शिक्षा विभाग का कहना है कि पिछले 4 साल में DDA से उसे बस एक एकड़ जमीन स्कूल बनाने के लिए मिली….

दिल्ली में सरकारी स्कूलों की कमी और छात्रों द्वारा स्कूल के लिए लंबा सफर तय करने जैसी समस्याओं पर शिक्षा विभाग का कहना है कि पिछले 4 साल में डीडीए से उसे बस एक एकड़ जमीन स्कूल बनाने के लिए मिली है. इसके साथ ही आधिकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि शहरों के उपेक्षित हिस्सों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में सबसे बड़ी परेशानी भूमि उपलब्ध न होना है.
बाहरी दिल्ली के प्रेम नगर में रह रहे बच्चे भी इस समस्या से जूझ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, एक लाख आबादी वाले प्रेम नगर में सरकारी स्कूलों की कमी के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए मुश्किल सफर तय करना पड़ता है. स्कूल जाने के लिए बच्चों को पैदल चलते हुए रेलवे ट्रैक तक से गुजरना पड़ता है. इस पर एक लोकल एनजीओ ने दिल्ली हाई कोर्ट से सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनाने की अपील की है, ये केस फिलहाल अदालत में है.
30 नए स्कूलों पर चल रहा काम
इस मामले पर शिक्षा निदेशक विनय भूषण ने कहा कि हमारे पास वहां कोई जमीन नहीं है, अगर डीडीए या गांव सभा हमें जमीन मुहैया कराती है तो हम वहां स्कूल बनवाएंगे. भूषण ने आगे कहा कि शिक्षा विभाग फिलहाल कम से कम 30 नए स्कूलों को बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिनका निर्माण कार्य अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादा आबादी वाले इलाकों में जहां स्कूल बनाने की योजना चल रही है, उनमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में करावल नगर और खजूरी खास, उत्तर-पश्चिम दिल्ली में रोहिणी सेक्टर 27, सेक्टर 18 और दक्षिण दिल्ली में आया नगर है. इनमें गीता कॉलोनी भी शामिल है, जहां शिक्षा विभाग ने दावा किया है कि उसे डीडीए से जमीन का एकमात्र प्लॉट मिला है.
जमीन के अलावा शिक्षकों की कमी भी है परेशानी
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 2 सालों में हमने नए स्कूल बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है. इसमें जमीन का ज्यादातर हिस्सा गांव सभा से मिला है. पिछले 2 साल में हमें जमीन के लगभग 78 प्लॉट मिले हैं. इसके लिए अब तक 24 स्कूलों के निर्माण की योजनाओं को मंजूरी मिल गई है और बाकी को मंजूरी दिलाने पर काम चल रहा है. जिससे अगस्त तक काम शुरू किया जा सके. इसके बाद भी स्कूल को चलाने के लिए लगभग 2 साल तक का समय लगेगा. जमीन के अलावा भूषण ने स्कूलों के लिए अगली परेशानी शिक्षकों की कमी बताई. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण ज्यादातर स्कूल गेस्ट टीचर्स से चल रहे हैं.
डीडीए ने दिया जवाब
वहीं इस मामले पर डीडीए के उपाध्यक्ष तरुण कपूर ने बताया कि डीडीए द्वारा प्राइमरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए जमीन चिन्हित करके दी जाती. उन्होंने कहा कि परेशानी तब आती है जब लोग सरकारी भूमि का अतिक्रमण कर गैरकानूनी तरीके से निर्माण कर उसका इस्तेमाल करने लगते हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब तक डीडीए के पास जमीन है, हम हमेशा शैक्षणिक संस्थानों के विकास को प्राथमिकता देंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे भी कई प्लॉट हैं, जो सालों पहले स्कूलों के लिए दिए गए हैं लेकिन कई जगह खाली पड़े हैं.





