लोहिया संस्थान के कर्मचारी क्यों है नाराज

जुबिली स्पेशल डेस्क
लखनऊ। लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर लखनऊ के कर्मचारियों की एक बैठक मंगलवार संपन्न हुई। इस बैठक में कई मुद्दो पर चर्चा की गई है। इस बैठक में कर्मचारियों को कोरोना काल में हो रही परेशानी को लेकर बातचीत की गई है।
इन बिन्दुओं पर हुई चर्चा
1 शासनादेश के अनुसार बिना समुचित प्रशिक्षण के कोविड-19 साल में कर्मचारियों की तैनाती के संबंध में चर्चा हुई शासनादेश में आ स्पष्ट उल्लेख है कि जिस भी कर्मचारी की ड्यूटी कोविड-19 इकाई में लगाई जाए ड्यूटी से पहले उसका समुचित प्रशिक्षण किया जाए लेकिन संस्थान द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।
2 निदेशक कमेटी डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर लखनऊ द्वारा यह स्पष्ट निर्देश है कि ड्यूटी लगाने के 2 सप्ताह पूर्व कर्मचारियों को अवगत करा दिया जाए इसका उल्लेख कमेटी के पत्र के बिंदु नंबर 7: 00 पर अंकित है लेकिन संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तथा हॉस्पिटल ब्लॉक की मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा ड्यूटी दिनांक 5 सितंबर 2020 की है और प्राप्त 9 सितंबर 2020 को कराया जा रहा है और कहा जा रहा है कि तुरंत ड्यूटी पर चले जाइए जिसका सब समझ से सभी कर्मचारियों ने विरोध किया के निदेशक कमेटी के अनुसार ड्यूटी पहले से बताई जाए।
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3 हॉस्पिटल ब्लॉक के होल्डिंग एरिया में कोविड-19 मरीजों को डॉक्टरों द्वारा जबरजस्ती बेड पर लिटा दिया जा रहा है और वहां पर दूसरे सामान्य मरीज भी उन्हीं के बगल में रहते हैं जिसकी शिकायत पूर्व में निदेशक महोदय तथा अधीक्षक  से किया गया था लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो रहा इनफेक्शन कंट्रोल प्रोटोकोल का खुला उल्लंघन हो रहा है इस पर भी चर्चा हुई मरीज हित में इस तरह की मनमानी करना अन्य मरीजों के जान को जोखिम में डालना है।
4 चिकित्सालय के कर्मचारियों के लिए आने जाने का एकमात्र रास्ता जो प्राइवेट वार्ड के सामने से था उसको चिकित्सा अधीक्षक द्वारा गुंडई करके बंद कराया गया है जिसे खुलवाने के लिए कर्मचारियों ने निदेशक को भी पत्र लिखा है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
कर्मचारी मजबूर होकर होल्डिंग एरिया की तरफ से रात की ड्यूटी में तथा दोपहर की ड्यूटी में वह मॉर्निंग की ड्यूटी में मरीजों के बीच से जाने के लिए मजबूर है जहां पर जाने अनजाने में वह भी स्नान का संक्रमण होने का पूरा संभावना है ड्यूटी आने तथा जाने का सबसे आसान रास्ता यही था इसको दोस्त भावना से चिकित्सा अधीक्षक द्वारा बंद करा दिया गया जिससे आए दिन अधिकारियों तथा कर्मचारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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5 हॉस्पिटल ब्लॉक के कर्मचारियों का आई कार्ड बनाने के लिए 6 महीना पहले आवेदन पत्र जमा किया गया था जो आज तक बनकर नहीं मिला जिस पर कर्मचारियों ने रोष व्यक्त किया रोज व्यक्त करना वाजिब है क्योंकि करो ना काल में रात की ड्यूटी व अन्य ड्यूटी में आने जाने में कर्मचारियों को परेशानी होती है और पूछने पर कर्मचारी के पास कोई कागज नहीं होता है कि वह दिखा दे कि हॉस्पिटल से आ रहा है या हॉस्पिटल जा रहा है इस संबंध में निदेशक महोदय से पूर्व में वार्ता हुई थी उन्होंने कहा था जल्दी बनवा देंगे लेकिन आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं किया।
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6 कर्मचारियों के गाड़ी खड़ी करने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं है जिससे आए दिन परेशानी होती रहती है।
7 कुछ वारदाता डिपार्टमेंट ऐसे हैं जहां पर कारोना के सस्पेक्टेड रोगी इलाज के लिए आते हैं और उनका इलाज कर्मचारियों द्वारा किया जाता है इस संबंध में निदेशक महोदय से पहले वार्ता हुई थी कि उन सभी कर्मचारियों को फेस शिल्ड व अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करा दिए जाएंगे लेकिन   एक्स-रे विभाग के कुछ कर्मचारियों को तहसील दिया गया कुछ को नहीं दिया गया जहां पर आए दिन सस्पेक्टेड मरीज का चेस्ट एक्सरे होता रहता है इसी तरह से वेंटिलेटर यूनिट है वहां पर भी कुछ कर्मचारियों को दिया गया कुछ कर्मचारियों को नहीं दिया गया जिसके कारण से ज्यादा कर्मचारी संक्रमित हो रहे हैं।

8 हॉस्पिटल ब्लॉक के एक्सरे विभाग में आए दिन कुछ देर तथा एसआर अपने व्यक्तिगत मरीजों को लेकर आते हैं जिनका ना तो स्कैनिंग हुआ रहता है और ना किसी तरह का फेशियल लगाए हुए होते हैं जबरदस्ती एक्स-रे कराने का दबाव बनाते हैं और एक्सीडेंट डिपार्टमेंट में खड़े रहते हैं।
9 4 अक्टूबर को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा की उपस्थिति में बैठक हुई थी जिसमें प्रमुख सचिव  ने हॉस्पिटल ब्लॉक के कर्मचारियों को संस्थान की बात वेतन और भत्ते दिए जाने के संबंध में निदेशक को स्पष्ट आदेश दिया था कि प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा दें जिससे परीक्षण कराकर कर्मचारियों को वेतन व भत्ते दिए जा सकें लेकिन  निदेशक  ने प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत नहीं किया। हॉस्पिटल ब्लॉक के अधिकारियों द्वारा मनमानी किया जा रहा है और कर्मचारी हितों तथा मरीजों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा।

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