आजादी के 70 साल बाद भानुप्रतापपुर पहुंची रेल

अति पिछड़े बस्तर संभाग में भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र को विकसित इलाका होने का गौरव हासिल है। हालांकि, सरकारी दावों के बावजूद बढ़ती बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बीच ग्रामीण इलाकों की गरीबी, सड़कों और अस्पतालों की बदहाली, खेती-किसानी का संकट, सिंचाई सुविधाओं की कमी आदि ऐसे ढेरों मुद्दे हैं, जिन पर काम करने की बहुत जस्र्रत है।

इलाके में लौह अयस्क की भरमार है, जिस पर उद्योगपतियों की नजर है, लेकिन इसका फायदा गरीब-आदिवासियों को नहीं मिल रहा है। जो पढ़-लिख लिए हैं, उनमें बहुत से बड़े सरकारी अफसर भी हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों की दुर्दशा ग्रामीण आदिवासियों को शैक्षणिक रूप से आगे बढ़ाने में नाकाफी है। आजादी के 70 साल बाद भानुप्रतापपुर तक रेल पहुंची है, जिससे व्यावसायिक उन्न्ति की संभावना बढ़ी है, लेकिन इसका कितना फायदा स्थानीय आदिवासियों को कितना मिलेगा, इसे लेकर बहस जारी है।

खदानों और विकास के नाम पर विस्थापन की समस्या है। असंतुलित विकास का खामियाजा क्षेत्र के नागरिक भुगत रहे हैं। एक ओर ब्लॉक मुख्यालयों में स्थित चारामा और भानुप्रतापपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पुरस्कार मिलते रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में लोग झोलाछाप डॉक्टरों और बैगा गुनिया के हवाले हैं।

जिला मुख्यालय कांकेर से भानुप्रतापपुर और चारामा की सड़कें बेहतर बेहतर स्थिति में हैं, जबकि अंदस्र्नी इलाकों में सड़कों में भ्रष्टाचार विकास की असली कहानी कह रहे हैं। देशभर में चल रहे दलित आदिवासी आंदोलन का यहां बहुत फर्क पड़ेगा, क्योंकि भानुप्रतापपुर सीट एसटी के लिए आरक्षित है।

यहां एक बड़ा वर्ग किसानों का है, जो कि बुनियादी सुविधाएं अच्छी होने के बावजूद नाराज है। इसका कारण यह है कि किसानों को सूखा राहत, फसल बीमा और धान पर बोनस की राशि नहीं मिल पाई है। यह इस बार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। यहां की जनता की एक और मांग है कि भानुप्रतापपुर को सरकार नया जिला घोषित कर दे।

 

भूगोल

इस विधानसभा क्षेत्र का भानुप्रतापपुर और चारामा, जिले का प्रवेश द्वार है। राजधानी से आते समय चारामा से बस्तर संभाग लगता है, तो वहीं दुर्ग, बालोद व राजनांदगांव से भानुप्रतापपुर लगा हुआ है। यहां का कुछ इलाका महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की सीमा के भी करीब है।

प्रशासन

भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में 117 ग्राम पंचायत हंै। दो नगर पंचायत भानुप्रतापपुर व चारामा के साथ-साथ तीन तहसीलों का यह विधानसभा क्षेत्र है।

शिक्षा

चारामा और भानुप्रतापपुर तहसील शिक्षित व व्यवसायिक दृष्टिकोण से काफी उन्न्त हुआ है। यहां के कई आदिवासी परिवार के बच्चे छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश समेत कई और राज्यों में बड़े पदों पर हैं। भानुप्रतापपुर और चारामा में महाविद्यालय खुल जाने से युवाओं को सुविधा हुई है।

स्वास्थ्य

भानुप्रतापपुर और चारामा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए जाना जाता है। विगत कई वर्षाें से इन दोनों ही अस्पतालों को प्रदेश स्तरीय पुरस्कारों से नवाजा गया है। दुर्गूकोंदल में भी बेहतर अस्पताल है, जिससे इलाका सुविधायुक्त माना जाता है।

सड़कें

नेशनल हाईवे होने के कारण भानुप्रतापपुर और चारामा की सड़कें अच्छी हैं। चारामा से कोरर जाने वाली सड़क की हालत खराब हो चुकी है। ऐसे ही भारी वाहनों के ओवरलोड के कारण दुर्गकोंदल मार्ग भी काफी जर्जर हो चुका है। इसे लेकर जनता में नाराजगी है।

आर्थिक

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इस विधानसभा क्षेत्र में लौह अयस्क की चार-पांच बड़ी खदानें हैं, इस कारण यह व्यावसायिक क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। यह एग्रीकल्चर बेल्ट है,यहां धान की खेती ज्यादा होती है। हाल के वर्षाें में आदिवासियों का रूझान फलों और सब्जियों की खेती की ओर भी हुआ है।

