20 अगस्त से यूपी विधानसभा सत्र, रद्द रहेंगे पूर्व सांसदों और विधायकों के पहचान पत्र

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बीच में उत्तर प्रदेश विधानमंडल का 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा मानसून सत्र बेहद अहम होगा। इस दौरान जहां मास्क पहनने और शारीरिक दूरी बनाए रखने के नियमों का खास तौर से पालन होगा। कई अन्य पाबन्दियां भी होंगी।
प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने शनिवार को बताया कि कोरोना के कारण यह सत्र छोटा होगा। इसके साथ ही शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए कई तरह के कदम उठाए जाएंगे। इसके मद्देनजर लॉबी और प्रथम तल का भी इस्तेमाल किया जाएगा। अन्य सत्रों की तरह इस बार लोगों को दर्शक दीर्घा से सत्र की कार्यवाही देखने की इजाजत नहीं होगी। इसमें विधायक ही नजर आएंगे। इसके साथ ही पूर्व सांसदों, विधायकों को जो स्थायी पास ‘प्रवेश पत्र’ उपलब्ध होता है, वह सत्र के दौरान स्थगित रहेगा। इस तरह वह भी मानसून सत्र में सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे।
प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्कैनर की व्यवस्था होगी। मानसून सत्र में कैफिटेरिया बंद रहेगी। इस वजह से मंत्रियों-विधायकों के लिए जलपान की भी व्यवस्था नहीं होगी। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्रीय एयर कंडीशनिंग प्रणाली में विशेष फिल्टर का उपयोग किया जाएगा।
विपक्ष सदन में सरकार को घेरने की तैयारियों में जुटा
एक तरफ सरकार जहां कोरोना की चुनौती के बीच मानसून सत्र को सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियों में जुटी हुई है। विपक्ष भी सरकार को घेरने में जुट गया है। इस वजह से सदन का हंगामेदार होना तय माना जा रहा है। विपक्ष कोरोना प्रसार रोकने को सरकार के इंतजामों पर सवाल उठाने से लेकर कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर सरकार की घेरने की कोशिश करेगा। कानपुर के बिकरू कांड सहित अन्य आपराधिक वारदातों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी की प्रबल सम्भावना है। प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जनपदों में लोगों की समस्याओं को भी विपक्ष मुद्दा बना सकता है।
सरकार कोरोना के दौरान अपने कार्य गिनाकर देगी जवाब
उधर सरकार भी कोरोना संक्रमण काल में पहले दिल्ली बार्डर और फिर ट्रेनों, रोडवेज बसों से कामगारों-श्रमिकों की सुरक्षित वापसी व उन्हें रोजगार मुहैया कराने के आंकड़ों के जरिए भी विपक्ष को जवाब देने की तैयारी में है। कोटा से छात्रों की सुरक्षित वापसी के जरिए भी सरकार अपने इंतजामों की सफलता गिनाएगी। इसके अलावा नि:शुल्क राशन उपलब्ध कराने के आंकड़ों के जरिए विपक्ष के हमलों की धार कुंद करने का पुरजोर प्रयास होगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के मुताबिक विपरीत परिस्थितियों में भी समय से वेतन देना, पेंशन और अन्य सेवा सम्बन्धी कार्यों में किसी प्रकार की कटौती नही करना दर्शाता है कि हम वित्तीय अनुशासन बनाने में बेहद सफल रहे। यह सरकार की बहुत बड़ी सफलता है।





