अफगानिस्तान से भारत पहुंचे 120 भारतीय, भारतीय वायुसेना का C-17 विमान…

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही हाहाकार मच गया है। हजारों लोग देश छोड़कर जाने के लिए काबुल एयरपोर्ट पर भीड़ जमाए हुए हैं। ऐसे में ही कुछ भारतीय भी वहां फंसे हुए है जो मदद के लिए भारत सरकार की तरफ देख रेह हैं और सरकार उनकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। भारत अफगानिस्तान से भारतीय राजदूत समेत 120 भारतीय को सुरक्षित भारत लेकर आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से भारतीयों को निकालने में अमेरिकी सहायता लेने के लिए आज न्यूयॉर्क में चर्चा की है।
भारत काबुल से अपने नागरिकों के दूसरे जत्थे को निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है, अमेरिकी विदेश मंत्री ने जयशंकर को नागरिक उड़ानों के माध्यम से भविष्य में निकासी में पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकेन के बीच अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा की. इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘एंटनी ब्लिंकेन के साथ अफगानिस्तान की हालिया घटनाओं पर चर्चा की. काबुल में हवाई अड्डे के संचालन को बहाल करने की तात्कालिकता को रेखांकित किया. मैं इस संबंध में चल रहे अमेरिकी प्रयासों की गहराई से सराहना करता हूं।’
उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ अफगानिस्तान में ”ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा भी की और कहा, ”हमने काबुल में हवाईअड्डा संचालन बहाल करने की अत्यधिक आवश्यकता पर बल दिया। हम इस संबंध में अमेरिकी प्रयासों की बहुत सराहना करते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि दोनों शीर्ष राजनयिकों ने अफगानिस्तान संबंधी हालात पर चर्चा की।
जयशंकर आज यूएनएससी के सदस्यों से अफगानिस्तान मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने के साथ-साथ उसी ज्वलंत मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात करेंगे। भारतीय विदेश मंत्री दो दिनों के लिए आतंकवाद और शांति स्थापना पर यूएनएससी सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
जयशंकर ने ट्वीट किया, ”अफगानिस्तान में घटनाक्रमों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आज महत्वपूर्ण चर्चा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को जताया। संयुक्त राष्ट्र में मेरे कार्यक्रमों के दौरान इन पर चर्चा की उम्मीद है।
सिलसिलेवार किए गए ट्वीट्स में जयशंकर ने कहा कि वह काबुल में स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, ”भारत लौटने वाले लोगों की बेचैनी समझता हूं। हवाईअड्डे का संचालन मुख्य चुनौती है। इस संबंध में साझेदारों के साथ चर्चा की गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत काबुल में सिख और हिंदू समुदाय के नेताओं के लगातार संपर्क में है।





