भी कर देते हैं। जो लोग अपनी संपत्ति को बैंक के पास लोन लेने के लिए गिरवी रखते हैं, लेकिन उसे बैंक की जानकारी के बिना बेच देते हैं, उनको भी इसी श्रेणी में रखा जाता है।

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