सद्भावना सम्मेलन से मंदिर-मस्जिद विवाद सुलझाने की कोशिश, एक मंच पर आए संत- मौलाना

  • अयोध्या. मंदिर-मस्जिद विवाद के हल का सर्वमान्य फॉर्मूला निकालने के लिए अयोध्या में सद्भावना सम्मेलन के जरिए एक और कोशिश हुई है। इसमें शिया धर्मगुरु कल्बे जब्बाद, सुन्नी धर्मगुरु मौलाना फजले मन्नान शामिल थे । राममंदिर के पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के साथ राम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास और अयोध्या के साधू -संत भी शामिल थे।
    सद्भावना सम्मेलन से मंदिर-मस्जिद विवाद सुलझाने की कोशिश, एक मंच पर आए संत- मौलाना

    सद्भावना सम्मेलन में सुझाया गया फॉर्मूला

    -इस सद्भावना सम्मेलन में सभी पक्षों ने मस्जिद -मंदिर विवाद को सुलझाने को लेकर अपनी अपनी राय रखी। अयोध्या के साधू-संत अधिग्रहित परिसर में राम मंदिर बनाने और कुछ दूरी पर मस्जिद बनाने का फॉर्मूला सुझाया। इस पर दोनों धर्मगुरूओ के सहमत होने की बात करते रहे।

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    – वहीं, सुन्नी धर्मगुरु मौलाना फजले मन्नान ने कहा की अबतक सुलह समझौते की कोशिशे कई बार हुई है लेकिन किन्ही कारणों से इसका कोई सर्वमान्य हल नहीं निकला।लिहाजा इस मसले का हल निकालने के लिए वह फिर से कोशिशो में लगे है। इसके लिए माहौल तैयार कर रहे है।
    -सबसे चौंकाने वाला बयान शिया धर्मगुरु कल्बे जब्बाद ने दिया उन्होंने दो चीजे साफ़ की । एक यह कि यह मसला दोनों पक्षो के धर्मगुरु की आपसी बैठक में ही तय हो सकता, वह भी तब जब राजनीतिज्ञों की इसमें कोई भागीदारी न हो ।
    -राजनीतिज्ञ इस मसले को उलझाएंगे ही सुलझाएंगे नहीं अगर सुलझ गया तो वह वोट कैसे मांगेगे। दूसरा यह की अगर यह साबित हो गया की मंदिर तोड़कर जबरन मस्जिद बनाई गई थी, तो वह मस्जिद किसी काम की नहीं है, हमारे लिए बेकार है।

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