200 किलोमीटर का इलाका और आग से निपटने के लिए मात्र दस फायर टेंडर, पहुंचने से पहले ही आग कर जाती है तबाही

200 किलोमीटर का इलाका और इस इलाके में आग से निपटने के लिए मात्र दस फायर टेंडर। यह हालत है जम्मू के सीमांत इलाकों की जहां अाग से निपटने के लिए पर्याप्त फायर टेंडर ही नहीं है। अगर अनुमान लगाया जाए तो एक फायर टेंडर के हवाले बीस किलोमीटर का क्षेत्र आता है और जब तक फायर टेंडर आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचता है तब तक आग तबाही मचाकर खुद ही शांत भी हो चुकी होती है।
जम्मू के सीमांत इलाकों में लोगों का आज भी मुख्य पेशा किसानी ही है और गर्मियों में इन किसानों की मेहनत आग निगल रही है। जम्मू जिले में बारह दिनों में दिनों में डेढ़ हजार कनाल से ज्यादा की फसल आग भेंट की चढ़ चुकी हैं जबकि कठुआ जिले में भी पिछले पांच दिनों में सात सौ कनाल फसल को आग निगल चुकी है। फसलों में अाग लगने के पीछे चाहे कारण कुछ भी रहा हो लेकिन एक बात तो सही है कि इस तबाही को बचाने के लिए तैनात फायर टेंडर समय पर आग बुझाने ही नहीं पहुंच पाए। कारण यह भी है कि सभी तहसील इलाकों में एक एक फायर टेंडर तैनात किया गया है जो बीस बीस किलोमीटर तक आग बुझाने का जिम्मा संभाल रहे हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि फायर टेंडर एक जगह आग बुझाने जाता है तो दूसरी जगह आग लगने पर वहां कोई मदद ही नहीं पहुंच पाती।
जम्मू जिले में फायर स्टेशन और गाड़ियां
फायर स्टेशन फायर टेंडर
गांधी नगर 12
गंग्याल 4
रूप नगर 2
अरनिया 1
अखनूर 1
बिश्नाह 1
आरएसपुरा 1
केनाल 1
सांबा जिले में बड़ी ब्राह्रमणा व सांबा में दो फायर टेंडर
कठुआ जिले में भी सिर्फ कठुआ व हीरानगर में दो फायर स्टेशन
तैयार रहता है फायर ब्रिगेड
फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस के डायरेक्टर जनरल वीके सिंह का कहना है कि गर्मियों में हमार फायर टेंडर हर समय तैनात रहते हैं। ग्रामीण इलाकोें में भी फायर स्टेशन बनाए गए हैं जो तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं। इसके अलावा उनकी मदद के लिए बैकअप भी दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर दूसरे स्टेशनों से भी गाड़ियों को भेजा जाता है।
101 नंबर पर करें फोन
आग लगने की घटना पेश आने पर 101 नंबर पर फोन करें। यह फोन नंबर फायर ब्रिगेड का इमरजेंसी नंबर है जो कहीं से भी मिलाया जा सकता है।
अाग लगने पर नहीं मिलता है फसल बीमा : चिब
किसान की एक तरफ आग में मेहनत जलकर राख हो जाती है तो दूसरी तरफ इसका बीमा भी नहीं मिल पाता। किसान माेर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चिब का कहना है कि फसल बीमा योजना के तहत आग से तबाही पर कुछ नहीं मिलता है। फसल बीमा योजना सिर्फ बारिश, बाढ़ में ही फसल खराब होने पर पैसा देती है। हमारी मांग है कि इस योजना के तहत आग पर तबाही को भी कवर किया जाए।
गर्मियों के दिनों में हमारे इलाके में बारिश व बाढ़ की संभावना नहीं होती। अधिकतर नुकसान किसानों को आग से ही होता है लेकिन आग लगने पर किसान को दोहरी मार पड़ती है। एक एकड़ जमीन पर गेंहू की बाेआई में कम से कम आठ हजार रुपये किसान का खर्च हो जाता है। अगर किसान को सरकार की ओर कभी मदद दे भी जाए तो एक एकड़ पर हजार रुपये ही मिलते हैं जिससे किसान की लागत भी नहीं निकलती। एक कनाल से किसान पांच बोरी गेंहू निकलता है जिससे किसान कम से कम आठ हजार कमा लेता है लेकिन आग लगने पर उसे एक एकड़ का एक हजार भी नहीं मिलता।





