47 साल पहले आया था Doordarshan का पहला धारावाहिक

Doordarshan के शो ‘रामायण’ (Ramayana) ने 80 के दौर में खूब पॉपुलैरिटी देखी। लेकिन रामायण से पहले इस तरह की पॉपुलैरिटी एक और शो ने देखी थी जो दूरदर्शन का पहला धारावाहिक था। यह शो 17 महीने तक चला था और इसके टोटल 156 एपिसोड थे। इस धारावाहिक को देखने के लिए लोग पूरे परिवार के साथ बैठते थे और गली-मोहल्लों में सन्नाटा पसर जाता था।

भारत में रखी टीवी सीरियल की नींव

इस धारावाहिक ने भारत में टीवी सीरियल की नींव रखी और घर-घर में पूरी फैमिली को टीवी स्क्रीन का चस्का लगा दिया। 1984 को दूरदर्शन (Doordarshan) पर पहला एपिसोड प्रसारित होने के साथ ही भारतीय टेलीविजन में एक नया युग शुरू हो गया। इतना ही नहीं इसे देखने के लिए हर घर में पूरा परिवार एक साथ बैठा करता था और गली मोहल्लों में सन्नाटा जा जाता था।

जिस सीरियल की हम बात कर रहे हैं उसका नाम है- हम लोग (Hum Log) जिसकी शुरुआत 7 जुलाई 1984 को हुई थी। ‘हम लोग’ हिंदी टेलीविजन का पहला डेली सोप माना जाता है जिसे मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था और इसका डायरेक्शन पी. कुमार वासुदेव ने किया।

17 महीने तक चला था शो

दूरदर्शन (Doordarshan) का पहला धारावाहिक हम लोग लगभग 17 महीने तक चला था जिसमें 156 एपिसोड थे। इसका आखिरी एपिसोड 17 दिसंबर 1985 को प्रसारित हुआ था।

क्या थी हम लोग की कहानी?

1984 में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘हम लोग’ (Hum Log) को भारतीय टेलीविजन का पहला सोप ओपेरा माना जाता है। इसकी कहानी 1980 के दशक के दिल्ली के एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार के रोजमर्रा के संघर्षों, आकांक्षाओं और सफलताओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें लिंग-भेद और शराब की लत जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाया गया है।

मैक्सिकन टीवी सीरीज की तर्ज पर था बेस्ड

इसे ‘एजुटेनमेंट’ (शिक्षा और मनोरंजन) के तरीके का इस्तेमाल करते हुए, मैक्सिकन टीवी सीरीज ‘वेन कॉनमिगो’ (1975) की तर्ज पर बनाया गया था। इस टीवी सीरीज का विचार 1982 में मैक्सिको की यात्रा के बाद तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री वसंत साठे को आया था।

इस शो में विनोद नागपाल, जयश्री अरोरा, राजेश पूरी, अभिनव चतुर्वेदी, सीमा भार्गव, दिव्या सेठ, सुष्मा सेठ, लवलीना मिश्रा जैसे कलाकारों ने काम किया था।

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