50 साल से घट रही है बरसाती बादलों की मोटाई, एक दिन कम हुआ मानसून सीजन

  • नई दिल्ली. इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) ने इस बार भी सामान्य बारिश की घोषणा की है। देशभर में करीब 98% बारिश का अनुमान है। सूखे से जूझ रहे देश के लिए ये अच्छी खबर है, लेकिन एक स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 50 साल से बरसाती बादल लगातार पतले हो रहे हैं। साथ ही बल्क में बारिश कराने वाले कम हाइट के बादलों में भी कमी आ रही है। इससे बारिश कम हो रही है और टेम्परेचर बढ़ रहा है। भारत में पहली बार बादलों पर स्टडी…
    50 साल से घट रही है बरसाती बादलों की मोटाई, एक दिन कम हुआ मानसून सीजन
     
    – आईएमडी के रिटायर्ड साइंटिस्ट एके जायसवाल की अगुआई में यह स्टडी की गई है। आईएमडी के जर्नल मौसम में पब्लिश इस रिपोर्ट के मुताबिक, कम ऊंचाई वाले बादल बल्क में बारिश कराते हैं। 1960 से 2010 के बीच इसमें हर दशक 0.45% की कमी आ रही है। यह कमी हर सीजन में हो रही है।

    ये भी पढ़े: हमारी साख पर सवाल उठाने वालों पर कार्रवाई का हक दे सरकार: EC

    – मानसून सीजन में यह कमी 1.22% की है, जो चिंताजनक है। भारत में 70% बारिश जून से सितंबर तक मानसून सीजन में ही होती है।

    – 60% पृथ्वी की सतह बादलों से ढकी हुई है। ये मौसम और जलवायु में अहम भूमिका अदा करते हैं। बादल सूर्य की रोशनी को कंट्रोल करते है, रेडिएशन को पृथ्वी पर आने से रोकते हैं। बारिश और बर्फबारी करते हैं। वॉटर वेपर्स बादलों में बदल जाती हैं। इससे बारिश होती है।
    – बादल ग्लोबल एनर्जी को भी कंट्रोल करते है। बादलों का यह लगातार बदलने वाला साइज मौसम की सटीक भविष्यवाणी में मुश्किल पैदा कर रहा है।
     
    नॉर्थईस्ट भारत और गंगा के कछार में बढ़े मोेटे बादल
    – मौसम विभाग के 215 स्टेशन पर आब्जर्वर्स ने बादलों का आकलन किया। ये ऑब्जर्वर्स बादलों की मोटाई और पतलेपन की बारीकियों को समझ सकते हैं।
    – 61% स्टेशनों में कम ऊंचाई वाले बादलों में कमी देखी गई। मानसून सीजन के दौरान सबसे मोटे बादल 1961 में देखे गए। उस समय देशभर में इनकी क्वांटिटी 46.7% थी, जो 2009 में घटकर 33.5% ही रह गई।
    – स्टडी में यह भी देखा गया कि कम ऊंचाई वाले बादल गंगा के कछार मैदानों और नॉर्थईस्ट में बढ़े हैं, जबकि बाकी हिस्सों में इनमें कमी आई है।
     
    महाराष्ट्र, बंगाल और ओडिशा पहुंचा मानसून, अब तक सामान्य से 18% ज्यादा बारिश
    – मानसून सोमवार को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और ओडिशा पहुंच गया। इन राज्यों के विभिन्न इलाकों में बारिश हुई। दो से तीन में मानसून पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य महाराष्ट्र को पूरी तरह कवर कर लेगा।
    – पहले 10 जून तक मानसून के मुंबई पहुंचने का अनुमान था। लेकिन यह दो दिन देरी से पहुंचा। बिहार और झारखंड में 13 जून तक मानसून पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, जून के अंत तक मानसून तकरीबन पूरे देश को कवर कर लेगा।
    – मौसम विभाग के मुताबिक, 30 मई से 11 जून तक पूरे देश में 48.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह औसत से 18% ज्यादा है।
    – आईएमडी का कहना है कि मानसून एक्टिव फेज में है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का एरिया भी बना है। इससे साउथवेस्ट मानसून को मजूबती मिलेगी। यह अच्छा संकेत है। मानसून के लिहाज पश्चिम भारत और पूर्वी भारत के लिए यह हफ्ता बेहद बेहद अच्छा साबित होगा।
    – वेस्ट मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। आने वाले तीन दिनों में मानसून मध्य प्रदेश को कवर कर लेगा।
     
    हर दशक… मानसून सीजन में 0.23 दिन की कमी आ रही
    – रिपोर्ट में कहा गया है कि हर दशक में मानसून में 0.23 दिन की कमी आ रही है। मतलब यह कि 50 साल में मानसून का एक दिन कम हो गया।
    – एक मानसूनी दिन में 2.55 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है। यह कमी देश के हर हिस्से में दर्ज की गई है। स्टडी के मुताबिक कम ऊंचाई वाले बादल और बरसात के दिन के बीच सीधा संबंध है। बादलों के पतला होने से टेम्परेचर भी बढ़ रहा है।
     
    गुजरात में धीमा पड़ा मानसून, मुंबई में 16 फ्लाइट डायवर्ट
    – गुजरात में मानसून सोमवार को प्रवेश तो कर गया लेकिन काफी कमजोर पड़ गया। वेदर साइंटिस्ट जयंत सरकार ने बताया कि पांच दिनों तक यहां तेज बारिश की संभावना नहीं है। यह फिलहाल राज्य में और आगे नहीं बढ़ पाएगा।
    – इधर मुंबई में भी सोमवार को मानसून ने दस्तक दे दी है। तेज बारिश के बाद यहां 16 उड़ाने डायवर्ट दी गईं।
     
    गुजरात में मानसून धीमा पड़ गया है। मध्य प्रदेश में क्या असर होगा?
    – मध्य प्रदेश में मानसून एक-दो दिन लेट हो सकता है।
    – भोपाल के मौसम केंद्र के डायरेक्टर डॉ. अनुपम काश्यपि के मुताबिक, मानसून दो तरफ से पहुंचेगा। साउथवेस्ट मानसून 14-15 जून तक बड़वानी, अलीराजपुर होते हुए अगले दिन इंदौर पहुंचेगा। दूसरी तरफ जबलपुर, अनूपपुर की ओर से मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा।
     
     
     
Back to top button