विश्व अस्थमा दिवस: अब घबराने की बात नहीं, क्योंकि अब अस्थमा पर काबू पाना आसान

बढ़ता प्रदूषण और बदलती जीवनशैली सभी को प्रभावित कर रही है। इन सबका मिलाजुला प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर अस्थमा के रूप मे दिखता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रजनी डाबर ने कहा इस रोग के प्रति जागरुकता के लिए 6 मई को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर आमजन को अस्थमा रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा बच्चों में भी अस्थमा अब एक गंभीर बीमारी का रूप ले चुकी है। अस्थमा से अब घबराने की कोई बात नहीं है, क्योंकि अब इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इस रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सक की सलाह अनुसार उपचार करवाएं।

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इस रोग की प्रवृत्ति वंशानुगत होती है, परंतु ऐसा न हीं है कि यदि परिवार में एक को दमा है तो औरों को भी होगा ही। 50 प्रतिशत बच्चे युवा अवस्था में पहुंचते ही दमा से मुक्त हो जाते हैं। दमा रोग सर्दी, जुकाम जैसा नहीं है, जो एक से दूसरे को लग जाए। अस्थमा के लक्षण कष्टदायक सांस के साथ घबराहट और सांस फूलना, सांस लेने में कष्ट और खांसी से रात को नींद खुल जाना, चलने से सांस फूलना आदि हैं। ये लक्षण दिखते ही नियमित इलाज करवाएं ताकि स्वस्थ जीवन जी सकें। 

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