स्मृतियों में जिंदा कलाम प्रेरणा भी हैं और आइना भी

प्रीति सिंह
अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डा.एपीजे अब्दुल कलाम की कही बातों का जिक्र करते हैं। वह बड़े ही गर्व के साथ अपने बच्चों को उनके अनमोल विचार और उनकी उपलब्धियों को बताते हैं। और जब बच्चे उनसे पूछते हैं कि आप उन्हें जानते हो तो यह बताते हुए कि -हां, मैने उन्हें देखा है, सुना है, वह गर्व से भर जाते है।
इन वाकयों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की हमारे जीवन में कितनी अहमियत है। उनका हर उस घर में जिक्र होता है जहां सपने हैं, लक्ष्य है और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा है।
देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कलाम की आज पुण्यतिथि है। आज ही के दिन (27 जुलाई) को उनका निधन शिलांग में लेक्चर देते वक्त दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।
देश के लिए दिए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वह जीते जी भी लोगों के लिए प्रेरणा थे और मृत्यु के बाद भी प्रेरणा हैं। जहां भी सफलता की बात आती है तो अब्दुल कलाम का जिक्र होता है।
पिछले एक दशक में शायद ही ऐसी कोई शख्सियत हुई हो जिसके बारे में लोग अपने घरों में, बच्चों से जिक्र करते हो। सिर्फ और सिर्फ एक अब्दुल कलाम ही ऐसी शख्सियत है जिसका जिक्र हर रोज होता है। शिक्षा की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, शिक्षक की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, मिसाइल की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, अच्छे वक्ता की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, सादगी की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, ईमानदारी की बात होती है तब उनका जिक्र होता है, देशभक्ति की बात होती है तब उनका जिक्र होता है और जब राष्ट्रपति की बात होती है तब भी उन्हीं का जिक्र होता है। तो ऐसे है हमारे पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कलाम।
ये भी पढ़े: एमपी भाजपा में ये विरोध तो होना ही था
ये भी पढ़े: कोरोना : कहां-कहां चल रहा है वैक्सीन पर काम
ये भी पढ़े: इस उम्र में छत छिनी तो कहां जायेंगे ये लोग?
अब्दुल कलाम के बारे में इतना कुछ है बताने के लिए, लिखने के लिए कि उसके लिए समय और कागज कम पड़ सकता है। उनसे जुड़े ऐसे कई किस्से लोगों की स्मृतियों में मौजूद है जिस सुनकर, पढ़कर यकीन नहीं होता कि ऐसा आचरण भी कोई कर सकता है।
बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इन किस्सों को अपने सामने घटते देखा है। दरअसल आज के दौर में जब जनसेवकों का एक बड़ा वर्ग राजा जैसा व्यवहार करता दिखने लगा है, कलाम ने सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी की कई अनुकरणीय मिसालें छोड़ी हैं। ये प्रेरणा भी हो सकती हैं और आईना भी।
ईमानदारी की बात आती है तब अक्सर अब्दुल कलाम का उदाहरण दिया जाता है और बताया जाता है कि- एक बार कलाम के कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन आए। कुल 50-60 लोग थे। स्टेशन से सब को राष्ट्रपति भवन लाया गया जहां उनका कुछ दिन ठहरने का कार्यक्रम था। उनके आने-जाने और रहने-खाने का सारा खर्च कलाम ने अपनी जेब से दिया। संबंधित अधिकारियों को साफ निर्देश था कि इन मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी। यह भी कि रिश्तेदारों के राष्ट्रपति भवन में रहने और खाने-पीने के सारे खर्च का ब्यौरा अलग से रखा जाएगा और इसका भुगतान राष्ट्रपति के नहीं बल्कि कलाम के निजी खाते से होगा। एक हफ्ते में इन रिश्तेदारों पर हुआ तीन लाख चौवन हजार नौ सौ चौबीस रुपये का कुल खर्च देश के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने अपनी जेब से भरा था।
अब्दुल कलाम से जुडा एक और वाकये का जिक्र अक्सर होता है। कलाम जब अपना कार्यकाल पूरा करके कलाम जब राष्ट्रपति भवन से जा रहे थे तो उनसे विदाई संदेश देने के लिए कहा गया। उनका कहना था, ‘विदाई कैसी? मैं अब भी एक अरब देशवासियों के साथ हूं।’
कलाम से जुड़ा तीसरा किस्सा तब का है जब राष्ट्रपति बनने के बाद वे पहली बार केरल गए थे। उनका ठहरना राजभवन में हुआ था। वहां उनके पास आने वाला सबसे पहला मेहमान कोई नेता या अधिकारी नहीं बल्कि सड़क पर बैठने वाला एक मोची और एक छोटे से होटल का मालिक था। एक वैज्ञानिक के तौर पर कलाम ने त्रिवेंद्रम में काफी समय बिताया था। इस मोची ने कई बार उनके जूते गांठे थे और उस छोटे से होटल में कलाम ने कई बार खाना खाया था।
कलाम से जुड़ा हर किस्सा प्रेरणा देता है। उन्होंने अपने जीवन का कोई भी पल व्यर्थ नहीं जाने दिया। इसीलिए शायद वह आज भी हमारी स्मृतियों में जिंदा हैं और उनके ये किस्से कइयों को प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं।
ये भी पढ़े: कोरोना काल में बदलते रिश्ते
ये भी पढ़े: चावल या गेहूं के सहारे पोषण और सेहत की क्या होगी तस्वीर ?
ये भी पढ़े: मौजूं है प्रियंका गांधी का यह सवाल





