हमारे शारीर को जाम होने से बचाता है ये योगासन, है इतना आसन
आज के दौर में जब कभी हम किसी मुलाकात के लिए लेट हो जाते हैं तो इसका सारा दोष ट्रैफिक पर मढ़ना काफी आसान होता है। हालांकि ये बहाना कई बार सच भी होता है और कई बार इसे किसी परेशानी से बचने के लिए एक अच्छे विकल्प की तरह भी प्रयोग किया जाता है। देखा जाए तो दुनिया के सभी शहरों में यातायात एक बड़ी समस्या है। बेहतर सड़कों, एक्सप्रेस वे, बहु-लेन राजमार्गों ने यातायात को आसान तो बनाया है बावजूद इसके कई बार कुछ ऐसे जंक्शन होते हैं जहां व्यक्ति अटक जाता है।
ये जंक्शन टोल बूथ, यातायात सिग्नल या संकरी सड़कें भी हो सकती है। एक बार जब आप इन जंक्शनों को पार करते हैं तो यातायात फिर सामान्य हो जाता है। यातायात को रोकने वाले इन जंक्शनों को अंग्रेजी में (bottle neck)’बॉटल नेक’ कहा जाता है। हमारे पास सड़कों का अच्छा नेटवर्क है लेकिन ‘बॉटल नेक’ कहलाने वाली यातायात की ये बाधाएं इस नेटवर्क को अच्छी तरह से कार्य करने से रोकती हैं। स्थिति ऐसी होती है कि आप दूर से अपना गंतव्य देख तो सकते हैं लेकिन वहां तक पहुंच नहीं सकते। आप अपने गंतव्य के बेहद करीब होने के बावजूद उससे बहुत दूर होते हैं। कल्पना कीजिए कि अगर यातायात में ‘बॉटल नेक’ कहलाने वाली कोई बाधा न हो तो यात्रा कितनी आसान हो जाएगी।
मैं योग कॉलम में ट्रैफिक के बारे में क्यों बात कर रहा हूं? तो आपको बता दें कि हमारे शरीर के अंदर भी ट्रैफिक है। हमारे भीतर काफी जटिल नेटवर्क सिस्टम है, खासकर वैस्कुलर या रक्त वाहिकाओं का या फिर न्यूरल या नर्वस सिस्टम का। यह नेटवर्क सिर से पैर की उंगलियों तक जुड़ा हुआ है। इसे दो तरफा ट्रैफिक की तरह समझ सकते हैं। एक जो मस्तिष्क से शरीर के बाकी हिस्सों की तरफ जाता है जबकि दूसरा वापस शरीर के बाकी हिस्सों से मस्तिष्क की तरफ जाता है।
इस प्रकिया में एक संवेदी तंत्रिका अपने एक सेल के माध्यम से शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में संदेश भेजती है जबकि रक्त शरीर में धमनियों,नसों और कोशिकाओं के माध्यम से बहता है। हमारी तंत्रिका का ट्रैफिक और रक्त प्रवाह बचपन और युवा अवस्था में ठीक रहता है (यदि किसी व्यक्ति को कोई बड़ी बीमारी न हो) इसके बाद हमारे शरीर का ट्रैफिक विभिन्न जंक्शनों पर इन ‘बॉटल नेक’ जैसी बाधाओं का सामना करता है। नतीजतन, इन बाधाओं से कम होने वाले ‘प्रवाह’ की वजह से व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है।





