सीएम के ओएसडी की नियुक्ति पर उठे सवाल

आरटीआई में मिली जानकारी से हुआ खुलासा 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का ओएसडी बनने के लिए किसी भी खास शैक्षिक अर्हता की जरूरत नहीं होती है। मुख्यमंत्री जिसे चाहे अपना ओएसडी बना सकता है। इस बात का खुलासा एक आरटीआई के सवाल पर मिले जवाब से हुआ है, जिसने जनसंख्या के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाने वाले ओएसडी की नियुक्ति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मतलब यह है कि मुख्यमंत्री अपने जिस कृपापात्र को चाहे, अपना ओएसडी बनाये फिर चाहे वह अनपढ़, नाकारा और अनुभवहीन ही क्यों न हो।
यूपी के सचिवालय प्रशासन अनुभाग एक के अनुभाग अधिकारी विजय कुमार मिश्र ने आरटीआई का जवाब भेजा है। जिसमें चौंकाने वाले तथ्य हैं। सचिवालय प्रशासन के इस अनुभाग को पता ही नहीं है कि यूपी में मुख्यमंत्रियों के लिए विषेश कार्याधिकारी रखने की प्रथा का आरंभ कब किया गया था। प्रदेश सरकार ने बीते 30 जून को बिना किसी नियम और अधिनियम के ही मुख्यमंत्री के पांच ओएसडी तैनात कर दिए। इनकी नियुक्ति पांच अस्थाई नि:संवर्गीय पदों का सृजन करके की गई। ओएसडी के रूप में राजभूषण सिंह रावत, अभिषेक कौशिक, संजीव सिंह, उमेश सिंह और धर्मेंद्र चौधरी को बिना किसी चयन प्रक्रिया के ही नियुक्ति दे दी गई है।

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