हालेप का फाइनल में मुकाबला अोस्तापेंको से, नई क्वीन मिलना तय

पेरिस की लाल बजरी पर शनिवार को जब रोमानिया की सिमोना हालेप और लातविया की येलेना ओस्तापेंको फ्रेंच अोपन के खिताबी मुकाबले में उतरेंगी तो इतिहास बनना तय है। सिमोना यदि जीती तो यहां 40 साल बाद अपने देश के लिए ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनेंगी। वहीं ओस्तापेंको जीत की स्थिति में यह करिश्मा करने वाली अपने देश की पहली टेनिस स्टार बन जाएंगी।

सिमोना से पहले सिर्फ दो रोमानियाई खिलाड़ी इली नस्तासे (फ्रेंच ओपन 1973 और यूएस ओपन 1972) और वर्जीनिया रूजीसी (फ्रेंच ओपन 1978) ही ग्रैंड स्लैम खिताब जीत पाए हैं। यही नहीं रोलां गैरां को भी नई क्वीन मिलेगी। दुनिया की तीसरे नंबर और 2014 की उपविजेता हालेप को भले ही खिताब की सबसे बड़ी दावेदार माना जा रहा हो, लेकिन 47वें नंबर की ओस्तापेंको छुपी रुस्तम साबित हो सकती हैं।
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पहली बार पेरिस में खेल रही ओस्तापेंको ने फाइनल तक के अपने सफर में ओलिंपिक चैंपियन मोनिका पुइग, पूर्व नंबर एक कैरोलिन वोज्नियाकी और समांथा स्टॉसर जैसी खिलाड़ियों को पटखनी देकर अपने इरादे जता दिए हैं। गुरुवार को ही 20 की हुई ओस्तापेंको अपनी पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी के साथ अपने इस जन्मदिन को यादगार बनाना चाहेंगी। हालांकि टखने में समस्या उनकी राह का रोड़ा बन सकती है। ओस्तापेंको 2009 के बाद किसी मेजर टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली पहली युवा खिलाड़ी हैं। उनसे पहले 19 वर्षीय डेनमार्क की कैरोलिन वोज्नियाकी के नाम यह रिकॉर्ड था।
तो नंबर वन बन जाएंगी हालेप : हालेप अगर अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीतने में सफल रहती हैं तो वह जीत के साथ ही पहली बार दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी भी बन जाएंगी। उनके उपविजेता बनने की सूरत में जर्मनी की एंजेलिक कर्बर शीर्ष पर बनी रहेंगी। वहीं, ओस्तापेंको लंबी छलांग लगाकर शीर्ष 15 में शामिल हो जाएंगी। वह 12 नंबर पर आ जाएंगी।





