फर्रुखाबाद. यहां के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 30 दिनों में 49 नवजात बच्चों की मौत के मामले में चीफ मेडिकल ऑफिसर, लोहिया डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के सुप्रिटेंडेंट और दूसरे डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इन 49 बच्चों की मौत 21 जुलाई से 20 अगस्त को हुई थी। मीडिया में खबर आने के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर…
– कलेक्टर रवींद्र कुमार ने मामले की जांच के लिए 30 अगस्त को टीम बनाई थी और तीन दिन में रिपोर्ट देने काे कहा था।
– इस टीम में एसडीएम, सिट्री मजिस्ट्रेट और तहसीलदार शामिल थे।
– जांच में पाया गया कि ज्यादातर बच्चाें की मौत ऑक्सीजन और दवा की कमी की वजह से हुई है।
– जांच में यह भी पाया गया कि जिले के मेडिकल ऑफिसर्स ने और कलेक्टर समेत तमाम अफसरों को गुमराह किया।
– सिटी मजिस्ट्रेट और इस मामले में जांच टीम के सदस्य जैनेन्द्र जैन ने कोतवाली में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराई है।
गोरखपुर में हुई थी 30 बच्चों की मौत
– बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं।
– कहा जा रहा है कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।
UP सरकार ने क्या कदम उठाया?
– बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को 12 अगस्त को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए सस्पेंशन से पहले ही इस्तीफा सौंप दिया था।
– इसके बाद 13 अगस्त को योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में यहां के स्टाफ की क्लास लगाई। विजिट के बाद सीएम योगी ने कहा कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हर मुमकिन कदम उठाया जाएगा।
– इस मामले में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा, डॉ. पूर्णिमा मिश्रा और डॉ. कफील खान को गिरफ्तार कर लिया है।