सत्ता विरोधी लह को अमित शाह ने माना लेकिन कांग्रेस के कड़े टक्कर को नकारा

भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में कई मोर्चों पर चुनौती का सामना कर रही है। आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हार्दिक पटेल के नेतृत्व में चल रहा नया जातीय गठबंधन हो या 22 सालों से सत्ता में आसीन रहने के कारण सत्ता विरोधी लहर, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इन सबसे बेफिक्र नजर आते हैं। शाह कहते हैं कि गुजरात चुनाव में 182 में से 150 सीटें जीतने का एक यथार्थवादी लक्ष्य है। 
खबरों के मुताबिक ऐसी मंजर बना है कि गुजरात चुनाव में कांग्रेस पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है। कई राज्यों में चुनाव जीतने के बाद क्या भाजपा को अपने गृह राज्य में इतने मजबूत विरोध की उम्मीद थी। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में भाजप अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि हर चुनावों में ऐसी संभावनाएं सामने आती हैं लेकिन भाजपा तीन-चौथाई बहुमत से विजयी होती रही है। गुजरात के लोगों ने 1995 से भाजपा का समर्थन किया है। अमित शाह ने उम्मीद जताई कि राज्य को लोग विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी पर यकीन बनाए रखेंगे। 

गुजरात के ग्रामीण इलाकों में पटेल समुदाय की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ सकती है। वहीं फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे किसानों के कई मुद्दे बने हुए हैं। शहरी इलाकों में जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दे छाए हुए हैं। विपक्ष ने चुनाव में इन मुद्दों को प्रमुखता से आवाज दी है। लेकिन अमित शाह इन मुद्दों को महत्वपूर्ण नहीं मानते। उनका मानना है कि कांग्रेस गुजरात में जाति आधारित राजनीति कर रही है और उसने ऐसा पहले भी किया है।

शाह के मुताबिक कांग्रेस ने केएसएएम (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी, मुस्लिम) नीति की शुरुआत की थी जिससे राज्य की जनता सालों तक प्रभावित रही। शाह का मानना है कि गुजरात की जनता ने जाति की राजनीति को नकार दिया है और वे भाजपा के विकास के एजेंडे के साथ हैं। अमित शाह मानते हैं कि जीएसटी के मसले पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर लंबित मुद्दों का समाधान कर दिया है। 

‘गुजरात में 24 घंटे बिजली रहती है, देश में सबसे अच्छी सड़कें हैं’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सालों तक राज्य का नेतृत्व किया और अब वे बाहर हैं। उनकी गैर-मौजूदगी में गुजरात में भाजपा पर असर पड़ा है। विरोध का सामना कर रही आनंद पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा और विजय रूपानी ने कमान संभाली। लेकिन शाह मानते हैं कि मोदी के पीएम बनने के बाद सकारात्मक और अनुकूल बदलाव हुए। उन्होंने गुजरात के विकास के लिए कई पहल की हैं। शाह ने मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया।

शाह के मुताबिक, ‘मोदी जी पीएम हैं और रुपानी सीएम हैं, इससे गुजरात का विकास कई गुना तेजी से हो रहा है। नर्मदा बांध ऊंचाई जैसे कई मुद्दे हैं जिन्हें 14 दिनों में सुलझा लिया गया। तेल रॉयल्टी से जुड़ी कुछ समस्याओं का समाधान कर 8,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। 1,200 कि.मी. की नई सड़क निर्माण को मंजूरी दी गई है। 13वें वित्त आयोग में केंद्रीय आवंटन 63,000 करोड़ रुपये था, जो कि बढ़कर 1,58,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसलिए कई सालों के बाद गुजरात के लोगों के पास केंद्र और राज्य दोनों में ऐसी सरकार है जो उनके लिए काम कर रहे हैं।’ 

लंबे समय तक सत्ता में रहने से अक्सर थकान और हार का सामना करना पड़ता है। बीजेपी इस तरह के कारकों से निपटने के लिए कितनी अच्छी तरह तैयार है? इस सवाल के जवाब में शाह कहते हैं कि वे सत्ता विरोध लहर को नकार नहीं रहे हैं, जो अक्सर लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के कारण होती है। लेकिन शाह के मुताबिक जब आप अपने किए वादों को पूरा करते हैं और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हैं तो विकासवादी ढांचे के आधार पर आपका एक वोट बैंक तैयार हो जाता है। जिसे बीजेपी करने में सफल रही है।

शाह दावा करते हैं गुजरात में 24 घंटे बिजली रहती है, देश में सबसे अच्छी सड़कें हैं और कोई भी कल्याणकारी योजनाओं की सफलता पर सवाल नहीं उठा सकता है। शाह करते हैं कि आज गुजरात कर्फ्यू और टैंकर मुक्त है और राज्य सरकार की सफलता की वजह से 150 सीटें मिलेंगी। 

 
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