सबसे ज्यादा विदेश कर्ज लेने वाली मोदी सरकार !

दिल्ली ब्यूरो: बीजेपी के प्रचारक चाहे जो भी भ्रम फैलाएं लेकिन विश्व बैंक की रिपोर्ट तो यही बतात रही है कि मौजूदा पीएम मोदी अब तक के सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज लेने वाले पीएम के रूप में जाने जा रहे हैं। साल 2013 में भारत पर कूल विदेशी कर्ज का भार 409.4 अरब डॉलर था जो कुल जीडीपी का 11.1 फीसदी था। 2014 में यह बढ़ कर 446.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 10.4 फीसदी ) तथा 2015 में 474.7 अरब डॉलर (जीडीपी का 8.8 फीसदी ) हो गई। मार्च 2018 में यह कर्ज 529 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया जो भारत का कूल विदेशी कर्ज में 12.4 फीसदी की वृद्दि दर्ज कराती है।
उपलब्ध आंकड़े बताते है कि स्किल इंडिया, स्वच्छ भारत, गंगा की सफाई, प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना, शिक्षा, ऊर्जा क्षेत्र आदि के विकास के नाम पर अकेले प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने तक़रीबन 78 अरब डॉलर का कर्ज अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से 2014 से 2018 के बीच लिया है। वर्ल्ड बैक के ही रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ल्ड बैंक एवंआईबीआरडी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से विश्व में सर्वाधिक लोन लेने वाला देश के रूप में अपनी पहचान रखता है। वर्ल्ड बैंक की वेब साईट पर ये आकंड़े दर्ज हैं।
उधर बीजेपी के नेता ,मंत्री और प्रचारक ,उद्घोषक लोग बार बार जनता में यह भ्रम फैला रहे हैं कि बीजेपी सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जो विदेशों से कर्ज नहीं ली है। मोदी सरकार को स्वावलम्बी सरकार बताया जा रहा है। जाहिर है इस तरह की बाते झूठ पर आधिरित है और जनता को भ्रमित करने के लिए कहा जा रहा है। विश्व बैंक की वेबसाइट पर साफ तौर पर लिखा गया है कि भारत और विश्व बैंक के बीच इसी साल 2 फरवरी 2018 को एक करार हुआ है। इसके तहत विश्व बैंक ने भारत को वाराणसी से हल्दिया के बीच 1360 किमी का जलमार्ग बनाने के लिए 375 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया है।
इस करार पर भारत की ओर से इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन प्रवीर पांडेय, भारत सरकार वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी समीर कुमार खरे, और भारत में विश्व बैंक के डायरेक्टर जुनैद अहमद ने हस्ताक्षर किए हैं। 2018 में लिए गए लोन के अलावा मोदी सरकार ने विश्व बैंक से जिन प्रमुख मुद्दों को परोस कर लोन लिया है उनका विवरण निम्नवत हैं :
लोन लेने की तिथि लोन लेने के उद्देश्य लोन का आकार
लोन लेने की तिथि लोन लेने के उद्देश्य लोन का आकार
23 जनवरी 2018 उत्तराखंड में जल आपूर्ति 120 मि. डॉलर (8 अरब)
31 जनवरी 2018 तमिलनाडु के गांवों के हालत सुधार 100 मि. डॉलर (6.5 अरब रु)
24 अप्रैल 2018 म.प्र. के गांवों की सड़कें दुरुस्त करना 210 मि. डॉलर (करीब 14 अरब रु)
अप्रैल 2018 दवाई बनाने व गुणवत्ता में सुधार हेतु 125 मि. डॉलर (8अरब36 करोड़
8 मई 2018 राष्ट्रीय कुपोषण मिशन के लिए 200 मि. डॉलर (13.5 अरब रु)
29 मई 2018 राजस्थान के लिए 21.7 मि. डॉलर (1.5 अरब रु)
स्रोत: वर्ल्ड बैंक विभिन्न दस्तावेज, फाइनेंसियल 365
इसके अतिरिक्त अगर पिछले साल की बात करें तो उनमें कुछ चुनिंदा लोन में भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में टूरिजम को विकसित करने के लिए 40 मि. डॉलर (2 अरब 67 करोड़ रुपये) का कर्ज, 21 नवंबर 2017 को सोलर पार्क प्रोजेक्ट के लिए 100 मि. डॉलर (6.5 अरब रुपये) का कर्ज, 31 अक्टूबर 2017 को असम में ग्रामीण परिवहन के लिए 200 मि. डॉलर (13.5 अरब रुपये) का कर्ज, 30 जून 2017 को नेशनल बायोफार्मा मिशन के लिए 125 मि. डॉलर (8 अरब 36 करोड़ रुपये) का कर्ज आदि सम्मिलित हैं, जो बीजेपी IT सेल व समर्थकों सहित आम जनता की आंखें खोलने के लिए पर्याप्त है।





