अब अमरीका में बंद हुए 500-1000 के नोट

वाशिंगटन। अमरीका में बस रहे भारतीय एक नई समस्या का सामना कर रहे हैं।  उनके पास 500 और 1000 के नोट के रूप में जो भारतीय करेंसी रखी हुई है, उसे न तो वो कहीं जमा कर पा रहे हैं और न ही एक्सचेंज।500-1000 के नोट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट सर्कुलेशन से बाहर कर दिए जाने के कारण उनके पास जमा 500 और 1000 के सारे नोट बेकार हो जाने का डर उन्हें सता रहा है। बैंकों ने उनके पैसे एक्सचेंज करने से मना कर दिया है।

सबसे बड़े बैंकों ने खड़े किए हाथ

अमरीका के सबसे बड़े बैंक जेपी मोर्गन चेज और सिटी ग्रुप भी इनके नोट एक्सचेंज करने को तैयार नहीं हैं। इन बैंकों के साथ काम करने वाले वेंडर उन्हें नए नोट उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, और न ही 100 के नोटों से इन पुराने नोटों को एक्सचेंज करने को तैयार हैं। वेल्स फारगो एंड कपंनी के प्रवक्ता ने कहा है कि वह इस समय उन्हें नोटों की आपूर्ति नहीं करा सकता। जबकि बैंक आॅफ अमरीका का कहना है कि उसने कभी कोई करेंसी नोट एक्सचेंज करने के लिए स्वीकार नहीं की।

यूरो होता है खुलेआम एक्सचेंज

आज भी अमरीका में यूरो को बैंक खुलेआम एक्सचेंज करते हैं। अगर आपके पास यूरो है तो आप किसी भी बैंक के पास जाकर उसे एक्सचेंज कर सकते हैं। अमरीका से न्यूजर्सी में रहने वाले अखिलेश ने हमें बताया कि लगता नहीं है कि भारतीय मुद्रा को एकसचेंज करने वाला कोई बैंक अमरीका में है।

ट्रेवल एजेंट भी खड़े कर रहे हाथ

भारत के लिए ट्रेवल एजेंट से संपर्क किए जाने पर उनके पास भी कोई जवाब नहीं होता। अधिकांश ट्रेवल एजेंट कैश में ही काम करते आए हैं और वे भी इस मामले में कोई सहायता नहीं कर पा रहे हैं। उनके पास नए नोट आ नहीं रहे और वे पुराने नोट ले नहीं पा रहे। वहीं, दुनिया की 200 मुद्राओं में पूरे अमरीका भर में एक्सचेंज स्टोर चलाने वाले ट्रेवलएक्स लिमिटेड के लूसी स्मिथ का कहना है कि वह अब 500 और 1000 के नोट नहीं ले सकता क्योंकि भारत की नई नियम—प्रणाली के अंतर्गत अब इन नए नोटों को बड़ी मात्रा में वापस भारत नहीं भेजा जा सकता। 

मनी ट्रांसफर की दुनिया में सबसे बड़ी चेन चलाने वाली कंपनी वेस्टर्न यूनियन के अनुसार, जिन जगहों पर कैश की कमी देखी जा रही है वहां ग्राहकों को चैक अथवा एकांउट में ट्रांसफर के माध्यम से पेमेंट या रेमिटेंस दिया जा रहा है।

मास्टरकार्ड ने किया स्वागत

यद्यपि दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रोनिक पेमेंट नेटवर्क मास्टरकार्ड ने भारत के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे भारत में अपराध कम होंगे तथा अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। दक्षिण एशिया के लिए मास्टरकार्ड के प्रेसीडेंट पौरुष सिंह ने कहा कि इससे भारत को कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही दुनिया में एक नेतृत्वकारी भूमिका हासिल करने में मदद मिलेगी। सिंह ने कहा कि मास्टरकार्ड भारत के इस कदम के साथ है और हम भ्रष्टाचार से लड़ने तथा तेज ग्रोथ हासिल करने में सरकार की हर संभव सहायता करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

लोग दोस्तों को खर्च करने के लिए दे रहे पैसा

इस बीच में एक नया ट्रेंड यह भी देखा जा रहा है कि लोग भारत जा रहे अपने मित्रों को 500 और 1000 के नोट खर्च करने के लिए दे रहे हैं जिससे इन नोटों को बर्बाद होने से बचाया जा सके। क्योंकि कुछ समय बाद ये नोट पूरी तरह से रद्दी हो जाएंगे।

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