70000 फरिश्ते अगर नहीं बचा पाए तो डॉक्टर क्या करेगा? निज़ामुद्दीन के तबलीगी मौलाना का लॉजिक

मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70 हज़ार फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70 हज़ार फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार मुसलमानों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।
मौलाना निजामुद्दीन मरकज ने मेडिकल साइंस को ही फालतू बता दिया
कोरोना वायरस को लेकर मुसलमानों में किस तरह से गलतफहमी फैलाई जा रही है और ये काम उनके मौलाना-मौलवी ही कर रहे हैं, ये आपको निजामुद्दीन मरकज मौलाना के एक वीडियो से पता चल जाएगा। इस वीडियो में उसके ‘उपदेश’ सुने जा सकते हैं जो मुस्लिमों के लिए हैं। इसमें वो कहता है कि दुनिया में कौन सी ऐसी जगह है, जहाँ आपदा नहीं आई है? क्या वहाँ से भाग जाओगे? इसके बाद वो कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए पूछता है कि मौत से भाग कर कहाँ जाओगे, वो तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, पीछे नहीं। मौत इंसान के आगे रखा है अल्लाह ने, सामने, पीछे नहीं। इसीलिए, मौलाना ‘न भागने’ की सलाह देता है।
इस वीडियो में मौलाना कहता है कि इस हालात में भागना अल्लाह के गुस्से को और बढ़ा देगा। इसके बाद उसने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक कातिल होता है, जो खून करने के बाद अदालत में पेश किया जाता है तो जज को ही मार डालने की धमकी देता है। इसके बाद मौलाना ने पूछा कि क्या उस मुजरिम को छोड़ दिया जाएगा? फिर वो बताता है कि अदालत में अपील की जाती है, माफ़ी माँगी जाती है, जज का क़त्ल नहीं किया जाता। फिर वो समझाता है कि अल्लाह की तरफ़ से जब ऐसी कोई स्थिति आए तो ये मौका अल्लाह-ताला से माफ़ी माँगने का है।
साथ ही मौलवी लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने की भी सलाह देता है। वो कहता है कि उनके कहने पर मिलना-जुलना नहीं छोड़ना चाहिए और नमाज भी जारी रखना चाहिए। मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70 हज़ार फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70 हज़ार फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार मुसलमानों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।
मौलवी ने कहा कि आज मस्जिदों को बंद करने को कहा जा रहा है, जो ग़लत है। उसने डॉक्टरों की सलाहों की बात करते हुए मुसलमानों से पूछा कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीं आ गया कि मिलेंगे-जुलेंगे तो बीमारी फैलेगी, उन्हें इस बात पर यकीन क्यों नहीं आया कि इस समय अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा? मौलाना ने कोरोना पर डॉक्टरों की सलाहों को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश करार दिया। उसने कहा कि ये सब एक तय कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है ताकि मुसलमान एक थाली में न खाएँ और साथ न बैठें।
मौलाना निजामुद्दीन मरकज का कोरोना पर अजोबोग़रीब भाषण
मौलाना ने मुसलमानों को दिलासा दिया कि ये बीमारी तो गुजर जाएगी लेकिन उनका इस्लाम में यकीन बने रहना चाहिए। उसने कोरोना को मुसलमानों से मुसलमानों को अलग करने की साज़िश करारा दिया। उसने सलाह दी कि मुसलामनों को एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए और नमाज पढ़ना कभी बंद नहीं करना चाहिए। वीडियो में 3 मिनट के बाद आप सुन सकते हैं, कैसे मौलाना फरिश्तों की बातें कर के डॉक्टरों को नकार रहा है। मौलाना का कहना है कि दुनिया की कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं है। उसका दावा है कि नई बीमारियाँ इसीलिए पैदा हो रही है, क्योंकि गुनाह भी नए-नए हो रहे हैं। बकौल मौलाना, ऐसी बीमारी दवा नहीं बल्कि दुआ से ठीक होती है।
Opindia से साभार

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