1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने पर अड़ंगा, योजना को लेकर घेरे में दिल्ली सरकार

राजधानी में 31 मार्च 2019 तक एक हजार मोहल्ला क्लीनिक खोलने की योजना फेल होने के कगार पर है। अभी तक मात्र 187 मोहल्ला क्लीनिक ही तैयार हो सके हैं। इनमें से भी सभी चालू नहीं हैं। स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक खुलने के प्रस्ताव पर भी अड़ंगा लग सकता है। उपराज्यपाल की मंजूरी के पौने दो साल बाद भी शिक्षा विभाग ने अनुमति नहीं दी है।







मोहल्ला क्लीनिकों की हालत की सच्चाई की बात करें तो भले ही दिल्ली सरकार विदेश से आए लोगों को कुछ चुनिंदा मोहल्ला क्लीनिक दिखाकर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही हो, मगर दिल्ली के विभिन्न मोहल्ला क्लीनिकों की हालत ठीक नहीं हैं। कई मोहल्ला क्लीनिकों से पंखे व एसी तक चोरी हो चुके हैं। अन्य सामान भी बेकार हो रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सरकार अभी तक इनकी सुरक्षा के लिए कोई एजेंसी तक नियुक्त नहीं कर सकी है। लोक निर्माण विभाग ने कुछ जगहों पर सुरक्षा गार्ड लगा रखे हैं।
उधर, स्कूलों में 300 मोहल्ला क्लीनिक खोलने की योजना पर भी ग्रहण लग सकता है। सरकारी स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक खोले जाने की योजना की उपराज्यपाल (एलजी) ने 7 फरवरी 2017 को मंजूरी दे दी थी। एलजी ने शर्त लगाई थी कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। एलजी अनिल बैजल ने यह भी शर्त लगाई थी कि इसके लिए पहले संबंधित एजेंसियों को सरकार से एनओसी लेनी होगी। एजुकेशन एक्ट के किसी प्रावधान का उल्लंघन न हो। बताया जा रहा है कि उपराज्यपाल ने जिस शर्त के साथ अनुमति दी है, उसके तहत स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक नहीं खुल सकते हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी में साफ कहा था कि स्कूल एक्ट का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
नजीब जंग ने कर दिया था मना
नवंबर 2016 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने इस प्रस्ताव की फाइल केजरीवाल सरकार को वापस लौटा दी थी। उनका तर्क था कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट के तहत स्कूल परिसरों का इस्तेमाल केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही हो सकता है।
‘स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़’
दिल्ली सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक शुरू करने की कवायद शुरू हो गई है। सरकार के इस फैसले पर शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले समाजसेवियों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि सरकार का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय में वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि यह योजना दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर देगी।
स्कूल परिसर में मोहल्ला क्लीनिक स्थापित किए जाने से स्कूल की शिक्षा-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बाहर से बड़ी संख्या में लोग सुबह के वक्त इलाज कराने के लिए क्लीनिक में आएंगे। इससे स्कूल के प्रशासनिक कामकाज और लगने वाली कक्षाओं में दिक्कतें आएंगी।
स्कूलों से अगवा हो सकते हैं बच्चे
अशोक अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों में मोहल्ला क्लीनिक खोलने पर लोग लगातार वहां आएंगे। उनमें से कोई बच्चों को अगवा भी कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के लिए स्कूल एक सॉफ्ट टारगेट हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार एक तरह से राजनीतिक प्रसार के लिए ऐसा कर रही है। स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने एवं वहां पर मौजूद ग्राउंड में खेलों की व्यवस्था को बेहतर करने के बजाय क्लीनिक बनाकर परिसर को घेरने पर सरकार आमादा है।
अदालत ने बंद कराई थी स्कूल परिसर में डिस्पेंसरी
अशोक अग्रवाल ने कहा कि 2001 में निगम के स्कूल के अंदर एक डिस्पेंसरी चलाने का मामला उच्च न्यायालय के सामने आया था। स्कूल में चल रही डिस्पेंसरी में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज स्कूल परिसर में कई जगहों पर बेकार पड़ी रहती थी, जिसे बच्चे खेलने के लिए इस्तेमाल करते थे। हाई कोर्ट ने निगम के स्कूल से डिस्पेंसरी को बंद करवा दिया था। इसी तरह शाहदरा के एक स्कूल में 2001 के आसपास एक और मामला सामने आया था। स्कूल के अंदर निगम ने एक जोन का कार्यालय स्थापित कर रखा था। इसे भी कोर्ट ने बंद करवाया दिया था।