‘सुप्रीमो’ शब्द से चिढ़ते हैं कुमार विश्वास, इस नेता को बताया पिटा हुआ हीरो

भोपाल.आम आदमी पार्टी में बगावत के सुर भले ही ठंडे पड़ गए हैं लेकिन पार्टी नेता कुमार विश्वास ने साफ कह दिया है कि उन्हें व्यक्ति पूजा बिल्कुल पसंद नहीं है। फिर चाहे वो कोई भी हो। और क्या कॉन्ट्रोवर्शियल कहा कुमार विश्वास ने…
'सुप्रीमो' शब्द से चिढ़ते हैं कुमार विश्वास, इस नेता को बताया पिटा हुआ हीरो
 
-अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना कुमार ने कहा कि उन्हें पार्टी सुप्रीमो शब्द से बेहद नफरत है।
-विश्वास शनिवार को भोपाल दैनिक भास्कर कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकारों से बात कर रहे थे।
-उन्होंने कहा कि मैंने पहले दिन से तय कर रखा है कि कोई पद नहीं लूंगा। आज तक दिल्ली सेक्रेटेरिएट की चाय नहीं पी। विधानसभा का पानी नहीं पिया।
 
मनोज तिवारी मेरे बड़े भाई जैसे
-ईवीएम पर पार्टी से अलग राय होने के सवाल पर उन्होंने दोहराया कि हम सिर्फ ईवीएम से हारे ये आंकलन का गलत आधार है।
-भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी द्वारा सच्चा देशभक्त कहने के सवाल पर कुमार ने कहा कि मनोज मेरे बड़े भाई जैसे हैं।
-अमानतुल्लाह की टिप्पणी पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
 
राहुल की हर फिल्म पिट रही है, जबरन हीरो बना रहे हैं उन्हें
-विश्वास ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वो भारतीय राजनीति के अभिषेक बच्चन हैं। उन्हें जबरन हीरो बनाने की कोशिश की जा रही है। फिल्में पिट रही हैं। ये दर्शकों का भी नुकसान है। वे रेस्टारेंट की चेन खोल लें या कपड़े का धंधा करें, लेकिन जो उनसे करवाया जा रहा है वह उनके बस का नहीं।
-राहुल के हर चुनाव पर वर्जन आते हैं। लांच वर्जन 2 , वर्जन 3। अब सिर्फ इसरो ही बच गया है, जो उन्हें लांच करे। मैंने उन्हें जो संज्ञा दी थी, वो भारत में चर्चित हो गई थी।
-कांग्रेस जब तक उनके दायरे से बाहर नहीं निकलेगी, तब तक कुछ नहीं हो सकता। कुमार ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास सचिन पायलट जैसे लोग हैं। हालांकि वे भी वंशवाद से आए हैं लेकिन मुझे उन पर उतनी शंका नहीं है। वो कुछ सोच समझ रहे हैं।
-सियाराम अब श्रीराम हो गए, सिया पीछे छूट गईं – कुमार ने कहा कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को बहुसंख्यक तुष्टिकरण में बदल दिया गया और डेवलपमेंट का मुखौटा पहन लिया गया।
-इतिहास गवाह है कि बहुसंख्यक तुष्टिकरण सदा ही भयानक विपदाओं की तरफ ले जाता है। ये डर भारत में 1992 से शुरू हुआ।
-मैंने पूरी रामायण पढ़ी है। सियाराम जयश्रीराम में कन्वर्ट हो गए। बहुसंख्यक वाद में सिया पीछे चली गईं।
 
सिंधिया राजवंश की खनक छोड़ें तो मध्यप्रदेश बदल सकते हैं
-कुमार ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया यदि अपनी राजवंशीय खनक से उतरकर जमीन पर आ जाएं तो वो भी मध्यप्रदेश में राजनीतिक विमर्श बदल सकते हैं।
-कुमार ने कहा कि सिंधिया भी वंशवाद से वास्ता रखते हैं लेकिन उनकी अपनी समझ है।
 
कांग्रेस ने 60 साल तक निर्लज्ज तुष्टिकरण किया
-कुमार ने कहा कि संवैधानिक संस्थानों की प्रासंगिकता खत्म हो रही है। न्यायालय, सीबीआई, ईडी सब प्रासंगिकता खो रहे हैं। ट्रंप से लेकर योगी तक कुछ न कुछ कामन है।
-भारत में जो हुआ है वो कांग्रेस के बेशर्म तुष्टिकरण का नतीजा है। कांग्रेस ने 60 साल तक निर्लज्ज तुष्टिकरण किया है।
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