1 मई से ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम: रियल मनी छोड़ बाकी सभी को मिली छूट

भारत में आनलाइन गेमिंग के नए नियमों को अधिसूचित कर दिया है। नए नियम एक मई से लागू हो जाएंगे। आनलाइन गेमिंग के लिए नया ढांचा एक ऐसे कानून के तहत बनाया गया है जो रियल मनी गेमिंग (पैसे वाले जुए) पर प्रतिबंध लगाता है और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेमिंग को बढ़ावा देता है।
नए नियमों का मुख्य लक्ष्य
इन नियमों का उद्देश्य यह साफ करना है कि कौन सा गेम मनी गेम (जो प्रतिबंधित है) की श्रेणी में आता है और कौन सा सोशल गेम या ई-स्पोर्ट्स (जिसकी अनुमति है) है। सामान्य सोशल गेम्स के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी।
नया रेगुलेटर: आनलाइन गेमिंग
अथॉरिटी ऑफ इंडियाक्षेत्र के लिए एक नया डिजिटल रेगुलेटर बनाया जाएगा, जिसका मुख्यालय दिल्ली में होगा। इसकी अध्यक्षता इलेक्ट्रानिक्स और आइटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव करेंगे।
इसमें गृह, वित्त, खेल, कानून और सूचना-प्रसारण मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह अथारिटी प्रतिबंधित गेम की लिस्ट बनाएगी, शिकायतों को सुनेगी और वित्तीय संस्थानों व पुलिस के साथ तालमेल बिठाएगी।
गेम का वर्गीकरण
कोई गेम मनी गेम है या नहीं, इसे तय करने के लिए एक निर्धारण परीक्षण होगा। यह जांच तीन तरह से हो सकती है।
अथारिटी खुद से जांच शुरू करे।
ई-स्पोर्ट्स कंपनी खुद आवेदन करे।
सरकार किसी खास कैटेगरी के गेम्स की जांच के लिए कहे
जांच के आधार
क्या गेम खेलने के लिए पैसे जमा करने पड़ते हैं?
क्या पैसे जीतने की उम्मीद है?
इसकी जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
आनलाइन गेम रजिस्ट्रेशन
ई-स्पोर्ट्स: ई-स्पोर्ट्स: इनके लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
सोशल गेम्स: केवल उन्हीं सोशल गेम्स को रजिस्टर करना होगा जिन्हें सरकार ‘जोखिम भरा’ (बच्चों के लिए खतरा या भारी लेनदेन) मानकर अधिसूचित करेगी।
सफल रजिस्ट्रेशन पर 10 साल के लिए सर्टिफिकेट मिलेगा।
(नोट: पैसे वाले गेम्स कभी भी ई-स्पोर्ट्स नहीं कहला सकते। यूजर की सुरक्षालत और अन्य खतरों से बचने के लिए नियमों में सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं)
उम्र की पुष्टि और पैरेंटल कंट्रोल
समय की पाबंदी।
शिकायत निवारण और काउंसलिंग सहायता।
धोखाधड़ी रोकने के लिए फेयर-प्ले टूल्स।
अपील करने का तरीका
अगर किसी यूजर को गेमिंगकंपनी से शिकायत है।
पहले कंपनी के पास शिकायत दर्ज करें
समाधान न मिलने पर 30 दिनों के भीतर आनलाइन गेमिंगअथारिटी में अपील करें।
अंतिम अपील आइटी सचिव के पास की जा सकती है।
बैंकों की भूमिका
बैंक और वित्तीय संस्थान केवल उन्हीं गेमिंगकंपनियों को भुगतान की अनुमति देंगे जो रजिस्टर्ड हैं। अगर कोई कंपनी संदिग्ध लगती है, तो बैंक उनसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांग सकते हैं। यदि अथारिटी किसी गेम को बैन करती है, तो बैंक तुरंत उसका लेनदेन रोक देंगे।