वादे, जिनके पूरे होने का इंतजार

कोटरी नदी पर पुल

विधानसभा क्षेत्र की जनता आजादी के बाद से कोटरी नदी पर पुल निर्माण की मांग कर ही है। इसके लिए ग्रामीणों ने जलसत्याग्रह तक किया था। कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के लोग भी अलग-अलग आंदोलन-प्रदर्शन कर चुके हैं। 18 नवंबर 2017 को बोनस तिहार में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह यहां पहुंचे थे, तब उन्होंने कोटरी नदी पर पुल बनवाने की घोषणा की थी। अभी तीन-चार दिन पहले पुल निर्माण के लिए टेंडर बुलाया गया है। निश्चित तौर पर चुनाव में भाजपा इसका श्रेय लेने की कोशिश करेगी, लेकिन इसे लेकर आंदोलन करने वाली कांग्रेस भी इसका श्रेय लने में पीछे नहीं रहने वाली।

2018 में बन सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा

0 एस्ट्रोसिटी एक्ट पर आदिवासी नाराज हैं, जिसका असर भाजपा की संभावनाओं पर पड़ सकता है

0 धान बोनस, सूखा राहत, फसल बीमा नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी है

0 मनरेगा का काम करने वाले शत-प्रतिशत मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ है

0 लौह अयस्क की खदानें और व्यावसायिक विकास के बावजूद बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है

0 ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति खराब हो चुकी है

अबकी त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना

आदिवासी बहुल होने के कारण भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र अजजा आरक्षित है। पिछले पांच विधानसभा चुनावों के नतीजे देखें, तो कांग्रेस पर भाजपा भारी रही है। भाजपा ने तीन और कांग्रेस ने दो बार जीत दर्ज की है। राज्य बनने के बाद के तीन चुनावों में से जनता ने लगातार दो बार भाजपा के विधायक को चुना। 2013 के चुनाव में भाजपा हैट्रिक बनाने से चूक गई। कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

वर्तमान विधायक मनोज मंडावी लगातार चार बार से चुनाव लड़ रहे हैं। 2003 में कांग्रेस ने इन्हें टिकट नहीं दिया था तो निर्दलीय मैदान में उतर गए थे, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ था। मंडावी दूसरे नम्बर पर थे। इसके बाद 2013 के चुनाव में मंडावी को कांग्रेस ने फिर से टिकट दिया और भाजपा के कब्जे वाली सीट में सेंध लगाने में सफलता मिल सकी। इस बार यहां अजीत जोगी भी जोर लगा रहे हैं।

चार सभाएं कर चुके हैं और प्रत्याशी की भी घोषणा कर दी है। उन्होंने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से मानक दरपट्टी को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, विधायक मंडावी भी पहले जोगी के कट्टर समर्थक थे। जोगी जब मुख्यमंत्री थे, तब मंडावी गृह राज्य मंत्री थे। कांग्रेस को अंदेशा था कि मंडावी जोगी के साथ जा सकते हैं, इसलिए उन्हें आदिवासी कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। भानुप्रतापपुर में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है।

पिछले तीन चुनाव के परिणाम

विगत तीन चुनावों में मनोज मंडावी हर बार मैदान में रहे। गांव-गांव घूमकर अपनी पहचान भी बनाई है। ऐसे में भा रतीय जनता पार्टी को भी स्थापित चेहरे के साथ चुनाव लड़ना होगा। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी मानक दरपट्टी के समर्थन में अजीत जोगी अब तक चार सभाएं कर चुके हैं।

विधायक जी बोले

मेरे क्षेत्र में दो सालों से अकाल पड़ा है। सूखा राहत, फसल बीमा व धान का बोनस जैसे कई बड़े मुद्दे हैं, जिसका जवाब इस चुनाव में जनता प्रदेश सरकार को देगी। भानुप्रतापपुर सीट के साथ-साथ हम प्रदेश में भी सरकार बनाएंगे। इस सरकार ने गरीबों और किसानों का शोषण किया है, जो विकास हो रहे वह कांग्रेस के समय से ही शुरू हुआ था। जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है।

मनोज मंडावी विधायक (कांग्रेस)

हम हार गए, वरना हम होते तो…

भाजपा सरकार गांव-गांव और घर-घर विकास योजनाओं को पहुंचा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल की सौगात दी है, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने उज्जवला योजना, विद्युत कनेक्शन, शौचालय निर्माण जैसी कई योजनाओं पर काम कराए हैं। इससे गरीबों का जीवन स्तर ऊंचा उठा है। इस बार यहां पर कमल फूल ही खिलेगा। 

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