15 साल में ऐसा पहली बार हुआ, लोकसभा में 92 घंटे हुए बर्बाद

संसद का शीतकालिन सत्र ऐतिहासिक रहा। ऐतिहासिक इस मायने में कि पिछले 15 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब संसद के शीत सत्र में सबसे कम बैठकें हुई हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिचर्स ने यह दावा किया है। संसदीय मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में 15.75 प्रतिशत और राज्यसभा में 20.61 प्रतिशत ही काम हुआ।
बड़ी खबर: नोटबंदी, जनवरी में पीएम मोदी देंगे इस्तीफा!
पीआरएस लेजिस्लेटिव के मुताबिक राज्यसभा में 330 सूचीबद्ध सवालों में सिर्फ दो का ही मौखिक जवाब दिया जा सका। 13वी, 14वीं और 15वीं संसदों में राज्यसभा में सबसे कम प्रश्न काल हुआ। इससे पहले 2010 में 480 में से एक और 2013 में 420 में किसी भी सवाल का मौखिक जवाब नहीं दिया जा सका था।
लोकसभा में 11 प्रतिशत सवालों के मौखिक जवाब दिए जा सके। लोस स्पीकर और रास सभापति ने जताया दुख शुक्रवार 16 दिसंबर को दोनों सदनों के सत्रावसान के बाद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन व राज्यसभा सभापति हामिद अंसारी ने सदन में बार-बार हंगामे व कार्यवाही स्थगित होने पर दुख जताया।
स्पीकर ने कहा, सदन के समय की बर्बादी अच्छी बात नहीं है। इससे जनता में हमारी छवि धूमिल होती है। सभापति अंसारी ने कहा, सदन के सभी वर्गों को असहमति, व्यवधान व आंदोलन के मुद्दे पर आत्म-निरीक्षण करना होगा।





