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पढ़ाई करने जा रहे 62 बच्चों को जार्जिया एयरपोर्ट से लौटाया

इंदौर। मेडिकल की पढ़ाई के लिए भारत से गए लगभग 62 विद्यार्थियों को जार्जिया एयरपोर्ट से वापस लौटा दिया गया। इनमें इंदौर, सेंधवा, भोपाल सहित प्रदेश के 9 विद्यार्थी हैं।पढ़ाई करने जा रहे 62 बच्चों को जार्जिया एयरपोर्ट से लौटाया

विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें एयरपोर्ट पर जमीन पर बैठा दिया गया। पानी पीने और बाथरूम जाने तक की इजाजत नहीं दी गई। घंटों बैठाने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया। पासपोर्ट भी एयर अरेबिया के विमान स्टाफ को यह कहकर दिया गया कि दिल्ली उतरने के बाद ही उन्हें दिया जाए। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर भी पासपोर्ट वापस लेने के लिए सुबह से शाम तक जद्दोजहद करना पड़ी।

बच्चों के साथ हुए ऐसे सलूक से खफा इंदौर के पत्रकार कॉलोनी निवासी किशोर पाटिल, धीरज पाटिल व पुणे के प्रशांत कमलाकर सहित कई पालकों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। इस पर मंत्री ने ट्वीट पर आश्वासन दिया कि भारतीय दूतावास इस मामले को देख रहा है। हालांकि मंगलवार शाम तक दूतावास की ओर से कोई सूचना नहीं पहुंची तो शाम को अभिभावक जानकारी लेने विदेश मंत्रालय गए।

सिर्फ 10 को मिली अनुमति

विद्यार्थियों और अभिभावकों के मुताबिक न्यू विजन यूनिवर्सिटी में प्रवेश मिलने के बाद सभी विद्यार्थी दिल्ली और मुंबई से 8 अप्रैल को जार्जिया रवाना हुए। इंदौर, सेंधवा, भोपाल व देहरादून के लगभग 11 विद्यार्थियों की उड़ान दिल्ली से शाम 6.30 बजे की थी। शारजाह होते हुए वे 9 अप्रैल को जार्जिया के टेबलिसी एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन उन्हें इमिग्रेशन पॉइंट पर ही रोक दिया गया। सिर्फ 10 बच्चों को जाने की अनुमति देकर बाकी सभी को वापस दिल्ली भेज दिया गया।

रंग और कद देखकर कुछ को चुना

इंदौर और सेंधवा से गई दो बहनों ने आरोप लगाया कि जार्जिया एयरपोर्ट के स्टाफ ने बहुत बदसलूकी की। सारे दस्तावेज दिखाने के बाद भी वे नहीं माने। गहरे रंग और छोटे कद वाले 10 बच्चों को चुनकर जाने दिया और बाकी को जमीन पर बैठाकर रखा। कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था। फॉरेन करंसी ज्यादा नहीं होने से उन्हें दिल्ली आने तक भूखा ही रहना पड़ा। बतौर भारतीय हम लोगों ने बहुत अपमानित महसूस किया।

छह महीने में वीसा

जार्जिया के डी-3 वीसा के लिए भी विद्यार्थियों को लगभग छह महीने इंतजार करना पड़ा। वहां कक्षाएं लगभग पांच महीने पहले ही शुरू हो चुकी हैं। अभिभावकों ने फीस भी भर दी है, जो सालाना लगभग 25-30 लाख रुपए है।

छह-सात माह से चल रहा है मामला

दिवाकर और अक्षय के मुताबिक (टि्वटर पर चल रही चर्चा) छह-सात माह से जार्जिया में विद्यार्थियों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है। स्टूडेंट रेसीडेंट कार्ड भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्हें इसकी जानकारी मिली है। भारतीय दूतावास ने जार्जिया सरकार से बात की है। वह इस मामले को दिखा रही है। आगे की कार्रवाई की जानकारी मंगवाई है।

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