भोपाल.सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट (कोटपा) एक्ट 2003 भले ही देशभर में लागू है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसका पालन कराने की न तो किसी को फुर्सत है, न ही जिम्मेदार एजेंसियों को इसकी परवाह है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभर में कोटपा के तहत अप्रैल-16 से मार्च-17 के बीच सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वाले 4 लाख से अधिक लोगों पर जुर्माना किया गया। ऐसे लोगों से देशभर में 5 करोड़ 72 लाख रुपए जुर्माना भी वसूला गया, लेकिन इनमें मप्र का एक भी केस शामिल नहीं है। 2014 के बाद से प्रदेश में एक भी व्यक्ति पर जुर्माना नहीं किया गया है।
पिछले दिनों संसद में प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं सांसद अनूप मिश्रा ने यह मुद्दा उठाया था। इसका जवाब देते हुए केंद्रीय गृहराज्य मंत्री हंसराज अहीर ने बताया कि केंद्र के निर्देश के बावजूद मप्र में कोटपा के तहत होने वाले अपराधों को जिला स्तरीय मासिक अपराध समीक्षा बैठक (सीआरएम) में शामिल करने के लिए अब तक कोई पहल ही नहीं की गई है।
2014 में जारी हुए थे निर्देश
केंद्र सरकार ने 5 मई 2014 को राज्यों के डीजीपी को निर्देश जारी कर कोटपा के उल्लंघन को सीआरएम की कार्यसूची में शािमल करने को कहा था। साथ ही इसकी रिपोर्ट तैयार कर साल में 3 बार केंद्रीय गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन मप्र ने इस कानून को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया।
क्या है कोटपा कानून
सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट (प्रोहिबिशन ऑफ एडवर्टीजमेंट एंड रेग्युलेशन ऑफ ट्रेड एंड कॉमर्स, प्रोडक्शन, सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) एक्ट 2003 को देशभर में एक समान रूप से तंबाकू से जुड़े सभी उत्पाद जैसे सिगरेट, सिगार, बीडी, गुटखा, पान-मसाला, खैनी, स्नफ उत्पादों पर लागू किया गया था।
– सेक्शन-4 सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्णत: प्रतिबंध। सरकारी-निजी क्षेत्र के सर्वजनिक स्थलों पर नो-स्मोकिंग जोन का साइन बोर्ड लगा होना चाहिए।
– सेक्शन-5 तंबाकू उत्पाद के विज्ञापन, प्रमोशन और प्रोत्साहन पर प्रतिबंध। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तंबाकू उत्पाद का विज्ञापन नहीं किया जा सकता है। सांस्कृतिक समारोह या खेल के जरिए तंबाकू उत्पाद कंपनियां – प्रमोशन नहीं कर सकती हैं।
– सेक्शन-6 नाबालिगों को बिक्री पर प्रतिबंध। (6-बी) शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 100 यार्ड की परिधि में तंबाकू उत्पाद की बिक्री नहीं की जा सकती है।
– सेक्शन-7 टोबेको प्रोडक्ट पर चेतावनी। सिगरेट समेत तंबाकू से बने उत्पादों पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होेने की चेतावनी बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य है।
न रिकॉर्ड है, न कोई जानकारी
हमारे पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कितने लोगों पर और कब कोटपा के तहत जुर्माना किया गया। आखिरी बार कब कार्रवाई की गई, इसके बारे में भी मुझे जानकारी नहीं हैं। – शोभित, डिप्टी कंट्रोलर, फूड एंड ड्रग मप्र
प्रचार-प्रसार की जरूरत है
कोटपा कानून में पिछले सालों में कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस तरह के सोशियो-लीगल ईश्यूज में जागरुकता के लिए प्रचार-प्रसार के साथ ही अन्य एजेंसियों का सक्रिय होना भी जरूरी है। स्कूल, कॉलेजों के प्रिंसिपल, अस्पताल प्रशासन भी अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकते हैं, पुलिस की ओर से उनकी मदद की जाएगी। – मकरंद देउस्कर, आईजी, लॉ एंड ऑडर व प्रवक्ता मप्र पुलिस